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गुर्जर आरक्षण समिति की आंदोलन की चेतावनी

गुर्जर आरक्षण समिति की आंदोलन की चेतावनी

राजस्थान में एक बार फिर गुर्जर आरक्षण का मुद्दा गरमाने लगा है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी देते हुए संकेत दिया है कि यदि लंबित मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है। रविवार को हिंडौन सिटी में स्थित कर्नल बैंसला निवास पर समिति की अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी व्यक्त की गई। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार के साथ पिछले वर्ष हुए समझौते के बावजूद अधिकांश मांगें अब भी अधूरी हैं, जिससे समाज में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी शहीद दिवस यानी 23 मई तक आंदोलन की नई रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा।

बैंसला निवास पर हुई महत्वपूर्ण बैठक

बैठक की अध्यक्षता गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय सिंह बैंसला ने की। बैठक में समाज के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें परमाल सिंह खटाणा, रामराज भोपर, प्रताप सिंह घांटर, रामावतार बडिया, मोहर सिंह माल, रेनडायल सिंह और भूपेश पांचोली सहित कई अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार के साथ हुए समझौते के बाद भी अधिकांश मांगों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। इससे समाज में असंतोष और आक्रोश की स्थिति बनी हुई है।

पिछले समझौते की याद दिलाई

समिति के नेताओं ने बताया कि पिछले वर्ष 8 जून को गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति और राज्य सरकार के बीच समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत आंदोलन के दौरान शहीद हुए रूपनारायण गुर्जर के परिवार को अनुकम्पा नियुक्ति देने का निर्णय लिया गया था। समिति का कहना है कि यह मांग पूरी कर दी गई, लेकिन इसके अलावा अन्य सभी प्रमुख मांगें पिछले दस महीनों से लंबित हैं। समाज के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने इन मांगों को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

मुकदमों के निस्तारण में देरी पर नाराजगी

बैठक में आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए मुकदमों के निस्तारण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2023 से मार्च 2026 तक आंदोलन से जुड़े किसी भी मुकदमे का निस्तारण नहीं किया गया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नवंबर 2023 में 42 मामलों में निस्तारण की बात कही गई थी, लेकिन उन मामलों से जुड़े एफआईआर नंबर अभी तक समाज के साथ साझा नहीं किए गए हैं। साथ ही इन मामलों में अब तक किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई वापस नहीं ली गई है। समिति के नेताओं का कहना है कि सरकार की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के कारण समाज में भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

देवनारायण योजना के क्रियान्वयन पर चर्चा

बैठक में देवनारायण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा की गई। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि इस योजना का लाभ समाज के लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है। इस मुद्दे पर सहमति बनी कि हर महीने होने वाली देवनारायण योजना की समीक्षा बैठक में संबंधित मंत्री के साथ चर्चा की जाएगी। समिति ने यह भी कहा कि योजना के क्रियान्वयन की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।

आरजेएस बैकलॉग का मुद्दा भी उठा

बैठक के दौरान राजस्थान न्यायिक सेवा (RJS) में बैकलॉग पदों के क्रियान्वयन का मुद्दा भी उठाया गया। समिति के नेताओं ने कहा कि इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। समिति का मानना है कि यदि अदालत के निर्देशों के बाद भी बैकलॉग पदों को नहीं भरा जाता है तो यह न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी है। इस मुद्दे पर भी सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की गई।

करौली मामले में कार्रवाई की मांग

बैठक में आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज एक पुराने मामले का भी जिक्र किया गया। यह मामला करौली जिले में दर्ज अभियोग संख्या 354/2008 और प्रकरण संख्या 4/2016 से जुड़ा है। समिति के अनुसार इस मामले में सरकार बनाम बदन के तहत संपत्ति कुर्की के आदेश जारी किए गए थे। इस मामले की जानकारी वर्ष 2024 में सरकार को दी जा चुकी है, लेकिन डेढ़ साल बीतने के बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। समिति ने इस मामले में भी शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।

कुशालीदर्रा में शहीदों की मूर्ति लगाने का निर्णय

बैठक में सर्वसम्मति से एक महत्वपूर्ण निर्णय भी लिया गया। तय किया गया कि कुशालीदर्रा में स्थित शहीद स्थल पर शहीदों की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह कार्यक्रम आगामी शहीद दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। समिति के नेताओं ने बताया कि इस संबंध में पिछले तीन वर्षों से स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मांग की जा रही थी, लेकिन अब तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी। इसी कारण अब समाज ने स्वयं इस कार्य को पूरा करने का निर्णय लिया है।

टीएसपी क्षेत्र में एमबीसी आरक्षण की मांग

बैठक में टीएसपी क्षेत्र में एमबीसी आरक्षण लागू करने की मांग भी उठाई गई। समिति का कहना है कि इस क्षेत्र में रहने वाले समाज के लोगों को अभी तक आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। समिति के नेताओं का कहना है कि यदि सरकार इस मुद्दे पर जल्द निर्णय नहीं लेती है तो समाज आंदोलन के लिए मजबूर हो सकता है।

शहीद दिवस तक तय होगी आगे की रणनीति

बैठक के अंत में यह निर्णय लिया गया कि आगामी शहीद दिवस यानी 23 मई तक समाज की अगली रणनीति तय की जाएगी। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लोगों से संवाद किया जाएगा और उनकी राय भी ली जाएगी। समिति के नेताओं ने कहा कि यदि सरकार समय रहते लंबित मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती है तो समाज बड़े स्तर पर आंदोलन करने का फैसला कर सकता है।

गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार के साथ टकराव नहीं बल्कि समाज के अधिकारों को सुनिश्चित करना है। हालांकि यदि मांगों की अनदेखी जारी रहती है तो आंदोलन का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

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