राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर में सरकारी अस्पतालों में दवाओं की खरीद प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी सप्लाई में कमी का हवाला देकर स्थानीय स्तर पर दवाओं की खरीद की गई, लेकिन इस दौरान दवाओं की कीमतों में भारी हेरफेर किया गया। कई दवाएं बाजार में उपलब्ध अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से भी ज्यादा दर पर खरीदी गईं। मामले के सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने जांच शुरू कर दी है।
MRP से ज्यादा कीमत पर खरीदी गई एबीडी-प्लस सिरप
जानकारी के अनुसार बाड़मेर जिले के शिव ब्लॉक में वर्ष 2025 के दौरान जेनरिक दवाओं की कमी बताकर तत्कालीन ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. खेतसिंह के कार्यकाल में चामुंडा फार्मास्युटिकल फर्म से दवाएं खरीदी गईं। इन दवाओं की आपूर्ति ब्लॉक के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में की गई थी।
बताया जा रहा है कि 6 जून 2025 को मौखाब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सप्लाई की गई दवाओं में एबीडी-प्लस सिरप भी शामिल थी। इस सिरप की बाजार में MRP करीब 57 से 60 रुपये बताई जाती है, लेकिन इसे सरकारी अस्पताल के लिए 78 रुपये प्रति बोतल की दर से खरीदा गया।
चौंकाने वाली बात यह है कि यही सिरप मेडिकल स्टोर्स पर होलसेल रेट में लगभग 12.50 रुपये में उपलब्ध बताई जा रही है। इसके बावजूद सरकारी बिलों में इसे अधिक कीमत पर खरीदा गया। साथ ही बिलों में MRP के स्थान पर शून्य अंकित किया गया, जबकि नियमों के अनुसार दवा के बिल में MRP का उल्लेख अनिवार्य होता है।
धोरीमन्ना उप जिला अस्पताल में भी सामने आया मामला
दवा खरीद में अनियमितताओं का एक और मामला धोरीमन्ना उप जिला अस्पताल में सामने आया है। यहां पर मल्टीविटामिन सिरप को बाजार में लगभग 10.93 रुपये में उपलब्ध होने के बावजूद करीब 80 रुपये की दर से खरीदा गया। यह दवा भी चामुंडा फार्मास्युटिकल फर्म से खरीदी गई बताई जा रही है।
इसी तरह एंटासिड जैसी सामान्य दवा को भी वास्तविक कीमत से कई गुना अधिक दर पर खरीदने के आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि 10.93 रुपये की दवा को करीब 75 रुपये में खरीदा गया। इस मामले में पुराने बिलों को फर्जी बताकर नए बिल तैयार करने के आरोप भी सामने आए हैं, जिनकी विभागीय जांच चल रही है।
एक ही फर्म से लगातार सप्लाई पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि चामुंडा फार्मास्युटिकल फर्म लंबे समय से बाड़मेर और बालोतरा जिलों के कई सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को दवाएं सप्लाई कर रही है। आरोप है कि कई स्थानों पर दवाओं की दरों में मनमानी की गई, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ और मरीजों को सस्ती दवाओं का लाभ नहीं मिल पाया।
बताया जा रहा है कि शिव ब्लॉक की करीब छह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को इसी फर्म के माध्यम से दवाओं की सप्लाई दी गई थी। हालांकि तत्कालीन ब्लॉक सीएमएचओ ने यह स्वीकार किया है कि उनके कार्यकाल में स्थानीय स्तर पर दवा खरीद की गई थी, लेकिन उन्हें सटीक दरें याद नहीं होने की बात कही है। वर्तमान में उनकी तैनाती गूंगा क्षेत्र में बताई जा रही है।
CMHO ने दस्तावेज तलब कर शुरू की जांच
मामले के सामने आने के बाद बाड़मेर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विष्णुराम विश्नोई ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से दवा खरीद से जुड़े सभी दस्तावेज तलब किए हैं और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला सामने आने के बाद सरकारी अस्पतालों में दवा खरीद की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।


