मनीषा शर्मा। राजस्थान की सियासत में शनिवार को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बयान ने नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। उन्होंने जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस पर वंदे मातरम् गीत का अपमान करने का गंभीर आरोप लगाया।
तिवाड़ी ने कहा कि वंदे मातरम् भारतीय राष्ट्र भावना की आत्मा है, लेकिन कांग्रेस ने इसे अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार विकृत कर राष्ट्र की चेतना को चोट पहुंचाई है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस वंदे मातरम् को पूर्ण रूप से गाए जाने का समर्थन करे तो भाजपा इसे उसकी विरासत के रूप में स्वीकार करने को तैयार है, मगर जब तक वह गीत के साथ राजनीतिक छेड़छाड़ करती रहेगी, तब तक उसका राष्ट्रवाद सिर्फ “दिखावा” रहेगा।
“कांग्रेस ने किया वंदे मातरम् के साथ राजनीतिक खिलवाड़”
घनश्याम तिवाड़ी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के कारण वंदे मातरम् के धार्मिक अंशों में कटौती की। उन्होंने कहा कि गीत में मौजूद मां दुर्गा, कमला और सरस्वती के उल्लेख को हटाने का प्रयास कांग्रेस द्वारा राष्ट्र की एकता पर प्रहार था।
उन्होंने कहा कि “आजादी की लड़ाई में अनेक मुस्लिम क्रांतिकारी भी वंदे मातरम् का गायन करते थे, लेकिन कांग्रेस ने इसे धर्म से जोड़कर इसका स्वरूप बदलने की कोशिश की। इस गीत में किसी धर्म का विरोध नहीं बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना निहित है।”
तिवाड़ी ने दी वंदे मातरम् की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
घनश्याम तिवाड़ी ने वंदे मातरम् के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह गीत पहली बार 7 नवंबर 1875 को बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा बंग दर्शन पत्रिका में प्रकाशित किया गया था। इसके बाद 1896 में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने इसे कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया।
तिवाड़ी ने बताया कि 1905 में बंग-भंग आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् भारत की राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन गया था। इस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम में लाखों लोगों को प्रेरणा दी, लेकिन बाद के वर्षों में कांग्रेस ने इसके मूल स्वरूप से समझौता किया।
1937 में हुआ पहला विरोध, कांग्रेस ने दिखाई झुकाव की राजनीति
भाजपा नेता ने कहा कि 1937 में मौलाना मोहम्मद अली और शौकत अली ने कांग्रेस अधिवेशन में वंदे मातरम् का विरोध किया था। उन्होंने अधिवेशन में इस गीत को गाने से रोक दिया। यह घटना भारत की राजनीति के इतिहास में अहम मोड़ साबित हुई, क्योंकि इसके बाद कांग्रेस ने तुष्टिकरण की राह पकड़ ली।
तिवाड़ी के अनुसार, “कांग्रेस ने इसके बाद वंदे मातरम् के अंशों में हस्तक्षेप कर राष्ट्रीय भावना को आहत किया। यह गीत राष्ट्र की आत्मा है, लेकिन कांग्रेस ने अपने वोट बैंक के लिए इसकी आत्मा को कुचल दिया।”
कांग्रेस की विरासत विभाजन और वोट बैंक की राजनीति
तिवाड़ी ने कहा कि कांग्रेस अब वंदे मातरम् को अपनी विरासत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है, जबकि उसकी असली विरासत भारत का विभाजन और वोट बैंक की राजनीति है। उन्होंने कहा कि 1914 में कांग्रेस ने मुस्लिम लीग से समझौता कर विभाजन की नींव रखी और बाद में 1976 में 42वें संविधान संशोधन के जरिए संविधान की प्रस्तावना में वैचारिक बदलाव थोपने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने वंदे मातरम् ही नहीं, बल्कि बंकिमचंद्र चटर्जी, रवीन्द्रनाथ ठाकुर और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसी विभूतियों की भावनाओं का भी अपमान किया। यह अपमान केवल गीत या विचारधारा का नहीं बल्कि राष्ट्र की चेतना का है, जिसे जनता कभी नहीं भूलेगी।”
“राष्ट्रवाद कांग्रेस के लिए केवल दिखावा” — तिवाड़ी
राज्यसभा सांसद तिवाड़ी ने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि उसका राष्ट्रवाद केवल मंचों और घोषणाओं तक सीमित है। उन्होंने कहा कि “कांग्रेस ने हमेशा राष्ट्रीय प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग किया, लेकिन कभी सच्चे अर्थों में उनका सम्मान नहीं किया।”
उन्होंने कहा कि भाजपा राष्ट्रवाद को अपनी विचारधारा का मूल मानती है और वंदे मातरम्, जन गण मन तथा राष्ट्रीय ध्वज के प्रति निष्ठा को सर्वोच्च स्थान देती है।


