राजस्थान में बुधवार को पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के साथ ही मौसम ने अचानक करवट ली। दिनभर कई इलाकों में रुक-रुककर बारिश होती रही, जबकि करीब एक दर्जन स्थानों पर ओलावृष्टि भी दर्ज की गई। इस बदलाव से दिन का तापमान सामान्य से छह डिग्री तक नीचे चला गया। बारिश और ओलों के बाद ठंडी हवाओं ने पूरे प्रदेश में सर्दी का एहसास वापस कर दिया। मौसम विज्ञान केंद्र ने पहले ही चेतावनी दी थी कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण प्रदेश के उत्तरी, मध्य और पूर्वी भागों में तेज हवाओं के साथ मध्यम बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है। बुधवार को इसका व्यापक असर दिखाई दिया।
जयपुर सहित कई जिलों में बारिश और ओले
सबसे ज्यादा प्रभाव सीकर, जयपुर, सवाईमाधोपुर, झुंझुनूं, बीकानेर, नागौर, हनुमानगढ़, अजमेर, फलोदी में देखने को मिला, जहां बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। पश्चिमी राजस्थान में सबसे अधिक बारिश नोहर में 20 मिलीमीटर दर्ज की गई, जबकि पूर्वी राजस्थान में जयपुर के नारायणा में 27 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। कई जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं, जिसने ओलावृष्टि को और प्रभावी बना दिया।
शादी समारोहों में बिछी ओलों की सफेद चादर
Jaipur के बस्सी उपखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में मौसम परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव देखा गया। अचानक आए तेज अंधड़ और ओलावृष्टि ने कई गांवों में सफेद चादर बिछा दी। देवगांव, खतैपुरा, सिंदौली, फालियावास, लसाड़िया और मनोहरपुरा सहित आसपास के गांव पूरी तरह ओलों से ढक गए। कई स्थानों पर शादी समारोह चल रहे थे, जो ओलावृष्टि के कारण प्रभावित हुए और खुले स्थानों पर की गई तैयारियां क्षतिग्रस्त हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि ओलावृष्टि इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में खेत, सड़कें व घरों के सामने की जगहों पर बर्फ जैसे ओलों की मोटी परत जम गई।
आने वाले दिनों में मौसम रहेगा शुष्क
मौसम विभाग के अनुसार आगामी पांच से छह दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। हालांकि इस दौरान रात और सुबह के तापमान में हल्की गिरावट बनी रहेगी। विभाग ने बताया कि 19 फरवरी को पूर्वी राजस्थान में कहीं-कहीं आंशिक बादल छाए रह सकते हैं, लेकिन वर्षा की संभावना बहुत कम है। इसके बाद तापमान में दोबारा बढ़ोतरी शुरू होगी और प्रदेश में गर्मी के शुरुआती संकेत फिर से दिखाई देने लगेंगे।
बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान
राज्य में इस समय रबी फसलों की कटाई का दौर चल रहा है। ऐसे में अचानक हुई बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सरसों की कटाई कई क्षेत्रों में जारी है, और कुछ जगहों पर फसल खेतों में पड़ी थी, जो पानी और ओलों से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई।
Rajasthan Agricultural Research Institute, Durgapura के निदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह मनोहर ने बताया कि चना, सरसों और जौ की पक चुकी फसलों को नुकसान पहुंचा है। जिन खेतों में फसलें तैयार थीं, उनमें दाने झड़ने और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि गेहूं और देरी से बुवाई की गई जौ की फसलों के लिए यह बारिश फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि इससे मिट्टी की नमी बढ़ेगी और फसल की बढ़वार अच्छे स्तर पर हो सकेगी।


