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हनुमान बेनीवाल फिर बने आरएलपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष

हनुमान बेनीवाल फिर बने आरएलपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष

शोभना शर्मा। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हनुमान बेनीवाल ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है। नागौर के सांसद बेनीवाल को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) का राष्ट्रीय अध्यक्ष दोबारा चुना गया है। नागौर में हुई पार्टी की आमसभा में यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। राजस्थान भर से आए आरएलपी के सदस्यों, पदाधिकारियों और समर्थकों की मौजूदगी में हुई इस सभा में बेनीवाल को फिर से नेतृत्व सौंपने पर सभी ने एकमत राय जताई। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में 2028 के विधानसभा चुनाव की राजनीतिक हलचल धीरे-धीरे तेज हो रही है।

नागौर में हुई आरएलपी की आमसभा में बड़ा ऐलान

नागौर में आयोजित आरएलपी की आमसभा में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सभा में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने पार्टी की स्थिति पर चर्चा की और आगामी चुनावों की तैयारी को लेकर रणनीतिक रोडमैप तैयार किया। सभा के दौरान हनुमान बेनीवाल ने संगठन के प्रति निष्ठा और एकजुटता पर बल देते हुए कहा कि “आरएलपी राजस्थान की जनता की आवाज है और यह पार्टी किसान, युवा और आम आदमी के हितों के लिए संघर्ष करती रहेगी।”

नया संगठनात्मक ढांचा घोषित

पार्टी ने इस अवसर पर अपनी नई राष्ट्रीय टीम का गठन भी किया। मनीष चौधरी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। माधाराम भाकल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। नेम सिंह को राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया।

इन नियुक्तियों के साथ पार्टी ने यह संकेत दिया कि आने वाले महीनों में संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से सक्रिय किया जाएगा। सभा में आरएलपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक नारायण बेनीवाल, इंदिरा देवी बावरी और खींवसर उपचुनाव की उम्मीदवार कनिका बेनीवाल सहित कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे।

2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर आरएलपी की रणनीति

आरएलपी की इस आमसभा का सबसे बड़ा संदेश था—2028 के विधानसभा चुनाव में मजबूती से उतरना। सभा के दौरान हनुमान बेनीवाल ने कहा कि “राजस्थान की जनता अब पारंपरिक दलों से ऊब चुकी है और बदलाव की जरूरत है। आरएलपी वह विकल्प बनेगी जो जनता की वास्तविक आवाज को विधानसभा तक पहुंचाएगी।” उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से ग्राम पंचायत स्तर से बूथ स्तर तक संगठन को सशक्त करने की अपील की। सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं ने भी यह संकल्प लिया कि वे आगामी पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों में पूरे दमखम से उतरेंगे।

पिछले चुनावों में प्रदर्शन कमजोर रहा

हालांकि, बेनीवाल के सामने आने वाला चुनाव आसान नहीं होगा। पिछले 2023 विधानसभा चुनाव में आरएलपी ने राज्य की 77 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से 76 उम्मीदवार चुनाव हार गए
खुद हनुमान बेनीवाल नागौर सीट से मात्र 2059 वोटों के अंतर से जीत हासिल कर सके थे। इसके बाद खींवसर उपचुनाव में उनकी पत्नी कनिका बेनीवाल को हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों ने पार्टी की जनाधार स्थिति को कमजोर किया, जिससे संगठन के सामने विश्वसनीयता बहाल करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

बेनीवाल का राजनीतिक सफर और मौजूदा स्थिति

हनुमान बेनीवाल का राजनीतिक करियर शुरू से ही जन आंदोलनों और किसान राजनीति से जुड़ा रहा है। पूर्व में वे भाजपा से जुड़े थे, लेकिन 2018 में पार्टी से मतभेदों के बाद उन्होंने अपनी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) का गठन किया। बेनीवाल ने अपनी पार्टी को किसानों, युवाओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर केंद्रित किया।
2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने नागौर से भाजपा के समर्थन से जीत दर्ज की, लेकिन बाद में कृषि कानूनों और किसानों के आंदोलन को लेकर उन्होंने भाजपा से दूरी बना ली। अब एक बार फिर आरएलपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद बेनीवाल की कोशिश रहेगी कि वे पार्टी को राजस्थान के तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित कर सकें।

राजनीतिक चुनौतियाँ और अवसर

राजस्थान की राजनीति पर नजर डालें तो राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलता है। ऐसे में किसी तीसरे मोर्चे के लिए जमीन तैयार करना आसान नहीं है। लेकिन बेनीवाल का जनाधार नागौर, जोधपुर, पाली, सीकर और झुंझुनूं जैसे इलाकों में अभी भी मजबूत माना जाता है। पार्टी का लक्ष्य है कि आगामी चुनावों में कम से कम 15-20 विधानसभा सीटों पर प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज की जा सके। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आरएलपी को अब संगठनात्मक मजबूती और स्पष्ट वैचारिक दिशा की आवश्यकता है। अगर बेनीवाल जनता से सीधे संवाद और क्षेत्रीय मुद्दों पर फोकस बनाए रखते हैं तो वे आगामी चुनावों में एक बार फिर अपनी पहचान मजबूत कर सकते हैं।

आमसभा में संगठन की एकजुटता पर जोर

नागौर की बैठक में हनुमान बेनीवाल ने अपने संबोधन में कहा कि “राजनीति में संघर्ष करने वाले ही सफल होते हैं। आरएलपी कार्यकर्ता न तो सत्ता से डरेंगे और न किसी दबाव में आएंगे। हमारा लक्ष्य राजस्थान की जनता के अधिकारों की रक्षा करना है।” सभा के दौरान कई वक्ताओं ने यह भी कहा कि पार्टी को अब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी संगठनात्मक प्रचार को गति देनी चाहिए ताकि युवाओं तक उसका संदेश पहुंचे।

भविष्य की दिशा

अब जबकि हनुमान बेनीवाल फिर से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं, आरएलपी की रणनीति का अगला चरण होगा—

  1. संगठन का पुनर्गठन (ब्लॉक और बूथ स्तर पर)

  2. राज्यव्यापी जनसंवाद यात्राएं

  3. युवा और किसान मोर्चा को सक्रिय करना

  4. 2028 विधानसभा चुनाव की सीटवार रणनीति तैयार करना

इन कदमों से बेनीवाल यह साबित करना चाहेंगे कि आरएलपी केवल एक व्यक्ति पर आधारित पार्टी नहीं, बल्कि जनता के मुद्दों पर केंद्रित जनआंदोलन है।

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