मनीषा शर्मा। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को मिली हाईकोर्ट से क्लीन चिट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। गहलोत ने SOG (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की जांच और रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए इसे सत्ता परिवर्तन के बाद लिया गया “यू-टर्न” करार दिया। उन्होंने निष्पक्ष जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) बनाने की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
हाईकोर्ट की क्लीन चिट और गहलोत का बयान
गजेंद्र सिंह शेखावत को संजीवनी घोटाले में राजस्थान हाईकोर्ट से क्लीन चिट मिलने के बाद, गहलोत ने कहा कि यह निर्णय SOG द्वारा कोर्ट में प्रस्तुत तथ्यों पर आधारित है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ, तब SOG ने अपना रुख बदल लिया और केस के जांच अधिकारी को भी हटा दिया गया। गहलोत के मुताबिक, भाजपा सरकार के नामित सरकारी वकीलों ने केंद्रीय मंत्री का ही पक्ष लिया और SOG ने दबाव के चलते कोर्ट में नया रुख अपनाया।
गहलोत का कहना है कि SOG की अप्रैल 2023 में भेजी गई तथ्यात्मक रिपोर्ट में गजेंद्र सिंह शेखावत और उनके परिजनों को इस घोटाले में सीधे तौर पर शामिल बताया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, जिन कंपनियों की संलिप्तता संजीवनी घोटाले में थी, उनका शेखावत से सीधा संबंध था।
शेखावत के प्रति कोई द्वेष नहीं: गहलोत
अशोक गहलोत ने कहा कि उनका गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति कोई व्यक्तिगत द्वेष नहीं था। जब सैकड़ों पीड़ित उनसे मिले और उन्होंने SOG से जानकारी मांगी, तब गृह मंत्री के रूप में उन्हें मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने मीडिया के सामने शेखावत और उनके परिजनों पर लगे आरोपों की जानकारी साझा की।
गहलोत ने कहा कि वह शेखावत की स्वर्गीय माताजी का पूरा सम्मान करते हैं, लेकिन राज्य के गृह मंत्री के रूप में उनका कर्तव्य था कि जो जानकारी उन्हें SOG ने दी, उसे जनता और पीड़ितों के सामने रखें। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ यह सुनिश्चित करना था कि लाखों पीड़ितों को न्याय मिले और उनकी मेहनत की कमाई उन्हें वापस मिले।
निष्पक्ष जांच की मांग: SIT गठन
गहलोत ने संजीवनी घोटाले में न्याय दिलाने के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) बनाकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह जांच स्पष्ट करेगी कि कांग्रेस शासन में SOG द्वारा की गई जांच सही थी या वर्तमान भाजपा सरकार के दबाव में SOG ने गलत रिपोर्ट दी है।
गहलोत ने बताया कि कांग्रेस सरकार के दौरान SOG ने इस मामले में फॉरेंसिक ऑडिट करवाकर जांच की थी। उनके अनुसार, इस केस में लाखों लोगों की मेहनत की कमाई डूबी हुई है, और उनका उद्देश्य उन पीड़ितों को न्याय दिलाना है।


