मनीषा शर्मा, अजमेर। हरियाणा के फतेहाबाद जिले के नाढ़ोडी गांव के किसान विकास भांभू इन दिनों अपने मुर्रा नस्ल के झोटे ‘कुबेर’ के कारण सुर्खियों में हैं। राजस्थान के अजमेर जिले में आयोजित प्रसिद्ध पुष्कर मेले में जब उन्होंने कुबेर को प्रस्तुत किया, तो उसकी कीमत 21 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। हालांकि, विकास ने साफ कहा कि चाहे कोई 50 करोड़ रुपए भी दे दे, वे अपने झोटे को नहीं बेचेंगे। यह खबर ऐसे समय आई है जब कुछ दिन पहले ही हरियाणा के कुरुक्षेत्र के मशहूर 9 करोड़ के झोटे युवराज की मौत ने पशुप्रेमियों को दुखी कर दिया था। युवराज की जगह अब कुबेर ने ले ली है, जो हरियाणा की नई ‘शान’ बन गया है।
पुष्कर मेले में कुबेर का जलवा
राजस्थान के पुष्कर मेले में जब विकास भांभू ने अपने झोटे कुबेर को पेश किया, तो वहां मौजूद लोगों की नजरें उसी पर टिक गईं। आंध्र प्रदेश के पशु व्यापारियों ने सबसे ऊंची बोली लगाई और कुबेर की कीमत 21 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। विकास भांभू ने बताया कि उन्होंने 22 अक्टूबर को मेले में हिस्सा लिया और 1 नवंबर को पहली बार कुबेर को प्रस्तुत किया था। पहले दिन ही व्यापारियों ने इसकी कीमत 11 करोड़ रुपए आंकी, लेकिन बाद में सोमवार को यह कीमत बढ़कर 21 करोड़ तक पहुंच गई। कुबेर ने मेले में आयोजित पशु प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया। उसकी शानदार कद-काठी, चमकदार काला शरीर और आक्रषक चाल देखकर लोग उसकी प्रशंसा किए बिना नहीं रह सके।
कुबेर झोटा — मुर्रा नस्ल का अनमोल नमूना
विकास भांभू ने बताया कि कुबेर केवल 3.5 साल का है और यह पूरी तरह शुद्ध मुर्रा नस्ल का झोटा है। उसकी ऊंचाई साढ़े पांच फुट, चमड़ी मुलायम और चिकनी, और शरीर बेहद तगड़ा और संतुलित है। कुबेर की मां की पहचान भी शानदार रही है — वह एक बार में साढ़े 23 लीटर तक दूध देती थी और जिला स्तरीय प्रतियोगिता में इनाम जीत चुकी है। ऐसे में कुबेर का जन्म और उसका विकसित होना, पशुपालन के क्षेत्र में एक मिसाल बन गया है।
‘कुबेर को बेचेंगे नहीं, उसकी नस्ल बढ़ाएंगे’
विकास भांभू ने कहा कि कुबेर केवल उनकी कमाई का जरिया नहीं, बल्कि उनकी मेहनत और शान की पहचान है। उन्होंने स्पष्ट कहा — “कोई चाहे 50 करोड़ भी दे दे, मैं कुबेर को नहीं बेचूंगा। यह मेरे गांव और प्रदेश की शान है।” अब विकास कुबेर को बेचने के बजाय उसे सीमन बैंक में रखेंगे। वहां से उसके सीमन का उपयोग उच्च गुणवत्ता की मुर्रा नस्ल को बढ़ाने में किया जाएगा। इससे उन्हें हर महीने लाखों रुपए की आय होगी, साथ ही प्रदेश के पशुपालकों को भी फायदा मिलेगा क्योंकि उन्हें उच्च गुणवत्ता का सीमन वाजिब दामों पर उपलब्ध होगा।
कुबेर के सीमन की बुकिंग शुरू
कुबेर की कीमत 21 करोड़ रुपए लगने की खबर के बाद से ही हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कई जिलों से विकास भांभू को सीमन बुकिंग के लिए लगातार कॉल आने लगे हैं। विकास का कहना है कि वह जल्द ही हिसार स्थित राष्ट्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र (NDRI) के वैज्ञानिकों से संपर्क करेंगे ताकि कुबेर के सीमन को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित किया जा सके।
कुबेर की देखभाल — विशेष आहार और दिनचर्या
विकास भांभू बताते हैं कि कुबेर की सेहत और रूप बनाए रखने के लिए उसे खल-बिनौला, चना, हरा चारा और कभी-कभी दूध-घी भी दिया जाता है। वह झोटे को रोजाना नियमित व्यायाम कराते हैं और उसकी सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। विकास के अनुसार, “झोटे की देखभाल किसी बच्चे से कम नहीं होती। रोजाना उसके लिए समय देना पड़ता है। उसकी काया और चमक उसकी सेहत का प्रमाण है।”
विदेशी पर्यटक भी कुबेर के दीवाने
पुष्कर मेले में कुबेर को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। खास बात यह रही कि विदेशी पर्यटक, विशेषकर महिला पर्यटक, कुबेर के साथ सेल्फी और वीडियो लेने को उत्सुक नजर आए। कई विदेशी फोटोग्राफर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी कुबेर की तस्वीरें और वीडियो साझा कर रहे हैं, जिससे यह झोटा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना रहा है।
जिला प्रशासन ने किया कुबेर को सम्मानित करने का निर्णय
राजस्थान सरकार के पशुपालन विभाग की ओर से बुधवार को झोटे कुबेर और उसके मालिक विकास भांभू को सम्मानित किया जाएगा। विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुखविंद्र सिंह ने कहा कि, “हमारे जिले के किसी झोटे की कीमत 21 करोड़ लगना गर्व की बात है। कुबेर की वजह से न केवल जिला बल्कि पूरा प्रदेश गौरवान्वित हुआ है।” विकास ने भी कहा कि यह उपलब्धि उनके गांव के हर किसान और पशुपालक के लिए प्रेरणा है।
कुबेर की सफलता के पीछे किसानों की मेहनत
विकास भांभू 10 एकड़ भूमि पर खेती करते हैं और साथ ही पशुपालन को अपनी आजीविका का प्रमुख हिस्सा मानते हैं। उन्होंने बताया कि यह सफलता वर्षों की मेहनत, प्यार और समर्पण का परिणाम है। विकास का कहना है कि “कुबेर जैसे झोटे पालना आसान नहीं है। इसमें हर दिन की मेहनत और अनुशासन जरूरी है। मैं चाहता हूं कि हमारे युवा किसान भी पशुपालन की दिशा में कदम बढ़ाएं।”
हरियाणा का युवराज और अब कुबेर
कुछ ही दिन पहले हरियाणा के कुरुक्षेत्र के मशहूर 9 करोड़ के झोटे युवराज की 23 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो गई थी। युवराज ने अपने जीवनकाल में 29 राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं जीतीं और 1500 किलोग्राम वजन व 9 फीट लंबाई के लिए जाना जाता था। उसके सीमन से लगभग 2 लाख कटड़े-कटड़ियां पैदा हुईं और वह हर साल 80 लाख रुपए की कमाई कराता था। अब जब युवराज नहीं रहा, तो हरियाणा का नया ‘युवराज’ कुबेर बन चुका है, जिसने अपने मूल्य और कद से सबको प्रभावित कर दिया है।


