राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड में OMR शीट बदलने के कथित मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ आमने-सामने आ गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक-दूसरे पर तीखे हमलों के साथ दोनों नेताओं ने न सिर्फ एक-दूसरे की सरकारों पर सवाल उठाए, बल्कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
गहलोत का बीजेपी सरकार पर सीधा हमला
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 22 जनवरी को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भारतीय जनता पार्टी की सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि OMR शीट बदलने का खेल किसी एक सरकार का नहीं है, बल्कि एसओजी की रिपोर्ट के अनुसार इसकी शुरुआत वर्ष 2018 से पहले, यानी भाजपा शासनकाल में हुई और यह प्रक्रिया वर्ष 2026 तक जारी रही। गहलोत ने दावा किया कि इस घोटाले में शामिल कर्मचारी वर्ष 2024 और 2025 में भी कर्मचारी चयन बोर्ड में पदस्थ रहे, जो मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कांग्रेस शासन में बने सख्त कानून का जिक्र
अशोक गहलोत ने अपने बयान में यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार ने पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए देश का सबसे सख्त कानून बनाया था। इस कानून में उम्रकैद, संपत्ति जब्ती और दस करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में पहली बार राजस्थान लोक सेवा आयोग के एक सदस्य की गिरफ्तारी हुई और एसओजी द्वारा 250 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
युवाओं के हित में लिए गए कठोर फैसले
गहलोत ने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार ने केवल कानून बनाने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि युवाओं के हित में कई बार परीक्षाएं रद्द करने जैसे कठोर फैसले भी लिए। उनका आरोप था कि वर्तमान भाजपा सरकार निष्पक्ष जांच कराने की बजाय केवल कांग्रेस शासनकाल की परीक्षाओं को निशाने पर ले रही है।
2024–25 की परीक्षाओं की जांच की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री से मांग की कि वर्ष 2024 और 2025 में कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित सभी भर्ती परीक्षाओं की गहराई से जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि सूचना सहायक, जीएनएम, एएनएम, कृषि पर्यवेक्षक, कनिष्ठ लेखाकार, संगणक, सीईटी, पशु परिचर, एलडीसी, जेईएन, पटवारी, वाहन चालक, ग्राम विकास अधिकारी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों सहित कई परीक्षाओं में 35 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल हुए। ये सभी परीक्षाएं उसी सिस्टम और स्टाफ के तहत हुईं, जिन पर अब OMR शीट घोटाले के आरोप लगे हैं।
राठौड़ का पलटवार, कांग्रेस पर साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने गहलोत के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि यह बयान खुद इस बात की स्वीकारोक्ति है कि कांग्रेस शासनकाल में OMR शीट घोटाले और पेपर लीक जैसी घटनाएं हुईं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच, जब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे, तब 19 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और इसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दी।
कांग्रेस कार्यकाल की परीक्षाओं पर सवाल
राजेंद्र राठौड़ ने लैब असिस्टेंट भर्ती परीक्षा, कृषि सुपरवाइजर परीक्षा और महिला सुपरवाइजर भर्ती परीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि ये सभी परीक्षाएं कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आयोजित हुई थीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन आरोपियों को अब एसओजी ने गिरफ्तार किया है, वे पांच वर्षों तक कर्मचारी चयन बोर्ड में पदस्थ कैसे बने रहे और उस समय सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की।
भजनलाल सरकार का बचाव
राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में एसओजी और सख्त कानून होने के बावजूद पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई गई। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान भजनलाल सरकार ने एसओजी को पूरी स्वतंत्रता दी है, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 138 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 394 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल
OMR शीट विवाद ने एक बार फिर राजस्थान की भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ कांग्रेस भाजपा सरकार पर निष्पक्ष जांच से बचने का आरोप लगा रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा कांग्रेस शासनकाल को पेपर लीक और घोटालों का जिम्मेदार ठहरा रही है। इस सियासी टकराव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े इन मामलों में सच्चाई कब और कैसे सामने आएगी।


