शोभना शर्मा। राजस्थान सरकार ने राज्य में सामाजिक और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए तीन प्रमुख विधेयकों को कानून का रूप दे दिया है। इन विधेयकों में धर्मांतरण रोकने, कोचिंग सेंटरों पर नियंत्रण और भू-जल प्रबंधन के लिए प्राधिकरण के गठन से संबंधित कानून शामिल हैं। राज्यपाल की मंज़ूरी और अधिसूचना जारी होने के साथ ही ये अब आधिकारिक रूप से कानून बन गए हैं।
विधानसभा के मानसून सत्र में पारित ये विधेयक अब प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लागू किए जाने की तैयारी में हैं। सरकार इन कानूनों की लागू होने की तारीख के लिए अलग से अधिसूचना जारी करेगी।
धर्मांतरण पर लगाम: ‘राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक’
राजस्थान में धर्मांतरण रोकने के उद्देश्य से लाया गया ‘राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक–2025’ अब कानून बन गया है। इस कानून का मकसद जबरन, धोखाधड़ी या लालच देकर कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर सख्ती से रोक लगाना है।
इस कानून में दोषी पाए जाने वालों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। सामान्य मामलों में 14 साल तक की सज़ा और 5 लाख रुपए तक का जुर्माना, जबकि सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में ₹50 लाख तक का जुर्माना और उम्रकैद तक की सजा दी जा सकती है।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे की मंज़ूरी के बाद यह कानून अब लागू करने की प्रक्रिया में है। इसके जरिए सरकार का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए जबरदस्ती और प्रलोभन आधारित धर्मांतरण को रोकना है।
कोचिंग सेंटरों पर नियंत्रण: अब अनिवार्य होगा पंजीकरण
राज्य में शिक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए राजस्थान सरकार ने कोचिंग सेंटरों को नियंत्रित करने वाला ‘राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक’ भी पारित किया था, जो अब कानून बन गया है।
इस कानून के तहत राज्य के सभी कोचिंग संस्थानों को अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। इसके बिना कोई भी संस्थान संचालित नहीं किया जा सकेगा। कानून का उद्देश्य विद्यार्थियों की सुरक्षा, शिक्षकों की योग्यता और शुल्क नियंत्रण जैसे मुद्दों पर मानक तय करना है।
सरकार के अनुसार, यह कानून कोटा जैसे कोचिंग हब में छात्रों पर मानसिक दबाव, आत्महत्या की घटनाओं और आर्थिक शोषण जैसे मामलों पर लगाम लगाने में मदद करेगा। साथ ही, कोचिंग सेंटरों के संचालन के लिए एक समान नियमावली लागू की जाएगी।
भू-जल प्रबंधन के लिए बनेगा नया प्राधिकरण
राजस्थान में जल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने ‘राजस्थान भू-जल (संरक्षण और प्रबंध) प्राधिकरण विधेयक’ को भी मंजूरी दी है। यह विधेयक राज्य विधानसभा में दो बार प्रवर समिति को भेजा गया था क्योंकि उस समय इस पर सहमति नहीं बन पाई थी।
अब इसके कानून बनने के साथ ही राज्य में भू-जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक स्वतंत्र प्राधिकरण गठित किया जाएगा। यह प्राधिकरण जल दोहन, रिचार्ज जोन की पहचान, और भू-जल स्तर को बनाए रखने के उपायों पर काम करेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कानून राज्य में तेजी से घटते भू-जल स्तर को स्थिर करने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अन्य विधेयक जो बने कानून
धर्मांतरण, कोचिंग सेंटर और भू-जल प्रबंधन के अलावा, मानसून सत्र में पारित अन्य विधेयक भी अब कानून बन गए हैं। इनमें शामिल हैं—
राजस्थान आयुर्विज्ञान संस्थान जयपुर विधेयक (RIMS): एम्स की तर्ज पर उच्च स्तरीय मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थापना।
राजस्थान मत्स्य-क्षेत्र (संशोधन) विधेयक: अवैध मछली पालन पर रोक लगाने और मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के प्रावधान।
कारखाना (राजस्थान संशोधन) विधेयक: कारखानों में काम के घंटे बढ़ाने और महिलाओं को रात्री पाली में काम करने की अनुमति देने के प्रावधान।
रीको को भूमि अधिकार देने वाला विधेयक: पुराने औद्योगिक क्षेत्रों की भूमियों से संबंधित अधिकार अब राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास निगम (RIICO) को दिए जाएंगे।
इसके साथ ही जीएसटी और सरकार के खर्चों से जुड़े दो विधेयक भी कानून बन चुके हैं।
लागू होने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन नए कानूनों के लागू होने की तारीखों को लेकर जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानूनों के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक नियम, प्रशासनिक ढांचा और निगरानी प्रणाली पहले से तैयार हो।


