मनीषा शर्मा। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (Rajasthan PCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने शुक्रवार को जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज देश में अघोषित आपातकाल (Unofficial Emergency) जैसी स्थिति है, जहां सच्चाई बोलने वालों पर कार्रवाई की जा रही है और विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास हो रहा है।
“सच्चाई बोलो तो पीछे पड़ जाती हैं एजेंसियां” – डोटासरा
डोटासरा ने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार ईडी, इनकम टैक्स और सीबीआई जैसी एजेंसियों का राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा – “आज देश में कोई भी नेता अगर सच्चाई बोलता है या सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, तो तुरंत उसके पीछे एजेंसियों को लगा दिया जाता है। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि अघोषित आपातकाल है।” उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है, जबकि सरकार समर्थित लोगों को पूर्ण संरक्षण मिल रहा है।
राजस्थान सरकार पर सीधा हमला – ‘राज्य का भट्टा बैठा रही है सरकार’
राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार पर निशाना साधते हुए डोटासरा ने कहा कि राज्य में प्रशासनिक स्थिति बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा – “यह सरकार राजस्थान का भट्टा बैठा रही है। लोगों के काम नहीं हो रहे हैं। मुख्यमंत्री और मंत्री भी अपने निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। सब कुछ ‘ऊपर की पर्ची’ से चल रहा है।” डोटासरा ने यह भी कहा कि राज्य की नौकरशाही (Bureaucracy) पूरी तरह से सरकार और मंत्रियों पर हावी हो चुकी है। अधिकारी अब किसी का डर नहीं मानते और जनता के कार्यों में लापरवाही बरत रहे हैं।
“एक डीजी पर दूसरा डीजी बैठा दिया” – PHQ की कार्यप्रणाली पर सवाल
डोटासरा ने राज्य पुलिस मुख्यालय (PHQ) की व्यवस्था में किए गए बदलावों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में डीजीपी (DGP) के अधिकार समाप्त कर दिए गए हैं और अब पुलिस व्यवस्था में भ्रम की स्थिति है। उन्होंने कहा – “हमारे समय में पुलिस मुख्यालय में एक ही डीजीपी होता था, जिसका इकबाल और अधिकार स्पष्ट होते थे। आज हालत यह है कि एक डीजी पर दूसरा डीजी बैठा दिया गया है। चार-चार डीजी बना दिए हैं। कमिश्नर भी है, स्पेशल कमिश्नर भी। अब बताइए, यह ‘स्पेशल कमिश्नर’ आखिर करेगा क्या?” डोटासरा ने सवाल उठाया कि इस तरह की प्रशासनिक बहुलता (Administrative Overlap) से जनता के काम कैसे होंगे, जब खुद विभागों में अधिकारों का टकराव पैदा हो गया है।
“ब्यूरोक्रेसी हावी है और मंत्री बेबस” – डोटासरा का गंभीर आरोप
डोटासरा ने कहा कि राजस्थान सरकार में आज ब्यूरोक्रेसी पूरी तरह नियंत्रण में है और मंत्री भी अपनी बात नहीं मनवा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार मंत्री अपनी वैध और उचित मांगें रखते हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। “जब मंत्री की बात नहीं सुनी जाती, तो आम जनता का क्या होगा? अधिकारी अब मंत्रियों के फोन तक नहीं उठाते। यह स्थिति लोकतंत्र को कमजोर कर रही है।” डोटासरा ने कहा कि राज्य के प्रशासनिक हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं, जिससे जनता का सरकार पर से भरोसा उठता जा रहा है।
अंता उपचुनाव और SIR प्रक्रिया पर निशाना – “वोट चोरी नहीं होने देंगे”
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आगामी अंता उपचुनाव और SIR (Special Summary Revision) यानी मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन प्रक्रियाओं में वोटों में हेरफेर और कटौती की कोशिश कर रही है। “अंता का चुनाव आने वाला है। उस चुनाव का नतीजा बताएगा कि सरकार कहां खड़ी है। कांग्रेस SIR में एक भी वाजिब वोट नहीं कटने देगी और अंता चुनाव में वोट चोरी नहीं होने देगी।” डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस का संगठन इस बार पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरेगा और हर बूथ स्तर पर निगरानी रखेगा।
हर विधानसभा पर ऑब्ज़र्वर नियुक्त करने का फैसला
कांग्रेस ने अब राज्य की हर विधानसभा क्षेत्र में एक ऑब्ज़र्वर नियुक्त करने का निर्णय लिया है, जो स्थानीय स्तर पर पार्टी के बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) को ट्रेनिंग देंगे। यह ऑब्ज़र्वर सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से गलत तरीके से न काटा जाए। डोटासरा ने बताया कि BLA प्रशिक्षण अभियान दो महीने तक चलेगा, जिसके तहत हर कार्यकर्ता मतदाता सूची सत्यापन और वोटरों की फोटो पहचान की प्रक्रिया की निगरानी करेगा। उन्होंने फोटो सबमिशन को लेकर जारी नई तकनीकी बाध्यताओं पर भी सवाल उठाए। “बीएलओ जब घर-घर जाकर फोटो ले रहा है तो एप में डिजिटल रूप से फोटो सेव की जाए, न कि मतदाता से फोटो मंगवाने की शर्त रखी जाए। गांवों में रहने वाले लोग कहां से फोटो लाएंगे?” डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस का हर कार्यकर्ता अब SIR प्रक्रिया पूरी होने तक सक्रिय रहेगा और जनता के वोट के अधिकार की रक्षा करेगा।
राजस्थान की राजनीति में बढ़ी गर्मी
डोटासरा के इस बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। एक ओर वे केंद्र सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने राज्य सरकार की प्रशासनिक नाकामी को खुलकर उजागर किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि डोटासरा के ये बयान आगामी उपचुनावों से पहले कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का संकेत हैं, जिसमें वे सरकार को घेरने के लिए “जनता के अधिकार” और “लोकतंत्र की रक्षा” जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं।


