राजस्थान के झालावाड़ ज़िले में हाल ही में हुए दर्दनाक हादसे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज़ हो गई हैं। राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा शुक्रवार को झालावाड़ पहुंचे और श्री राजेंद्र सार्वजनिक चिकित्सालय में भर्ती घायल बच्चों से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों के परिजनों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना और उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। डोटासरा का दौरा राजनीतिक से कहीं अधिक मानवीय था, लेकिन उन्होंने मौके पर मीडिया से बातचीत करते हुए राज्य सरकार के रवैये पर कई गंभीर सवाल खड़े किए।
मुआवजा नाकाफी, संवेदनशीलता नदारद: गोविंद सिंह डोटासरा
गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार द्वारा घोषित मुआवजे को अपर्याप्त और औपचारिकता मात्र बताया। उन्होंने कहा कि, “जो दिया गया है, वह मुआवजा नहीं है। यह तो दिखावे की एक औपचारिक घोषणा है। जब सरकार की प्राथमिकता में पीड़ितों का हालचाल पूछना ही नहीं है, तो बाकी बातों की क्या अपेक्षा की जा सकती है?” उन्होंने कहा कि यह पूरे समाज के लिए एक चेतावनी और प्रश्नचिह्न है कि आज भी, इतने वर्षों बाद, हमारे बच्चे स्कूल में भी सुरक्षित नहीं हैं। यह किसी एक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि समूचे प्रदेश और राष्ट्र की सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री की चुप्पी पर उठाया सवाल
डोटासरा ने सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए पूछा, “मुख्यमंत्री को यहां आने से कौन सा भय है? क्या व्यस्तता इतनी अधिक है कि घायल बच्चों से मिलना भी संभव नहीं?” उन्होंने कहा कि अगर वह खुद हादसे के दिन ही आ जाते, तो उन पर राजनीति करने का आरोप लगाया जाता, इसलिए आज वह एक जिम्मेदार पार्टी अध्यक्ष के नाते आए हैं, न कि सियासी लाभ लेने।
कांग्रेस पीड़ितों के साथ खड़ी है
राजस्थान पीसीसी प्रमुख ने यह स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस संकट की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी तरह खड़ी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता हर ज़िले में जरूरतमंदों को सहायता पहुंचा रहे हैं। पार्टी के सभी विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्र के कलेक्टर को पत्र लिखकर विधायक कोष से जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए फंड जारी करने की सिफारिश की है। डोटासरा ने कहा कि अब समय आ गया है जब स्कूलों की इमारतों को लेकर व्यवस्थित ऑडिट हो और जहां भी खतरनाक स्थिति हो, वहां त्वरित मरम्मत कराई जाए।
विधानसभा में उठेगा मुद्दा
डोटासरा ने यह भी संकेत दिया कि आगामी विधानसभा सत्र में स्कूलों की संरचनात्मक सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा, “यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की असफलता का परिणाम है। हमें सोचने की ज़रूरत है कि हम भविष्य के नागरिकों को कैसा वातावरण दे रहे हैं।”
सरकार को दी सख्त नसीहत
अपने बयान में डोटासरा ने सरकार से आग्रह किया कि वह राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लें। उन्होंने कहा, “यह बच्चों की जिंदगी का सवाल है, यह भारत के भविष्य का सवाल है। जब तक हम शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं देंगे, तब तक ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति होती रहेगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि, “सरकार को तुरंत एक राज्य स्तरीय टास्क फोर्स बनानी चाहिए, जो स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा की निगरानी करे।”
सामाजिक चेतना का समय
डोटासरा का यह दौरा केवल एक राजनीतिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और जवाबदेही का संकेत था। उन्होंने प्रदेशवासियों से भी अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्र में स्कूलों की स्थिति पर ध्यान दें और स्थानीय प्रशासन से इसकी रिपोर्ट मांगें। उन्होंने कहा कि केवल सरकार नहीं, समाज को भी अब यह समझने की जरूरत है कि बच्चों की सुरक्षा एक सामूहिक उत्तरदायित्व है।


