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जैसलमेर के रेगिस्तान में मिला भू-जल भंडार, पोकरण के लिए जल संकट से राहत की उम्मीद

जैसलमेर के रेगिस्तान में मिला भू-जल भंडार, पोकरण के लिए जल संकट से राहत की उम्मीद

पश्चिम राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र जैसलमेर से जल संकट को लेकर एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। वर्षों से पानी की गंभीर किल्लत झेल रहे पोकरण विधानसभा क्षेत्र में अब भू-जल की नई संभावनाएं सामने आई हैं। अत्याधुनिक हेलीबोर्न सर्वे के माध्यम से उन इलाकों में भी पानी की मौजूदगी के संकेत मिले हैं, जहां अब तक पारंपरिक सर्वे और ड्रिलिंग पूरी तरह असफल रहे थे। इसे रेगिस्तान में जल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

यह सर्वे वर्ष 2021 में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के विशेष प्रयासों से कराया गया था, जिसके विस्तृत परिणाम अब सामने आए हैं। केंद्रीय भू-जल बोर्ड द्वारा जैसलमेर जिला कलेक्टर को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, पोकरण क्षेत्र के कई गांवों में भू-जल उपलब्धता की प्रबल संभावनाएं दर्ज की गई हैं।

15 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में किया गया गहन वैज्ञानिक अध्ययन

यह हेलीबोर्न सर्वे भारत सरकार के केंद्रीय भू-जल बोर्ड, एनजीआरआई हैदराबाद और राजस्थान राज्य भू-जल विभाग के संयुक्त सहयोग से किया गया। सर्वे के अंतर्गत फलसूंड से छायन और धुडसर से राजगढ़ तक फैले लगभग 15 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया गया।

वरिष्ठ भू-जल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया के अनुसार, पोकरण तहसील का अधिकांश हिस्सा अब तक अत्यंत अल्प जल वाला क्षेत्र माना जाता था। यहां पारंपरिक तरीकों से किए गए सर्वे और बोरिंग में पानी मिलने की संभावनाएं बेहद कम रही हैं। लेकिन हेलीबोर्न सर्वे ने इस धारणा को बदलते हुए कई ऐसे गांवों में भी भू-जल संरचनाओं की पहचान की है, जहां पहले पानी की उम्मीद तक नहीं की जाती थी।

64 स्थानों पर मिले भू-जल के संकेत

सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, कुल 64 स्थानों पर भू-जल के संकेत मिले हैं। इनमें से 55 स्थान ऐसे हैं, जहां पहले कभी पानी नहीं मिला था। यह खोज क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पोकरण और आसपास के इलाकों में पानी जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता बनी हुई है।

हेलीबोर्न सर्वे एक आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें हेलीकॉप्टर के माध्यम से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और जियोफिजिकल प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक की मदद से कम समय में बड़े क्षेत्र का सटीक और गहराई से अध्ययन संभव हो पाता है, जिससे भूगर्भीय जल संरचनाओं की स्पष्ट पहचान की जा सकती है।

आपात स्थिति में नलकूप बन सकते हैं जीवन रेखा

हालांकि पोकरण और भनियाणा उपखंड में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के माध्यम से पेयजल उपलब्ध है, लेकिन प्राकृतिक आपदा या आपात स्थिति में यह पर्याप्त साबित नहीं हो पाता। ऐसे में हेलीबोर्न सर्वे से चिह्नित इन स्थलों पर नलकूपों का निर्माण आमजन के लिए जीवन रेखा बन सकता है।

भू-जल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया का कहना है कि यदि इन स्थानों पर योजनाबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से काम किया जाए, तो आने वाले वर्षों में पोकरण क्षेत्र का जल संकट काफी हद तक स्थायी रूप से समाप्त किया जा सकता है। यह खोज न केवल जैसलमेर बल्कि पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है।

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