राजस्थान के दौसा जिले स्थित विश्व प्रसिद्ध मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में गुरुवार को हनुमान जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पूरा मंदिर परिसर भक्ति के रंग में रंगा नजर आया।इस पावन अवसर पर सिद्धपीठ के महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज के सान्निध्य में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्वयंभू बालाजी का 1100 किलो पंचामृत से अभिषेक किया गया, जो इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा।
पंचामृत अभिषेक और स्वर्ण चोला बना मुख्य आकर्षण
हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर बालाजी महाराज का भव्य श्रृंगार किया गया। पंचामृत से अभिषेक के बाद भगवान को सोने का चोला पहनाया गया, जिससे गर्भगृह का दृश्य अत्यंत दिव्य और अलौकिक बन गया। बालाजी की बालरूप झांकी सजाई गई, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मंदिर परिसर में भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था, जहां हर कोई इस विशेष अवसर का साक्षी बनने के लिए आतुर नजर आया।
विशाल भोग और कन्याओं को वस्त्र वितरण
धार्मिक अनुष्ठानों के क्रम में भगवान को 1784 किलो चूरमा, मेवा, फल और विभिन्न व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। यह भोग आयोजन की भव्यता और श्रद्धा का प्रतीक बना। इसके साथ ही महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज द्वारा 151 कन्याओं को वस्त्र वितरित किए गए, जिसे सेवा और दान की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मंगला आरती और फूलों की वर्षा से गूंजा परिसर
सुबह सात बजे मंगला महाआरती के साथ ही मंदिर परिसर घंट-घड़ियालों की ध्वनि से गूंज उठा। आरती के समय का वातावरण अत्यंत भक्तिमय और भावनात्मक था।
विशेष आकर्षण के रूप में श्रद्धालुओं पर ड्रोन और हेलीकॉप्टर के माध्यम से फूलों की वर्षा की गई, जिससे पूरा माहौल दिव्यता से भर गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध तरीके से बालाजी के दर्शन किए और प्रसाद अर्पित किया। मंदिर ट्रस्ट द्वारा पंचामृत, पकौड़ी, बूंदी और छप्पनभोग का वितरण भी किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया।
हाथी-घोड़े, झांकियां और भव्य सजावट ने बढ़ाई शोभा
हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया। यहां दो हाथी और छह घोड़े भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कारीगरों ने मंदिर प्रांगण और गर्भगृह को आकर्षक सजावट से सुसज्जित किया। मंदिर के प्रवेश द्वार को महलनुमा स्वरूप दिया गया, जबकि बाहरी हिस्से में रंग-बिरंगी थ्रीडी लाइटिंग और सजावटी पर्दों ने पूरे परिसर को एक उत्सव स्थल में बदल दिया।
करीब 300 मीटर लंबी सजी हुई गैलरी और विभिन्न झांकियां श्रद्धालुओं को आकर्षित करती रहीं। इसके अलावा बड़ी स्क्रीन के माध्यम से भी दर्शन की व्यवस्था की गई, जिससे अधिक से अधिक लोग इस आयोजन का लाभ उठा सकें।
दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु, विशेष मान्यता का केंद्र
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता के कारण यहां देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यह धाम विशेष रूप से नकारात्मक शक्तियों और प्रेतबाधा से मुक्ति के लिए प्रसिद्ध माना जाता है।
मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालु बालाजी महाराज की कृपा से अपने कष्टों से मुक्ति पाते हैं। मंदिर में स्थित बालाजी की प्रतिमा के सीने के बाईं ओर एक छोटा छिद्र है, जिससे लगातार जल प्रवाहित होता रहता है। इसे भी आस्था का विशेष प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु यहां आरती में शामिल होकर उसके छींटे ग्रहण करते हैं, जिसे रोग मुक्ति और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा के लिए शुभ माना जाता है।


