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भीलवाड़ा में राज्यपाल बोले—विश्व में अशांति, भारत को एकजुटता की जरूरत

भीलवाड़ा में राज्यपाल बोले—विश्व में अशांति, भारत को एकजुटता की जरूरत

राजस्थान के भीलवाड़ा में आयोजित विश्व नवकार महामंत्र दिवस समारोह के दौरान राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने वैश्विक हालातों पर चिंता जताते हुए भारत में एकजुटता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान समय में विश्व शांति के संकट से गुजर रहा है और कई बड़े देश आपसी संघर्षों में उलझे हुए हैं। ऐसे दौर में भारत को अपनी आंतरिक मजबूती और सांस्कृतिक मूल्यों को और सुदृढ़ करने की जरूरत है।

कार्यक्रम का आयोजन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन द्वारा मेडिसिटी ग्राउंड में किया गया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन के लोग उपस्थित रहे। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका, इजराइल और ईरान जैसे देश वर्तमान में संघर्षों के कारण स्वयं को कमजोर कर रहे हैं। उनके अनुसार यह स्थिति भारत के लिए सीधे तौर पर नुकसानदेह नहीं है, लेकिन यह वैश्विक अस्थिरता का संकेत जरूर देती है। उन्होंने कहा कि भारत को इन परिस्थितियों से सीख लेते हुए अपनी एकता और विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

राज्यपाल ने अपने भाषण में नवकार मंत्र की महत्ता को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने इसे एक अलौकिक और सार्वभौमिक मंत्र बताते हुए कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की स्तुति नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, आस्था और साधना का प्रतीक है। उनके अनुसार, जो व्यक्ति इस मंत्र का जाप करता है, वह शांति, सुरक्षा और समृद्धि की दिशा में स्वतः अग्रसर होता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज के तनावपूर्ण वैश्विक माहौल में इस तरह के आध्यात्मिक साधनों की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।

अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल ने शब्दों के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शब्द हमारी अभिव्यक्ति का प्रमुख माध्यम हैं और इसलिए उनका चयन सोच-समझकर करना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो व्यक्ति कम बोलता है, उसकी बात अधिक प्रभावी होती है, जबकि अधिक बोलने वाले की बात का महत्व कम हो जाता है। यह संदेश उन्होंने समाज में संवाद की गुणवत्ता सुधारने के संदर्भ में दिया।

कार्यक्रम में राज्यपाल ने महाराष्ट्र के मांगीतुंगी में स्थित भगवान ऋषभदेव की 108 फीट ऊंची प्रतिमा का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे दुनिया की सबसे ऊंची जैन प्रतिमा बताते हुए कहा कि यह एक ही पत्थर से निर्मित है और इस तरह की अद्वितीय प्रतिमा विश्व में कहीं और नहीं है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों से न केवल आस्था को बल मिलता है, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।

समारोह में सहकारिता मंत्री गौतम दक ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे युद्ध और संघर्ष मानवता के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। ऐसे समय में भगवान महावीर का ‘जियो और जीने दो’ का संदेश अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अहिंसा ही विश्व शांति का एकमात्र मार्ग है और इसे हर व्यक्ति को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

गौतम दक ने समाज में बढ़ती दिखावे की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अपरिग्रह यानी जरूरत से ज्यादा संग्रह न करने का सिद्धांत आज के समाज में अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जरूरतमंदों के उत्थान के लिए कार्य करें और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सकारात्मक बदलाव पहुंचाने का संकल्प लें।

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण सामूहिक नवकार मंत्र जाप रहा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। एक स्वर में किए गए मंत्रोच्चार से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया और विश्व शांति व मानव कल्याण की कामना की गई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने आंतरिक शुद्धि और सामाजिक सद्भाव के लिए प्रार्थना की।

समारोह में माण्डलगढ़ विधायक गोपाल लाल खंडेलवाल, सहाड़ा विधायक लादुलाल पितलिया, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम से पहले हेलिपैड पर पहुंचने पर राज्यपाल का जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू और एसपी धर्मेन्द्र सिंह यादव ने औपचारिक स्वागत किया।

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