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राजस्थान विधानसभा का चौथा सत्र 1 सितंबर 2025 से

राजस्थान विधानसभा का चौथा सत्र 1 सितंबर 2025 से

मनीषा शर्मा।  राजस्थान की राजनीतिक और विधायी गतिविधियों में एक बार फिर से हलचल बढ़ने वाली है, क्योंकि 1 सितंबर 2025 से सोलहवीं राजस्थान विधानसभा का चौथा सत्र शुरू होने जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इस सत्र की तैयारियों को लेकर राज्य सरकार के सभी विभागों को विशेष और जरूरी निर्देश भेजे हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी सत्र में विधायकों के प्रश्नों के उत्तर समय पर और पूर्ण रूप से उपलब्ध हों, जिससे विधानसभा की कार्यप्रणाली सुचारू और प्रभावी बनी रहे।

वासुदेव देवनानी ने स्पष्ट किया है कि सभी विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिवगण यह सुनिश्चित करें कि तीसरे सत्र में विधायकों द्वारा पूछे गए और अब तक लंबित पड़े सभी प्रश्नों के उत्तर 27 अगस्त 2025 तक विधानसभा को भेज दिए जाएं। यह समयसीमा इसलिए तय की गई है ताकि 1 सितंबर से शुरू हो रहे चौथे सत्र में किसी भी प्रकार की देरी या बाधा न आए।

तीसरे सत्र के आंकड़े और लंबित प्रश्न

राजस्थान विधानसभा के बीते तीसरे सत्र में विधायकों ने कुल 9700 प्रश्न लगाए थे, जो विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों, योजनाओं, नीतियों और जनहित से संबंधित विषयों को कवर करते थे। इनमें से लगभग 7300 प्रश्नों के उत्तर राज्य सरकार द्वारा समय पर उपलब्ध कराए गए, जो कि कुल प्रश्नों का लगभग 75 प्रतिशत है। हालांकि, अब भी करीब 2400 प्रश्नों के उत्तर लंबित हैं।

ये लंबित प्रश्न मुख्य रूप से उन मुद्दों से संबंधित हैं, जिनमें विस्तृत जानकारी, विभागीय समन्वय या तकनीकी जांच की आवश्यकता है। विधानसभा अध्यक्ष ने उम्मीद जताई है कि बाकी बचे 2400 प्रश्नों के उत्तर भी समय सीमा के भीतर, यानी 27 अगस्त तक, विधानसभा को प्राप्त हो जाएंगे।

पारदर्शिता और जवाबदेही का महत्व

वासुदेव देवनानी ने अपने निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया कि विधान सभा में पूछे गए प्रश्न सिर्फ औपचारिकता नहीं होते, बल्कि ये जनप्रतिनिधियों के जरिए आमजन की समस्याओं और मुद्दों को सामने लाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। जब इन प्रश्नों के समय पर उत्तर मिलते हैं, तो यह न केवल जनहित के समाधान में मदद करता है बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को भी बढ़ावा देता है।

उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि सभी विभाग समयबद्ध तरीके से अपने उत्तर प्रस्तुत करें, ताकि सदन की कार्यक्षमता में वृद्धि हो सके। समय पर उत्तर मिलने से न केवल विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याओं पर बेहतर तरीके से चर्चा कर सकते हैं, बल्कि आमजन के हित में ठोस निर्णय भी लिए जा सकते हैं।

लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम

विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि प्रश्नोत्तर प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था की रीढ़ है। जब विधायक अपने क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों को सदन में रखते हैं और सरकार से उनका जवाब प्राप्त करते हैं, तो यह पूरी प्रणाली को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाता है।

देवनानी ने कहा कि सरकार और विभागों की जिम्मेदारी है कि वे विधायकों के प्रश्नों को गंभीरता से लें और उनके उत्तर समय पर दें। यह न केवल पारदर्शिता को बढ़ाता है, बल्कि जनता के बीच सरकार की विश्वसनीयता को भी मजबूत करता है।

सत्र की संभावित दिशा और अपेक्षाएं

चौथा सत्र मानसून सत्र होगा, जिसमें संभावना है कि राज्य में चल रही विभिन्न योजनाओं, विकास कार्यों, कानून व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। विपक्ष सरकार को घेरने का प्रयास करेगा, जबकि सरकार अपनी उपलब्धियों और योजनाओं को सामने रखेगी।

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