शोभना शर्मा। साल 2025 वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव के लिए जाना जाएगा, लेकिन निवेश की दृष्टि से यह साल कीमती धातुओं के नाम रहा। शेयर बाजार की अस्थिरता और वैश्विक जोखिमों के बीच जिन निवेशकों ने सोना या चांदी में भरोसा दिखाया, उन्हें जबरदस्त मुनाफा मिला। खास बात यह रही कि इस बार परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने को भी चांदी ने रिटर्न के मामले में पीछे छोड़ दिया।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में चांदी ने निवेशकों को 137 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया, जबकि सोने ने भी करीब 68 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज की। यह प्रदर्शन न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी देखने को मिला। यही वजह है कि साल के अंत तक सोना और चांदी दोनों ही निवेशकों की पहली पसंद बने रहे।
बाजार की अनिश्चितता ने बढ़ाया सुरक्षित निवेश का आकर्षण
2025 में वैश्विक शेयर बाजारों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिका और यूरोप में मंदी की आशंका, मध्य पूर्व और एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता और डॉलर की चाल ने निवेशकों को जोखिम से दूर रहने के लिए मजबूर किया। ऐसे माहौल में निवेशकों ने सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख किया और सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं में निवेश बढ़ता चला गया। इतिहास गवाह है कि जब भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोना और चांदी सुरक्षित निवेश के रूप में उभरते हैं। 2025 में भी यही ट्रेंड देखने को मिला, लेकिन इस बार चांदी ने अतिरिक्त वजहों से असाधारण तेजी दिखाई।
सोना बना केंद्रीय बैंकों की सबसे बड़ी पसंद
सोने की कीमतों में मजबूती के पीछे दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंकों की भूमिका बेहद अहम रही। पिछले तीन वर्षों, यानी 2022 से 2024 तक, केंद्रीय बैंकों ने हर साल 1,000 टन से ज्यादा सोने की खरीदारी की। इस ट्रेंड का असर 2025 में भी साफ दिखाई दिया।
अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं और डॉलर के कमजोर होने की आशंका ने सोने को और मजबूती दी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया। दिग्गज निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना 4,900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है।
भारतीय बाजार में भी इसका सीधा असर देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोना 1,38,676 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। अब सोना केवल आभूषण या परंपरागत बचत का साधन नहीं रह गया है, बल्कि संकट के समय में सबसे भरोसेमंद वित्तीय सुरक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
चांदी बनी भविष्य की तकनीक की रीढ़
अगर सोना सुरक्षित निवेश का प्रतीक है, तो चांदी 2025 में भविष्य की तकनीक का सबसे बड़ा आधार बनकर उभरी। चांदी की तेजी की कहानी सोने से कहीं ज्यादा रोमांचक रही। चांदी सिर्फ एक कीमती धातु नहीं है, बल्कि इसका उपयोग तेजी से बढ़ते आधुनिक उद्योगों में होता है।
सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी की मांग तेजी से बढ़ी है। दुनिया भर में ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर जोर दिए जाने से चांदी की औद्योगिक मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इसके मुकाबले चांदी की आपूर्ति सीमित है, जिससे मांग और आपूर्ति का अंतर और गहरा होता चला गया। इसी वजह से चांदी ने 2025 में निवेशकों को सोने से लगभग दोगुना रिटर्न दिया। MCX पर चांदी का भाव 2,24,430 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक स्तर है।
क्या अभी खत्म हुई चांदी की रैली
विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की मौजूदा तेजी अभी खत्म नहीं हुई है। कई एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि 2026 के पहले छह महीनों में ही चांदी 20 से 25 प्रतिशत तक का और रिटर्न दे सकती है। ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स, सोलर इंस्टॉलेशन और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग चांदी को लगातार समर्थन देती रहेगी।
चांदी अब केवल ‘गरीबों का सोना’ नहीं रह गई है, बल्कि यह स्मार्ट निवेशकों की रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। 2025 की 137 प्रतिशत की बढ़त ने यह साबित कर दिया कि सही समय और सही सेक्टर में निवेश कितना बड़ा फायदा दे सकता है।
2026 के लिए क्या कहती है निवेश सलाह
2026 को लेकर विशेषज्ञों की राय सकारात्मक बनी हुई है। सोने को जहां केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी का समर्थन मिलेगा, वहीं चांदी को औद्योगिक मांग मजबूती देती रहेगी। हालांकि, एक्सपर्ट्स निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह भी दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि एकमुश्त निवेश करने के बजाय ‘बाय ऑन डिप’ की रणनीति अपनानी चाहिए। यानी जब कीमतों में हल्की गिरावट आए, तब चरणबद्ध तरीके से निवेश किया जाए। इससे जोखिम भी कम होता है और औसत खरीद मूल्य बेहतर रहता है।
अगर अमेरिकी फेडरल रिजर्व 2026 में ब्याज दरों में और कटौती करता है, तो डॉलर कमजोर हो सकता है। इसका सीधा फायदा सोना और चांदी दोनों को मिलेगा, क्योंकि कमजोर डॉलर में कीमती धातुएं निवेशकों के लिए और आकर्षक बन जाती हैं।
अनिश्चित दौर में भरोसेमंद निवेश
साल 2025 ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब दुनिया अनिश्चितताओं से घिरी हो, तब पुराने और भरोसेमंद निवेश सबसे ज्यादा काम आते हैं। सोने की स्थिरता और चांदी की तेज रफ्तार ने निवेशकों को न सिर्फ मुनाफा दिया, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का भरोसा भी दिलाया।
2026 को लेकर सकारात्मक संकेतों के बीच, यह साफ है कि कीमती धातुएं आने वाले समय में भी निवेश पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बनी रहेंगी। जरूरत सिर्फ इतनी है कि निवेशक धैर्य रखें, बाजार की चाल समझें और सही समय पर सही फैसला लें।


