मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि आज राजस्थान में चारों ओर अराजकता का माहौल है। हत्या, रेप, डकैती और चोरी जैसे अपराध आम होते जा रहे हैं और अब तो भाजपा विधायक भी गुंडागर्दी में शामिल हो गए हैं।
भाजपा विधायक पर युवक से मारपीट का आरोप
गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए भाजपा विधायक अर्जुनलाल जीनगर पर कपासन क्षेत्र में एक युवक से मारपीट का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन में जब एक युवक सूरज माली ने विधायक को उनके चुनावी वादे की याद दिलाई, तो उस पर जानलेवा हमला कर दिया गया। गहलोत ने दावा किया कि युवक को गंभीर चोटें आई हैं और उसके शरीर में 25 से अधिक फ्रैक्चर हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि डॉक्टर अभी तक उसका ऑपरेशन भी नहीं कर पा रहे हैं।
गहलोत ने इस घटना को लोकतंत्र की हत्या करार दिया और कहा कि अगर आमजन भाजपा विधायकों से सवाल पूछेंगे तो क्या उन्हें जान से मारने की कोशिश की जाएगी? उन्होंने पुलिस पर भी सवाल उठाए और पूछा कि क्या पुलिस में इतनी हिम्मत है कि वह ऐसे विधायक पर कार्रवाई कर सके। गहलोत ने घोषणा की कि वे कपासन जाकर पीड़ित के परिजनों से मुलाकात करेंगे और न्याय की मांग करेंगे।
वोट चोरी और चुनाव आयोग पर सवाल
गहलोत ने भाजपा पर वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने सबूतों के साथ वोट काटने और चोरी करने की बात रखी, लेकिन चुनाव आयोग इस पर चुप है। आयोग को चाहिए था कि वह तुरंत इस मुद्दे पर कार्रवाई करता, लेकिन इसके बजाय भाजपा नेता आयोग के समर्थन में उतर आए। इससे यह साफ होता है कि आयोग भाजपा के दबाव में काम कर रहा है।
गहलोत ने कहा कि वोट चोरी के मामले पर सरकार को भी स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए, क्योंकि इस चुप्पी से सरकार की बदनामी हो रही है। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर संदेह जताते हुए कहा कि आयोग आंखें बंद करके बैठा है और इस रवैये से जनता में गलत संदेश जा रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर टिप्पणी
पूर्व सीएम ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब कोई विपक्ष का नेता सबूतों सहित मुद्दा उठाता है, तो आयोग को सम्मानपूर्वक उसका जवाब देना चाहिए। लेकिन वर्तमान में चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया निष्पक्ष नहीं लगती। गहलोत ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त मीडिया से बात करते समय एक्टिंग करते नजर आते हैं, जो उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर चुनाव आयोग बेवजह की बहस में उलझने के बजाय सम्मानजनक तरीके से जवाब देता, तो मामला बढ़ता नहीं। लेकिन अब घर-घर में यह बात पहुंच गई है कि वोट चोरी हो रही है और चुनाव आयोग भाजपा सरकार के दबाव में काम कर रहा है।
ईवीएम और सुप्रीम कोर्ट का जिक्र
गहलोत ने ईवीएम पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही वीवीपैट मशीनें लगाई गईं। इसका अर्थ है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि ईवीएम में छेड़छाड़ की संभावना हो सकती है। उन्होंने कहा कि जब इतने बड़े मुद्दे पर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं, तो चुनाव आयोग को गंभीरता से जांच करनी चाहिए, न कि पक्षपातपूर्ण बयान देना चाहिए।


