राजस्थान में आईएएस चयन प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर चयन प्रक्रिया में पक्षपात और अनावश्यक देरी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भजनलाल सरकार को सीधे तौर पर घेरा और प्रशासनिक नियुक्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
गहलोत ने कहा कि जब संघ लोक सेवा आयोग और केंद्र सरकार ने नामों पर मुहर लगा दी है, तो फिर राज्य स्तर पर इन पदोन्नतियों को रोके रखने का औचित्य क्या है। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले एक महीने से मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर पर इन नियुक्तियों को लंबित क्यों रखा गया है।
चयन प्रक्रिया में देरी पर उठे सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि आईएएस चयन प्रक्रिया में जिस प्रकार की देरी और पक्षपात की खबरें सामने आ रही हैं, वह अत्यंत चिंताजनक हैं। उनका कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था की मजबूती के लिए समय पर पदोन्नति और नियुक्तियां बेहद आवश्यक होती हैं। यदि इन्हें राजनीतिक कारणों से रोका जाता है, तो इससे शासन व्यवस्था प्रभावित होती है।
गहलोत ने यह भी कहा कि प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति केवल योग्यता और वरिष्ठता के आधार पर होनी चाहिए। यदि इसमें किसी प्रकार की व्यक्तिगत या राजनीतिक प्राथमिकता शामिल होती है, तो यह संस्थागत गरिमा के विपरीत है।
‘पसंदीदा चेहरों’ को प्राथमिकता का आरोप
अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक नियुक्तियों में योग्यता और पारदर्शिता के बजाय ‘पसंदीदा’ चेहरों या राजनीतिक निकटता को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में शामिल कुछ अधिकारियों के रिश्तों और निकटता को लेकर सार्वजनिक चर्चाएं हो रही हैं, जो सरकार की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की स्थिति से न केवल प्रशासनिक ढांचे की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि अधिकारियों के मनोबल पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। गहलोत ने कहा कि यदि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं होगी, तो शासन व्यवस्था की कार्यक्षमता पर भी प्रश्नचिह्न लगेंगे।
भजनलाल सरकार से त्वरित निर्णय की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से मांग की कि इस गतिरोध को तुरंत समाप्त किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन नामों को संबंधित बोर्ड और केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है, उनकी नियुक्तियां अविलंब जारी की जानी चाहिए।
गहलोत का कहना है कि प्रशासनिक ढांचा राजनीति से मुक्त होकर ही प्रभावी ढंग से कार्य कर सकता है। यदि नियुक्तियों में अनावश्यक देरी या पक्षपात की धारणा बनेगी, तो इससे शासन की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
सियासी असर और आगे की दिशा
आईएएस चयन विवाद ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष इसे पारदर्शिता और निष्पक्षता का मुद्दा बना रहा है, जबकि सरकार की ओर से अब तक इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर यदि नियुक्तियों को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया।


