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अजमेर दरगाह उर्स पर पीएम की चादर को लेकर याचिका, सुनवाई जारी

अजमेर दरगाह उर्स पर पीएम की चादर को लेकर याचिका, सुनवाई जारी

मनीषा शर्मा, अजमेर।  सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती उर्फ गरीब नवाज की दरगाह पर आयोजित होने वाले 814वें सालाना उर्स से पहले एक बार फिर विवाद चर्चा में आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य संवैधानिक पदों की ओर से उर्स के दौरान चढ़ाई जाने वाली चादरों पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर बुधवार को समानांतर कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई गुरुवार को करने का आदेश दिया है।

यह मामला संवेदनशील होने के कारण कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सिविल लाइन थाना प्रभारी शंभू सिंह अतिरिक्त पुलिस जाब्ते के साथ कोर्ट परिसर में तैनात रहे।

हिंदू सेना की याचिका, संकटमोचन शिव मंदिर का दावा

यह याचिका हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की ओर से पेश की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि अजमेर दरगाह परिसर में संकटमोचन शिव मंदिर होने के ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद हैं और उर्स के दौरान प्रधानमंत्री व अन्य संवैधानिक पदों की ओर से चढ़ाई जाने वाली चादरें इस दावे को कमजोर करती हैं। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान विष्णु गुप्ता स्वयं कोर्ट में मौजूद रहे।

इससे पहले 10 दिसंबर को इस याचिका पर लिंक कोर्ट में सुनवाई हुई थी, जहां दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। अब एक बार फिर इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।

विष्णु गुप्ता का बयान, विपक्ष पर लगाए आरोप

सुनवाई के बाद मीडिया से बातचीत में विष्णु गुप्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री सहित अन्य संवैधानिक पदों की ओर से चढ़ाई जाने वाली चादर को लेकर उनकी याचिका पर विस्तृत सुनवाई हुई है। उन्होंने कहा कि यह चादर अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के माध्यम से दरगाह भेजी जाती है, जिससे हर साल एक नया साक्ष्य तैयार हो जाता है और संकटमोचन शिव मंदिर के दावे को कमजोर करने की कोशिश होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में विपक्ष जानबूझकर आपत्तियां लगाकर प्रक्रिया को लंबा खींचने का प्रयास कर रहा है। गुप्ता के अनुसार, विपक्ष की ओर से उठाई गई सभी आपत्तियों का जवाब कोर्ट में दे दिया गया है और अब गुरुवार को फिर से सुनवाई होगी।

22 दिसंबर को पेश हो सकती है पीएम की चादर

ख्वाजा गरीब नवाज के 814वें उर्स के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 22 दिसंबर को चादर पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्री किरेन रिजिजू यह चादर लेकर अजमेर आ सकते हैं। मंत्रालय की ओर से इस संबंध में दरगाह कमेटी को संकेत दिए गए हैं, हालांकि अभी तक कार्यक्रम को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, रजब महीने का चांद दिखाई देने पर 22 दिसंबर को उर्स का पहला या दूसरा दिन हो सकता है। ऐसे में उर्स की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री की ओर से चादर पेश किए जाने की परंपरा निभाई जा सकती है।

दरगाह पक्ष की तैयारी, प्रक्रिया की जानकारी साझा

दरगाह से जुड़े पक्षों का कहना है कि चादर चढ़ाने की परंपरा वर्षों पुरानी है और इसे लेकर निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। मंत्रालय की ओर से इस प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी, जिसे दरगाह प्रशासन ने उपलब्ध करा दिया है। दरगाह कमेटी और खादिमों का कहना है कि उर्स के दौरान शांति, सद्भाव और परंपराओं का सम्मान सर्वोपरि है।

पिछले उर्स में भी पेश हुई थी पीएम की चादर

गौरतलब है कि ख्वाजा गरीब नवाज के 813वें उर्स के दौरान भी प्रधानमंत्री की ओर से चादर पेश की गई थी। उस अवसर पर केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्री किरेन रिजिजू स्वयं चादर लेकर दरगाह पहुंचे थे। उनके साथ भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय और स्थानीय पदाधिकारी भी मौजूद थे। दरगाह कमेटी, दरगाह दीवान और खादिमों की ओर से उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया था। उर्स के दौरान हर साल प्रधानमंत्री की ओर से भेजा गया पैगाम भी दरगाह परिसर में जायरीन को पढ़कर सुनाया जाता है, जिसमें देश में अमन, भाईचारे और सद्भाव का संदेश दिया जाता है।

उर्स से पहले बढ़ी सियासी और कानूनी हलचल

814वें उर्स की औपचारिक शुरुआत झंडा चढ़ाने के साथ होने जा रही है, लेकिन उससे पहले पीएम की चादर पर रोक को लेकर दायर याचिका ने सियासी और कानूनी हलचल बढ़ा दी है। अब सबकी नजर गुरुवार की सुनवाई पर टिकी है, जहां कोर्ट के अगले रुख से यह तय होगा कि उर्स के दौरान चादर की परंपरा पर कोई असर पड़ेगा या नहीं।

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