राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर के पास चौंप गांव में बन रहे विश्व के तीसरे सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम के मुद्दे को उठाते हुए वर्तमान भजनलाल शर्मा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गहलोत ने अपनी चर्चित ‘इंतज़ारशास्त्र’ सीरीज के छठे अध्याय में इस परियोजना की धीमी प्रगति और कथित उपेक्षा को लेकर सरकार को घेरा है। उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि राजनीतिक द्वेष के कारण यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अब ठंडे बस्ते में चला गया है।
वैश्विक पहचान का सपना अधूरा
गहलोत ने अपने बयान में कहा कि उनकी सरकार ने राजस्थान को अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर स्थापित करने के उद्देश्य से इस स्टेडियम की आधारशिला रखी थी। जयपुर के निकट चौंप गांव में प्रस्तावित यह स्टेडियम दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बनने वाला था। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना को वर्ष 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब 36 महीने बीत जाने के बावजूद काम अधूरा पड़ा है। गहलोत के अनुसार, यह केवल एक निर्माण परियोजना नहीं थी, बल्कि राज्य के युवाओं और खिलाड़ियों के सपनों से जुड़ा एक बड़ा विजन था।
करोड़ों खर्च के बावजूद सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर वित्तीय पहलू भी उठाया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर जनता के करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन आज भी खिलाड़ी और खेल प्रेमी अपनी ही धरती पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से वंचित हैं। गहलोत ने सवाल उठाया कि आखिर इतने बड़े निवेश के बावजूद यह परियोजना आगे क्यों नहीं बढ़ रही है और इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
RCA चुनाव और प्रशासनिक शून्यता
गहलोत ने केवल स्टेडियम निर्माण तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि उन्होंने Rajasthan Cricket Association की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से आरसीए के चुनाव नहीं हो पाए हैं, जिससे क्रिकेट प्रशासन में एक तरह का शून्य पैदा हो गया है। उनके अनुसार, यह स्थिति राज्य में क्रिकेट के विकास को प्रभावित कर रही है और खिलाड़ियों के भविष्य पर नकारात्मक असर डाल रही है।
‘खिलाड़ियों के सपनों से खिलवाड़’
गहलोत ने अपने वीडियो संदेश में भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि सरकार को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर खिलाड़ियों के हित में निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजनाओं को रोकना या धीमा करना सीधे तौर पर खिलाड़ियों के सपनों के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दे और इसे जल्द से जल्द पूरा करवाए, ताकि राज्य के खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
‘इंतज़ारशास्त्र’ सीरीज से बढ़ी सियासत
पिछले कुछ समय से अशोक गहलोत सोशल मीडिया पर ‘इंतज़ारशास्त्र’ नामक एक सीरीज चला रहे हैं। इस सीरीज के माध्यम से वे उन परियोजनाओं को उजागर कर रहे हैं, जो उनके कार्यकाल में शुरू हुई थीं लेकिन वर्तमान सरकार के समय में कथित रूप से ठप पड़ गई हैं। इस सीरीज का राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर यह तेजी से वायरल हो रही है और सरकार के सामने एक नई नैरेटिव चुनौती पेश कर रही है।
खेल नीति पर उठे सवाल
गहलोत के बयान के बाद राजस्थान में खेल नीति और सरकार की प्राथमिकताओं को लेकर बहस शुरू हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार केवल नाम बदलने या पुराने प्रोजेक्ट्स को रोकने में लगी हुई है, जबकि खेल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र की अनदेखी की जा रही है। उनका यह भी कहना है कि यदि समय रहते इस परियोजना पर ध्यान नहीं दिया गया, तो राज्य का खेल विकास प्रभावित हो सकता है और युवा प्रतिभाओं को नुकसान उठाना पड़ सकता है।


