मनीषा शर्मा। कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच चल रहे कथित सत्ता संघर्ष की अटकलों के बीच शनिवार को दोनों नेता ब्रेकफास्ट मीटिंग में साथ दिखे। इस मुलाकात के बाद प्रदेश में जारी खींचतान की चर्चाओं पर विराम लगता दिखाई दिया। इसी राजनीतिक माहौल पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीखे लेकिन हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा कि मीडिया में तलाक की खबरें तो बन जाती हैं, लेकिन दोस्ती की नहीं।
नाश्ते की टेबल पर मुलाकात को गहलोत ने बताया शुभ संकेत
अशोक गहलोत ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री नाश्ते की टेबल पर साथ बैठे हैं, तो यह अपने आप में अच्छा संकेत है। यह दर्शाता है कि सरकार में कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि मीडिया अक्सर अनावश्यक अटकलों को हवा देता है और खींचतान के मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करता है।
गहलोत ने कहा कि “यहां कोई झगड़ा नहीं है। दोनों नेता बैठे, चर्चा की और यही बताता है कि कांग्रेस एकजुट है। नाश्ते की टेबल पर मिलना ही यह साबित कर देता है कि मतभेद की बातें ज्यादा तूल देकर फैलाई जाती हैं।”
“तलाक खबर बनता है, प्यार-मोहब्बत नहीं”—मीडिया पर तंज
मीडिया पर निशाना साधते हुए गहलोत ने कहा कि प्यार और मोहब्बत की खबरें मीडिया के लिए दिलचस्प नहीं होतीं। उन्होंने कहा, “अगर तलाक हो रहा है, तो वह न्यूज़ बनती है। यहां तो सब ठीक चल रहा है। यहां न कोई तलाक है और न झगड़ा, बल्कि प्यार-मोहब्बत है।”
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दिशा-निर्देशों में पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बातें महज हवा में उड़ाई जाती हैं और वास्तविक स्थिति से उनका कोई लेना-देना नहीं होता।
ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर भी दी सफाई
कर्नाटक में यह चर्चा लंबे समय से चल रही है कि सरकार बनने के समय ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री बनाने को लेकर कोई सहमति बनी थी। गहलोत ने इस पर भी स्पष्ट किया कि यह सिर्फ अफवाह है। उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई भी फैसला हुआ या नहीं, यह राहुल गांधी, खड़गे या फिर डिप्टी सीएम ही बता सकते हैं।
गहलोत ने उदाहरण देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में भी ढाई-ढाई साल के फार्मूले की चर्चा की गई थी, लेकिन वहां ऐसा कोई समझौता कभी हुआ ही नहीं। उन्होंने कहा कि मीडिया कई बार ऐसे मुद्दों को वास्तविकता बताए बिना ही हवा में उछाल देता है, जबकि तथ्य कुछ और होते हैं।
कर्नाटक कांग्रेस में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश
गहलोत के इस बयान को कर्नाटक कांग्रेस में एकता का संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है। सिद्धारमैया और शिवकुमार की ब्रेकफास्ट मीटिंग पहले ही सकारात्मक संकेत दे चुकी है और गहलोत की टिप्पणी ने इसे और मजबूती देने का काम किया है।


