शोभना शर्मा। राजस्थान के जोधपुर जिले में स्वतंत्रता दिवस के दिन एक दर्दनाक हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। यह हादसा पांचबत्ती चौराहे के पास हुआ, जहां 13 वर्षीय मासूम लोकेश अपने दोस्तों के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने जा रहा था। लोकेश नेहरू कॉलोनी का निवासी था और देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस पर गर्व के साथ कार्यक्रम में भाग लेने निकला था। लेकिन उसकी यह यात्रा एक तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आकर हमेशा के लिए थम गई। हादसा इतना भीषण था कि लोकेश की मौके पर ही मौत हो गई।
इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को बल्कि पूरे प्रदेश को गहरे दुख में डाल दिया। खास बात यह है कि यह सड़क मार्ग उसी रूट पर था जहां से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा समेत कई वीवीआईपी को गुजरना था। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील रास्ते पर सुरक्षा इंतजाम क्यों नाकाम साबित हुए? आखिर किस तरह एक तेज रफ्तार ट्रक वहां पहुंच गया, जबकि आम दिनों में भी ऐसे रूट पर सुरक्षा और ट्रैफिक नियंत्रण कड़ा होता है।
स्वतंत्रता दिवस समारोह में अव्यवस्था
घटना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले को लेकर सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जोधपुर में आयोजित राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में भारी अव्यवस्था देखने को मिली। गहलोत के अनुसार, समारोह में शामिल होने आए लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ा। गर्मी और भीड़भाड़ के बीच हालात इतने बिगड़े कि 15 से ज्यादा बच्चों को डिहाइड्रेशन की वजह से अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि कई लोगों को वैध पास होने के बावजूद समारोह स्थल में प्रवेश नहीं दिया गया। यह दर्शाता है कि कार्यक्रम के प्रबंधन में गंभीर खामियां थीं। स्वतंत्रता दिवस जैसा राष्ट्रीय पर्व, जहां सभी वर्गों के लोग उत्साह के साथ भाग लेने आते हैं, वहां ऐसी बदइंतजामी होना बेहद निराशाजनक है।
पूर्व मुख्यमंत्री के गंभीर आरोप
अशोक गहलोत ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय पर्व पर बच्चों और बुजुर्गों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न कराना शर्मनाक है। उन्होंने इसे सरकार और प्रशासन की संवेदनशीलता की कमी बताया। गहलोत का कहना था कि स्वतंत्रता दिवस जैसे मौके पर जनता को असुविधा न हो, यह सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
गहलोत ने हादसे के बाद प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक मासूम बालक की सड़क दुर्घटना में मौत हो जाने के बावजूद सरकार और प्रशासन का ठंडा रवैया चौंकाने वाला है। उन्होंने मांग की कि सरकार इस तरह की घटनाओं से सबक ले और भविष्य में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करे, ताकि किसी परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
सुरक्षा और संवेदनशीलता की कमी पर सवाल
इस हादसे ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। जिस मार्ग से मुख्यमंत्री और अन्य वीवीआईपी का काफिला गुजरना था, वहां पर ट्रक का पहुंचना और इतना बड़ा हादसा हो जाना यह दर्शाता है कि ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां रहीं। ऐसे आयोजनों में सुरक्षा, ट्रैफिक कंट्रोल और भीड़ प्रबंधन के लिए पुख्ता योजना बनाना अनिवार्य होता है, लेकिन जोधपुर की इस घटना ने दिखा दिया कि इस बार ऐसा नहीं हुआ।
गहलोत ने अपने बयान में जोर दिया कि सरकार को ऐसे अवसरों पर संवेदनशील और जिम्मेदार रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस न केवल एक उत्सव है, बल्कि यह वह दिन है जब सरकार अपनी दक्षता और संवेदनशीलता का प्रदर्शन करती है। यदि इस दिन जनता को अव्यवस्था, असुविधा और असुरक्षा का सामना करना पड़े तो यह सरकार की नाकामी को उजागर करता है।
भविष्य के लिए सबक
पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से अपील की कि वह इस हादसे और अव्यवस्था से सबक ले और आने वाले आयोजनों के लिए पुख्ता व्यवस्थाएं करे। इसमें न केवल सुरक्षा बल्कि भीड़ प्रबंधन, मेडिकल सुविधाएं, पीने के पानी की व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता है।
लोकेश की मौत ने पूरे जोधपुर को शोक में डुबो दिया है। परिवार और स्थानीय लोगों के लिए यह स्वतंत्रता दिवस हमेशा दर्द और पीड़ा की याद के रूप में रहेगा। वहीं, इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बड़े आयोजनों में प्रशासन की थोड़ी सी लापरवाही भी कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।


