शोभना शर्मा। भारत का हैंडीक्राफ्ट सेक्टर सिर्फ एक उद्योग नहीं है, बल्कि यह देश की परंपरा, संस्कृति और कला का जीवंत आईना है। देश के लाखों कारीगर और छोटे उद्यम इस क्षेत्र से जुड़े हैं और अपनी कला से भारत का नाम दुनिया भर में रोशन कर रहे हैं। लेकिन लंबे समय से टैक्स और रिफंड से जुड़ी परेशानियां इस सेक्टर की रफ्तार को थामे हुए थीं। अभी तक हैंडीक्राफ्ट उत्पादों पर 5 प्रतिशत से लेकर 18 प्रतिशत तक जीएसटी लगाया जाता है। ऐसे में कारीगरों की लागत बढ़ जाती है और उन्हें अपने उत्पादों के निर्यात पर रिफंड पाने के लिए कई-कई महीनों तक इंतजार करना पड़ता है।
अब केंद्र सरकार इस सेक्टर को बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव है कि हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट्स पर जीरो जीएसटी लागू किया जाए। अगर यह बदलाव अमल में आता है तो यह कारीगरों और छोटे कारोबारियों के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा, जिसे सही मायने में गेमचेंजर कहा जा सकता है।
अभी कितना जीएसटी लगता है हैंडीक्राफ्ट पर?
वर्तमान समय में हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट्स पर अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से टैक्स लगाया जाता है। मेटल से बने हैंडीक्राफ्ट पर 12 फीसदी, लकड़ी के उत्पादों पर 12 और 18 फीसदी तक, जबकि कपड़े से बने हैंडीक्राफ्ट पर 5 फीसदी जीएसटी देना होता है। इन दरों की विविधता कारीगरों और कारोबारियों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। कई बार टैक्स की अलग-अलग दरों की वजह से उनका पूरा कैश फ्लो प्रभावित होता है। छोटे निर्माता और एक्सपोर्टर को IGST रिफंड के लिए 90 दिन तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी कमाई और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है।
कारीगरों और कारोबारियों को कैसे मिलेगा फायदा?
यदि सरकार जीरो जीएसटी का प्रस्ताव लागू करती है तो कारीगरों को सबसे बड़ी राहत यह होगी कि उन्हें रिफंड के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे उनका नकदी प्रवाह सुचारू रहेगा और वे नए ऑर्डर पर ज्यादा तेजी से काम कर पाएंगे। इसके साथ ही उत्पादों की लागत घटेगी, जिससे बाजार में कीमतें कम होंगी। कम दामों पर उपलब्ध उत्पाद न सिर्फ घरेलू बाजार में ग्राहकों को आकर्षित करेंगे, बल्कि विदेशी बाजार में भी ज्यादा प्रतिस्पर्धी साबित होंगे।
इस बदलाव से छोटे कारीगरों का मुनाफा बढ़ेगा। लंबे समय से वे जीएसटी दरों और रिफंड की जटिल प्रक्रिया से परेशान थे। जीरो जीएसटी लागू होने के बाद वे केवल अपनी कला और उत्पादन पर ध्यान दे पाएंगे।
एक्सपोर्ट सेक्टर को नई रफ्तार
भारत का हैंडीक्राफ्ट सेक्टर पहले से ही ग्लोबल स्तर पर काफी लोकप्रिय है। अमेरिकी, यूरोपीय और मिडिल ईस्ट बाजारों में भारतीय हस्तकला की जबरदस्त मांग है। लेकिन टैक्स और महंगे उत्पादों की वजह से कई बार भारतीय प्रोडक्ट्स प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाते थे। जीरो जीएसटी लागू होने के बाद भारतीय हैंडीक्राफ्ट न सिर्फ सस्ते होंगे बल्कि क्वालिटी और डिजाइन के दम पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई ऊंचाइयां छू पाएंगे।
यह कदम भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर को भी नई जान देगा। अभी हैंडीक्राफ्ट उत्पादों के निर्यात में कई देशों के उत्पाद भारत से सस्ते पड़ते हैं। लेकिन जीएसटी हटने के बाद भारतीय कारीगरी और भी किफायती दामों पर उपलब्ध होगी, जिससे भारत का निर्यात बढ़ेगा और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होगा।
भारत की परंपरा और संस्कृति को बढ़ावा
हैंडीक्राफ्ट सिर्फ बिजनेस नहीं है, बल्कि यह भारत की परंपरा और संस्कृति की धरोहर है। हर राज्य की अपनी अलग कला और शिल्प हैं, जो इस क्षेत्र की विविधता को और खास बनाते हैं। जीरो जीएसटी लागू होने से यह न सिर्फ कारीगरों को राहत देगा बल्कि भारतीय कला को वैश्विक मंच पर और भी मजबूत पहचान दिलाएगा।


