राजस्थान की राजधानी जयपुर में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान ऊर्जा विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के इंटर डिस्कॉम तबादलों का मुद्दा प्रमुख रूप से सामने आया। वर्षों से लंबित पड़े इन स्थानांतरणों की मांग को लेकर सदन में गहन चर्चा हुई। कई कर्मचारी अपने गृह क्षेत्र से दूर तैनाती के कारण पारिवारिक और सामाजिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जिसके चलते एक स्पष्ट और मानवीय तबादला नीति की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
इस मुद्दे को सदन में प्रमुखता से उठाया विधायक भागचंद ने, जिन्होंने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से सरकार से सवाल किया कि आखिर कब तक कर्मचारी स्थानांतरण की उम्मीद में इंतजार करते रहेंगे। उन्होंने बताया कि कई कर्मचारी वर्षों से एक ही डिस्कॉम में फंसे हुए हैं जबकि उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियाँ दूसरे स्थान पर तैनाती की मांग करती हैं।
“कई कर्मचारी वर्षों से इंतजार कर रहे हैं” — भागचंद
विधायक भागचंद ने सदन में कहा कि ऊर्जा विभाग में तैनात कई कर्मचारी अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं और स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते स्थानांतरण चाहते हैं। लेकिन इंटर डिस्कॉम तबादले की व्यवस्था न होने के कारण वे लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कई कर्मचारी ऐसे हैं जो अपने गृह जिले से सैकड़ों किलोमीटर दूर तैनात हैं, जिससे उनके लिए परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करना अत्यंत कठिन हो गया है। भागचंद ने सरकार से स्पष्ट पूछा कि क्या वह इस संबंध में कोई स्थायी नीति बनाने पर विचार कर रही है, जिससे कर्मचारियों को राहत मिल सके और विभागीय कार्यकुशलता पर इसका सकारात्मक असर पड़े।
“वर्तमान नियमों में इंटर डिस्कॉम तबादलों का प्रावधान नहीं” — ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर
सदन में जवाब देते हुए ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ऐसे तबादलों का कोई प्रावधान ऊर्जा विभाग के नियमों में मौजूद नहीं है। उन्होंने बताया कि जब मूल रूप से बिजली विभाग एक ही कंपनी के रूप में काम करता था, तब स्थिति अलग थी। वर्ष 2010 में राजस्थान पावर सेक्टर सुधार योजना लागू होने के बाद विभाग का पुनर्गठन हुआ और अलग-अलग डिस्कॉम कंपनियाँ अस्तित्व में आईं। इस दौरान कर्मचारियों को विकल्प दिया गया था कि वे अपनी पसंद के अनुसार पोस्टिंग चुन सकते हैं।
लेकिन उसके बाद की नई भर्तियों में मेरिट के आधार पर डिस्कॉम आवंटित किए जाने लगे। जो अभ्यर्थी मेरिट में पीछे रहे, उन्हें विभाग की आवश्यकता के अनुसार दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात किया गया। इससे कई कर्मचारियों को अपने गृह नगर से दूर वर्षों तक कार्य करना पड़ा।
पुनर्गठन के बाद बढ़ी समस्याएँ
एकीकृत बिजली निगम के विखंडन के बाद नई कंपनियाँ — जयपुर डिस्कॉम, अजमेर डिस्कॉम और जोधपुर डिस्कॉम — बनने से कर्मचारियों की पोस्टिंग का दायरा सीमित हो गया। पहले जहां आंतरिक स्थानांतरण संभव था, वहीं अलग-अलग कंपनियों में बंट जाने के बाद अब एक डिस्कॉम से दूसरे डिस्कॉम में स्थानांतरण नियमों के अनुरूप नहीं रहा। इससे कर्मचारियों के सामने नई चुनौतियाँ उत्पन्न हुईं, जिनमें परिवार से दूरी और स्थानांतरण न हो पाने की समस्या प्रमुख रही।
कर्मचारी संघों की लगातार गुहार
ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों ने वर्षों से लगातार सरकार से मांग की है कि मानवीय आधार पर इंटर डिस्कॉम तबादला नीति बनाई जाए।
कई कर्मचारी अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्षों में ऐसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं जहां पारिवारिक जिम्मेदारियों और विभागीय कार्य के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होता जा रहा है। कर्मचारी संघों का कहना है कि यदि सरकार मानवीय दृष्टिकोण अपनाती है, तो कार्यकुशलता भी बढ़ेगी और कर्मचारी मानसिक रूप से अधिक स्थिर रहकर काम कर सकेंगे।
“उच्च स्तरीय कमेटी करेगी पूरी समीक्षा” — सरकार का महत्वपूर्ण फैसला
राज्य सरकार ने कर्मचारियों की समस्याओं को देखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर ने सदन में बताया कि इंटर डिस्कॉम तबादलों पर विधिक राय लेने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया जा रहा है। यह कमेटी सभी पहलुओं का अध्ययन करेगी, जिसमें मौजूदा नियम, कानूनी प्रावधान, विभागीय आवश्यकताएँ, कर्मचारियों की स्थिति और विभागीय संचालन पर प्रभाव शामिल होंगे। कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार इंटर डिस्कॉम तबादला नीति को लेकर आगे की दिशा तय करेगी। इससे कर्मचारियों को उम्मीद जगी है कि लंबे समय से लंबित उनकी समस्या का समाधान निकट भविष्य में संभव हो सकता है।


