शोभना शर्मा। भारत और अमेरिका (India-US Trade Relations) के बीच लंबे समय से जारी व्यापारिक तनाव अब 50% टैरिफ के साथ एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है। 27 अगस्त से अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले अधिकांश सामानों पर 50% का भारी-भरकम टैरिफ लागू कर दिया है। इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था, निर्यातकों और कई बड़े उद्योगों पर सीधा देखने को मिलेगा।
SBI रिसर्च रिपोर्ट: आंकड़ों की पूरी तस्वीर
SBI रिसर्च की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम से भारत के 45 अरब डॉलर तक के निर्यात पर असर पड़ने का अनुमान है। सबसे बुरी स्थिति में, भारत का जो Trade Surplus (व्यापार अधिशेष) अमेरिका के साथ है, वह Trade Deficit (व्यापार घाटे) में बदल सकता है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी कहती है कि अगर दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता सफल होती है, तो निर्यात में सुधार की उम्मीद बनी रहेगी।
अमेरिका पर भी उल्टा असर
यह कदम सिर्फ भारत के लिए चुनौती नहीं है, बल्कि अमेरिका पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। जब आयातित सामान महंगा होगा तो अमेरिकी उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो और कंज्यूमर गुड्स के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। SBI रिसर्च का अनुमान है कि इस टैरिफ से अमेरिका के GDP पर 40-50 बेसिस प्वाइंट्स (0.4-0.5%) का नकारात्मक असर पड़ सकता है।
किन उत्पादों पर लागू हुआ टैरिफ?
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंस्टीट्यूट के फाउंडर अजय श्रीवास्तव के अनुसार: 30% भारतीय निर्यात को इस टैरिफ से छूट मिली है। इसमें पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, दवाइयां (Pharma), API और कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं। लगभग 4% उत्पादों (जैसे ऑटो पार्ट्स) पर 25% टैरिफ लगाया गया है। लेकिन, बाकी 66% निर्यात पर पूरा 50% टैरिफ लागू होगा। इसका मतलब है कि भारत के प्रमुख श्रम-प्रधान उद्योग जैसे कपड़ा, आभूषण और सी-फूड को भारी नुकसान होगा।
सबसे ज्यादा प्रभावित उद्योग
1. कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स
अमेरिका भारतीय कपड़ों और रेडीमेड गारमेंट्स का सबसे बड़ा खरीदार है। भारत ने हाल के वर्षों में चीन को पछाड़कर अमेरिका में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई थी। लेकिन अब 50% टैरिफ लागू होने के बाद, भारतीय कपड़े अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे और प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं।
2. रत्न और आभूषण (Gems & Jewellery)
भारत का रत्न और आभूषण उद्योग पहले से ही डॉलर की कमजोरी और मांग में कमी से जूझ रहा था। अब इस पर भी सीधा असर पड़ेगा। भारत के कुल 28.5 अरब डॉलर के निर्यात में से लगभग एक तिहाई अमेरिका जाता है। अब तक 2-3% टैरिफ लगता था, लेकिन अब 50% से ज्यादा हो गया है।
3. झींगा निर्यात (Shrimp Export)
भारत अमेरिका को हर साल 2.5 अरब डॉलर का झींगा निर्यात करता है। अब इस पर 56% तक का टैरिफ लगाया गया है। झींगा निर्यातकों को ऑर्डर कैंसिल होने और बड़े पैमाने पर नुकसान का खतरा है। इक्वाडोर और थाईलैंड जैसे देश इसका फायदा उठाकर अमेरिकी बाजार में भारत की जगह ले सकते हैं।
किन उद्योगों को राहत?
1. दवा उद्योग (Pharma)
भारत से अमेरिका को होने वाले 40% दवा निर्यात को इस टैरिफ से छूट मिली है। यह भारत के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि फार्मा सेक्टर भारत का सबसे बड़ा निर्यात उद्योग है।
2. इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन
Apple की सप्लाई चेन और स्मार्टफोन इंडस्ट्री को भी टैरिफ से छूट दी गई है। यह सेक्टर फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन अगर भविष्य में इसे भी टैरिफ दायरे में लाया गया तो भारत की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
क्यों खतरनाक है यह फैसला?
भारत का बड़ा हिस्सा श्रम-प्रधान उद्योगों पर निर्भर है। अगर अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाएंगे तो लाखों रोजगार पर सीधा असर पड़ सकता है। इससे भारत के छोटे और मझोले उद्योगों पर भी दबाव बढ़ेगा।
भारत के पास क्या विकल्प हैं?
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इंस्टीट्यूट के फाउंडर अजय श्रीवास्तव का कहना है कि भारत के पास दो रास्ते हैं:
घरेलू बाजार को मजबूत करना – ताकि घरेलू खपत निर्यात पर दबाव को कम कर सके।
नए बाजार तलाशना – सरकार पहले से ही यूरोप, खाड़ी देशों और एशियाई देशों के साथ FTAs (मुक्त व्यापार समझौते) पर काम कर रही है।
नतीजा
अमेरिका का यह टैरिफ भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। जहां कपड़ा, आभूषण और सी-फूड जैसे उद्योगों पर भारी मार पड़ेगी, वहीं दवा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को कुछ राहत मिली है। भारत को अब अपनी रणनीति बदलकर नए बाजारों पर ध्यान देना होगा। अगर भारत इस स्थिति से सही तरीके से निपटता है, तो यह संकट लंबे समय में एक अवसर भी बन सकता है।


