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सरकार ने खैरथल-तिजारा का नाम और मुख्यालय बदलने से किया इनकार

सरकार ने खैरथल-तिजारा का नाम और मुख्यालय बदलने से किया इनकार

शोभना शर्मा। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर से नए जिले खैरथल-तिजारा को लेकर सियासत गरमा गई है। हाल ही में विधानसभा में उठे सवाल के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिले का नाम बदलने और मुख्यालय स्थानांतरित करने की कोई अधिसूचना या परिपत्र अभी तक जारी नहीं किया गया है। जबकि कुछ समय पहले तक सरकार और केंद्रीय नेताओं की ओर से इसके उलट बयानबाजी और सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई थीं, जिससे अब मामला और अधिक विवादों में घिर गया है।

सरकार का विधानसभा में जवाब

कांग्रेस विधायक ललित यादव ने विधानसभा में सवाल उठाया कि क्या खैरथल-तिजारा जिले का नाम बदलकर भर्तृहरि नगर करने और जिला मुख्यालय को दूसरी जगह ट्रांसफर करने की तैयारी है? इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में राजस्व विभाग की ओर से इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

सरकार का यह जवाब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, इससे पहले अगस्त में संकेत मिले थे कि सरकार ने नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और मुख्यमंत्री स्तर पर प्रस्ताव को हरी झंडी भी मिल चुकी है।

केंद्रीय मंत्री और नेताओं की बधाई

7 अगस्त को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट कर खैरथल-तिजारा जिले का नाम बदलकर भर्तृहरि नगर करने और मुख्यालय भिवाड़ी स्थानांतरित करने के निर्णय पर मुख्यमंत्री का आभार जताया था। इतना ही नहीं, बीजेपी के कई विधायक और स्थानीय नेता भी सोशल मीडिया पर बधाई संदेश लिख चुके थे।

इन पोस्ट्स के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर मान लिया गया था कि अब जिला मुख्यालय भिवाड़ी होगा और जिले का नया नाम भर्तृहरि नगर होगा। लेकिन विधानसभा में सरकार का जवाब कुछ और ही तस्वीर पेश कर रहा है।

स्थानीय विरोध और आंदोलन

जिले का नाम बदलने और मुख्यालय स्थानांतरित करने के मुद्दे पर स्थानीय स्तर पर भारी विरोध भी सामने आया। खैरथल और आसपास के इलाकों में कई बार बाजार बंद कराए गए। लोगों का कहना है कि मुख्यालय बदलने से उन्हें प्रशासनिक कामकाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

स्थानीय संगठनों और व्यापारिक मंडलों ने इसे जनहित के खिलाफ बताते हुए आंदोलन भी छेड़ा हुआ है। फिलहाल आंदोलन जारी है और विधानसभा में सरकार के जवाब से लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

गहलोत सरकार के समय बनी थी जिला इकाई

यह विवाद तब और गहराता है जब इसकी पृष्ठभूमि को देखा जाए। दरअसल, 4 अगस्त 2023 को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 19 नए जिलों की घोषणा की थी, जिनमें खैरथल-तिजारा भी शामिल था। उस समय ही भिवाड़ी को जिला बनाने की मांग भी जोर पकड़ रही थी।

लोगों का मानना है कि अब उसी मांग को ध्यान में रखते हुए सरकार खैरथल-तिजारा का नाम और मुख्यालय बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाना चाह रही थी। हालांकि, विधानसभा में दिए गए ताजा जवाब ने इस पर फिलहाल रोक लगा दी है।

नाम बदलने की कानूनी प्रक्रिया

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी जिले, शहर या गांव का नाम बदलने के लिए केवल राज्य सरकार की मंजूरी काफी नहीं होती। इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की स्वीकृति अनिवार्य है। मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद ही नाम परिवर्तन की अधिसूचना जारी की जाती है।

सूत्रों के अनुसार, अगस्त में मुख्यमंत्री स्तर पर नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी, लेकिन गृह मंत्रालय की ओर से अभी अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है। यही कारण है कि सरकार ने विधानसभा में जवाब देते हुए कहा कि कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

राजनीति में गर्माहट

सरकार के इस यू-टर्न ने विपक्ष और जनता दोनों को चौंका दिया है। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब केंद्रीय मंत्री और बीजेपी विधायक नाम बदलने की बधाई दे रहे थे, तब यह प्रक्रिया किस आधार पर चल रही थी। वहीं बीजेपी नेताओं का कहना है कि प्रस्ताव प्रक्रिया में है, इसलिए जल्द ही अधिसूचना भी जारी होगी।

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