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हल्दीघाटी और रक्त तलाई पर हाईकोर्ट सख्त, अतिक्रमण पर रोक

हल्दीघाटी और रक्त तलाई पर हाईकोर्ट सख्त, अतिक्रमण पर रोक

मेवाड़ की भूमि अपने गौरवशाली इतिहास, शौर्य और बलिदान के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। इस क्षेत्र के स्मारक केवल पत्थर और मिट्टी के ढांचे नहीं हैं, बल्कि वे उस स्वाभिमान और वीरता के प्रतीक हैं, जिसने भारतीय इतिहास को दिशा दी। हल्दीघाटी दर्रा और रक्त तलाई ऐसे ही ऐतिहासिक स्थल हैं, जो महाराणा प्रताप के अदम्य साहस और मुगलों के खिलाफ संघर्ष की कहानी कहते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में इन स्थलों पर अतिक्रमण, अवैध निर्माण और प्रशासनिक उपेक्षा ने गंभीर चिंता खड़ी कर दी है।

राजस्थान हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान

हल्दीघाटी दर्रा और रक्त तलाई की बिगड़ती स्थिति को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया। न्यायाधीश पीएस भाटी और संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इन ऐतिहासिक स्थलों पर हो रहे अतिक्रमण और पर्यावरणीय नुकसान को गंभीर मानते हुए इसे विरासत के संरक्षण से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताया।

केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस

हाईकोर्ट ने इस प्रकरण में केंद्र सरकार और राजस्थान सरकार दोनों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि हल्दीघाटी दर्रा और रक्त तलाई क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नए निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि इन स्थलों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्ता को देखते हुए इनके संरक्षण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पर्यावरण और अवसंरचना को लेकर सख्त निर्देश

अदालत के समक्ष पेश रिपोर्ट में सामने आया कि हल्दीघाटी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण और अन्य विकास कार्यों के दौरान 200 से अधिक पेड़ों की कटाई की गई। पहाड़ियों को समतल किया गया, जिससे न केवल प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंचा बल्कि संभावित पुरातात्विक अवशेषों के दबने की आशंका भी जताई गई।

हाईकोर्ट ने खुले सीवरेज के बहाव को मोड़ने, जलभराव की समस्या के समाधान और स्वच्छता व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए हैं। कोर्ट ने माना कि गंदगी और अव्यवस्था न केवल पर्यटकों के अनुभव को खराब करती है, बल्कि ऐतिहासिक स्थलों की गरिमा को भी ठेस पहुंचाती है।

24×7 निगरानी व्यवस्था के आदेश

इन स्थलों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट ने 24 घंटे निगरानी व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य अतिक्रमण रोकना, अवैध गतिविधियों पर नजर रखना और ऐतिहासिक धरोहर को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है। कोर्ट ने संकेत दिए कि यदि निर्देशों का पालन नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।

रक्त तलाई की बदहाल स्थिति पर चिंता

रिपोर्ट में रक्त तलाई क्षेत्र की स्थिति को लेकर भी गंभीर तथ्य सामने आए। यहां गंदगी, शराब की खाली बोतलें और अवैध अतिक्रमण पाए गए, जो इस पवित्र ऐतिहासिक स्थल की गरिमा के खिलाफ हैं। कोर्ट ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए प्रशासन को तत्काल प्रभाव से सफाई, संरक्षण और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

हल्दीघाटी दर्रा का ऐतिहासिक महत्व

हल्दीघाटी दर्रा राजसमंद और पाली जिलों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण भौगोलिक मार्ग है। यही वह स्थान है, जहां 1576 में महाराणा प्रताप और मुगल शासक अकबर की सेनाओं के बीच ऐतिहासिक युद्ध हुआ था। यह युद्ध भले ही सामरिक दृष्टि से निर्णायक न रहा हो, लेकिन महाराणा प्रताप का साहस और आत्मसम्मान भारतीय इतिहास में अमर हो गया। हल्दीघाटी की मिट्टी आज भी उस संघर्ष की गवाही देती है।

रक्त तलाई: युद्ध का सबसे भीषण स्थल

खमनोर क्षेत्र के पास स्थित रक्त तलाई वह मैदान है, जहां हल्दीघाटी युद्ध का सबसे भीषण चरण हुआ था। लोककथाओं और ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, युद्ध के दौरान इतना रक्तपात हुआ कि वहां खून की एक तलाई भर गई, जिसके कारण इस स्थान का नाम ‘रक्त तलाई’ पड़ा। यह स्थल केवल युद्ध की याद नहीं दिलाता, बल्कि बलिदान और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का प्रतीक भी है।

संरक्षण की दिशा में अहम कदम

राजस्थान हाईकोर्ट का यह कदम ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि समय रहते इन स्थलों को अतिक्रमण और उपेक्षा से नहीं बचाया गया, तो आने वाली पीढ़ियां केवल किताबों में ही महाराणा प्रताप के शौर्य को पढ़ पाएंगी। कोर्ट के निर्देशों से यह उम्मीद जगी है कि हल्दीघाटी दर्रा और रक्त तलाई को उनका खोया हुआ गौरव वापस मिलेगा और मेवाड़ की यह अमूल्य विरासत सुरक्षित रह सकेगी।

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