मनीषा शर्मा। सोने-चांदी की खरीददारी की योजना बना रहे लोगों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। कीमती धातुओं के दाम, जो पिछले कुछ महीनों से लगातार आसमान छू रहे थे, अब लगातार चौथे कारोबारी दिन फिसल गए हैं। मंगलवार को जारी आधिकारिक रेट्स के अनुसार सोने की कीमत ₹99,200 प्रति 10 ग्राम के अहम स्तर से नीचे आ गई है, जबकि चांदी का भाव ₹1.14 लाख प्रति किलो से भी कम हो गया है। यह गिरावट उन खरीदारों के लिए ‘गोल्डन चांस’ मानी जा रही है, जो लंबे समय से बढ़ती कीमतों के कारण निवेश या गहनों की खरीद को टालते आ रहे थे।
सोने-चांदी का आज का नया भाव
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने मंगलवार शाम को जो आधिकारिक भाव जारी किए, उन्होंने बाजार में हलचल मचा दी।
24 कैरेट सोना: ₹455 की बड़ी गिरावट के साथ ₹99,168 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
22 कैरेट सोना: गहनों के लिए सबसे ज्यादा खरीदे जाने वाले इस सोने की कीमत घटकर ₹90,838 प्रति 10 ग्राम हो गई।
18 कैरेट सोना: यह भी टूटकर ₹74,376 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
चांदी: ₹425 की गिरावट के साथ ₹1,13,625 प्रति किलो पर आ गई।
यानी चार दिनों से लगातार गिर रहे दाम अब उस स्तर पर आ गए हैं, जहां ग्राहक और निवेशक खरीदारी पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं।
क्यों गिर रही हैं सोने-चांदी की कीमतें?
सोने की कीमतें केवल स्थानीय मांग और आपूर्ति पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि वैश्विक घटनाक्रमों से भी प्रभावित होती हैं। इस समय दुनिया की नजरें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर टिकी हैं।
‘जैक्सन होल’ मीटिंग पर सबकी नजरें
अमेरिका के वायोमिंग राज्य में हर साल ‘जैक्सन होल’ नामक जगह पर दुनिया के सबसे शक्तिशाली केंद्रीय बैंकों के प्रमुखों की बैठक होती है। इस बार शुक्रवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल भाषण देने वाले हैं। पूरी दुनिया के निवेशक उनकी बातों से यह अंदाजा लगाने की कोशिश करेंगे कि आगे ब्याज दरों का रुख कैसा रहने वाला है।
अगर पॉवेल ने संकेत दिया कि अमेरिका में महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं, तो डॉलर और मजबूत होगा। मजबूत डॉलर का सीधा असर सोने पर पड़ता है और उसकी कीमतें गिर जाती हैं। वहीं, अगर उन्होंने नरम रुख दिखाया और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम जताई, तो डॉलर कमजोर हो सकता है और सोने-चांदी की कीमतों को फिर से सहारा मिल सकता है।
इस साल का प्रदर्शन: सोना और चांदी बने निवेशकों के ‘सुपरस्टार’
गौर करने वाली बात यह है कि मौजूदा गिरावट के बावजूद सोना और चांदी इस साल अब तक शानदार रिटर्न दे चुके हैं।
सोना: 1 जनवरी, 2025 को 24 कैरेट सोने की कीमत ₹76,162 प्रति 10 ग्राम थी। अब यह बढ़कर ₹99,168 पर पहुंच चुकी है। यानी 30.20% का रिटर्न।
चांदी: साल की शुरुआत में चांदी ₹86,017 प्रति किलो थी। अब यह ₹1,13,625 पर है। यानी 32.09% का बंपर रिटर्न।
यानी, निवेशकों के लिए 2025 अब तक कीमती धातुओं का साल साबित हुआ है।
अब क्या करें खरीदार और निवेशक?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि मौजूदा गिरावट को देखते हुए क्या अभी खरीदारी करनी चाहिए या इंतजार करना चाहिए। एलकेपी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक जतिन त्रिवेदी का मानना है कि सोने की कीमतें अभी सीमित दायरे में रहने की संभावना है। उन्होंने अनुमान जताया है कि सोना निकट भविष्य में ₹99,000 से ₹1,00,000 प्रति 10 ग्राम के बीच कारोबार कर सकता है।
त्योहारों और शादियों के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए यह सही समय हो सकता है। चार दिनों की लगातार गिरावट के बाद कीमतें कुछ आकर्षक स्तर पर आ गई हैं। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि खरीदार थोड़ी खरीदारी अभी कर सकते हैं और बाकी खरीदारी शुक्रवार को जेरोम पॉवेल के भाषण के बाद की स्थिति स्पष्ट होने पर करें। जहां तक निवेशकों का सवाल है, उनके लिए ‘वेट एंड वॉच’ यानी इंतजार करने की रणनीति बेहतर हो सकती है।
वायदा बाजार (MCX) में भी दिखी नरमी
भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी सोने और चांदी की कीमतों में नरमी देखी गई।
अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना 0.22% टूटकर ₹99,182 पर पहुंच गया।
सितंबर कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी 0.12% की गिरावट के साथ ₹1,13,456 पर आ गई।
यह संकेत देता है कि फिलहाल ट्रेडर्स भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बड़ी गतिविधियों का इंतजार कर रहे हैं।
सोने और चांदी की लगातार चार दिन से जारी गिरावट ने खरीदारों को राहत दी है। हालांकि, यह गिरावट स्थायी है या अस्थायी, यह शुक्रवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व चेयरमैन के भाषण के बाद साफ होगा। निवेशकों और खरीदारों के लिए यह याद रखना जरूरी है कि कीमती धातुओं की कीमतें केवल घरेलू मांग या त्योहारों से नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाओं से भी गहराई से जुड़ी होती हैं। त्योहार और शादियों के सीजन में गहनों की खरीद के लिहाज से यह समय सही हो सकता है। वहीं, निवेशक अगर लंबी अवधि के नजरिए से सोच रहे हैं तो उन्हें थोड़ा इंतजार कर बाजार की अगली दिशा देखने के बाद ही बड़ा निर्णय लेना चाहिए।


