शोभना शर्मा। सोलहवीं राजस्थान विधानसभा का चतुर्थ अधिवेशन सोमवार, 1 सितम्बर से शुरू होगा। इस संबंध में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अधिसूचना जारी कर दी है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बताया कि इस सत्र में राज्य के विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों, विधायी कार्यों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी।
अध्यक्ष देवनानी ने विधानसभा सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर सत्र से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने विधानसभा के प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा को निर्देश दिया कि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी कर ली जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्र के दौरान प्रश्न, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, विशेष उल्लेख प्रस्ताव और स्थगन प्रस्ताव जैसे महत्वपूर्ण संसदीय कार्य भी संपादित किए जाएंगे, जिससे जनहित के मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो सके।
वासुदेव देवनानी ने कहा कि यह सत्र राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहेगा। इसमें सरकार विभिन्न विधेयक पेश कर सकती है, जिनका सीधा असर जनता के जीवन से जुड़ा होगा। साथ ही विपक्ष के पास भी अपने मुद्दे रखने का अवसर होगा, जिससे सदन में सार्थक बहस की उम्मीद है।
अध्यक्ष देवनानी ने सत्र से पूर्व सर्वदलीय बैठक बुलाने की भी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यह पहल राजस्थान विधानसभा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण नवाचार है। सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य सभी राजनीतिक दलों के सदस्यों के बीच आपसी विचार-विमर्श को बढ़ावा देना और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पहल से सत्र के दौरान सकारात्मक माहौल बनेगा और जनता के हित में निर्णय लेने की प्रक्रिया और प्रभावी होगी।
देवनानी ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में सत्र की रूपरेखा, समय प्रबंधन और कार्यसूची पर सभी दलों से सुझाव लिए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चले और अधिकतम समय जनहित व राज्यहित के मुद्दों पर चर्चा के लिए इस्तेमाल हो।
विधानसभा सचिवालय में की गई समीक्षा बैठक में सुरक्षा, मीडिया कवरेज, विधायी दस्तावेजों की तैयारी और तकनीकी व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हुई। अध्यक्ष ने अधिकारियों से कहा कि सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए ताकि सत्र के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
कुल मिलाकर, 1 सितम्बर से शुरू होने वाला यह चतुर्थ अधिवेशन राजनीतिक दृष्टि से अहम रहने वाला है। जहां सत्ता पक्ष अपनी योजनाओं और उपलब्धियों को सदन में प्रस्तुत करेगा, वहीं विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठाएगा। सर्वदलीय बैठक के माध्यम से सदन में सामंजस्य और रचनात्मक बहस का माहौल बनाने की कोशिश विधानसभा अध्यक्ष की इस पहल को और भी सार्थक बनाएगी।