मनीषा शर्मा। भरतपुर में राष्ट्रीय केवलादेव उद्यान (घना) से जवाहर नगर जाने वाली मुख्य सड़क पर बुधवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। मिट्टी से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अचानक सड़क के बीचोंबीच धंस गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। गनीमत यह रही कि घटना के समय आसपास कोई बड़ा वाहन या पैदल यात्री ट्रैक्टर के बेहद नजदीक नहीं था, वरना जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था। यह घटना घना गेट के ठीक सामने हुई, जहां हाल के महीनों में यातायात का दबाव लगातार बढ़ा है। अचानक सड़क धंसने से ट्रैक्टर का अगला हिस्सा नीचे धंस गया और ट्रॉली तिरछी हो गई। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई।
ट्रैफिक पुलिस की तत्परता से नहीं बिगड़ी व्यवस्था
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने तुरंत स्थिति संभाली। सड़क के दोनों ओर वाहनों को रोका गया और वैकल्पिक मार्गों से यातायात को डायवर्ट किया गया। पुलिस की सतर्कता के चलते लंबा जाम नहीं लगा और पर्यटकों व स्थानीय लोगों को बड़ी परेशानी से बचा लिया गया। काफी मशक्कत के बाद क्रेन की मदद से ट्रैक्टर-ट्रॉली को सड़क से बाहर निकाला गया, जिसके बाद यातायात को धीरे-धीरे सामान्य किया गया।
PWD की करोड़ों की सड़क पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह सड़क महज दो महीने पहले ही लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई थी। इतने कम समय में सड़क का इस तरह धंस जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान बेस और सब-बेस की मजबूती पर ध्यान नहीं दिया गया। घटिया सामग्री और जल्दबाजी में किए गए काम का नतीजा अब सामने आ रहा है। लोगों का यह भी आरोप है कि इससे पहले भी इसी सड़क पर छोटे-छोटे गड्ढे और धंसाव की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन विभाग ने समय रहते सुधार नहीं किया।
जलदाय विभाग की लापरवाही भी आई सामने
सड़क धंसने के बाद एक और गंभीर समस्या उजागर हुई। मौके पर सड़क के नीचे से गुजर रही पाइपलाइन में लीकेज पाया गया, जिससे हजारों लीटर पानी लगातार बहता रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लंबे समय से इस इलाके में पानी रिसाव की शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन जलदाय विभाग ने इस पर ध्यान नहीं दिया। पानी के लगातार रिसाव से सड़क की मिट्टी कमजोर होती चली गई और भारी ट्रैक्टर-ट्रॉली का वजन पड़ते ही सड़क धंस गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाइपलाइन लीकेज को समय रहते ठीक कर दिया जाता, तो यह हादसा टल सकता था।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
घटना के बाद स्थानीय लोगों में PWD और जलदाय विभाग दोनों के खिलाफ आक्रोश देखने को मिला। लोगों का कहना है कि सरकारी विभागों की आपसी समन्वय की कमी और लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। स्थानीय व्यापारियों और रहवासियों ने मांग की है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और दोषी ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही जलदाय विभाग से पाइपलाइन लीकेज को तुरंत ठीक कराने और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई है।
पर्यटन मार्ग होने से बढ़ी चिंता
घना रोड केवल स्थानीय आवागमन का ही नहीं, बल्कि केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों का भी प्रमुख मार्ग है। इस सड़क पर इस तरह की घटनाएं न केवल सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हैं, बल्कि शहर की छवि पर भी नकारात्मक असर डालती हैं। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि सड़कें सुरक्षित और मजबूत नहीं होंगी, तो इसका सीधा असर पर्यटन पर पड़ेगा।
जांच और सुधार की जरूरत
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता जांच की जरूरत को रेखांकित कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क निर्माण के दौरान तकनीकी मानकों का सख्ती से पालन और पाइपलाइन जैसी बुनियादी सेवाओं के साथ बेहतर समन्वय जरूरी है।


