राजस्थान की सोलहवीं विधानसभा के कार्यकाल में वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों का गठन कर दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इस संबंध में व्यापक स्तर पर मनोनयन करते हुए अलग-अलग समितियों में सदस्यों और सभापतियों की नियुक्ति की है। यह कदम राज्य की संसदीय कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधानसभा की समितियां शासन के कामकाज की समीक्षा, नीतियों की जांच और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श के लिए अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में इन समितियों का गठन केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम होता है। अध्यक्ष देवनानी ने जिन समितियों का गठन किया है, उनमें नियम समिति, प्रश्न एवं संदर्भ समिति, महिलाओं एवं बालकों के कल्याण संबंधी समिति, पिछड़े वर्ग के कल्याण संबंधी समिति, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण समितियां, गृह एवं स्थानीय निकायों से जुड़ी समिति, पुस्तकालय एवं सरकारी आश्वासन समिति, याचिका एवं सदाचार समिति, विशेषाधिकार समिति, अल्पसंख्यक एवं पर्यावरण समिति और सामान्य प्रयोजन समिति शामिल हैं।
नियम समिति में स्वयं विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पदेन सभापति होंगे, जो इस समिति के महत्व को दर्शाता है। इस समिति में पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे, अशोक गहलोत,, सचिन पायलट सहित कई वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस समिति में अनुभव और विविध राजनीतिक दृष्टिकोणों का समावेश सुनिश्चित किया गया है।
प्रश्न एवं संदर्भ समिति की जिम्मेदारी राजेन्द्र पारीक को सौंपी गई है, जबकि महिलाओं एवं बालकों के कल्याण से जुड़ी समिति की अध्यक्षता कल्पना देवी करेंगी। इन समितियों के माध्यम से विधानसभा में उठने वाले प्रश्नों की समीक्षा और समाज के संवेदनशील वर्गों के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
इसी तरह पिछड़े वर्ग के कल्याण संबंधी समिति की कमान नरेन्द्र बुडानियां को दी गई है, जबकि अनुसूचित जाति कल्याण समिति के सभापति रमेश खींची और अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के सभापति फूल सिंह मीणा बनाए गए हैं। इन समितियों का उद्देश्य समाज के वंचित वर्गों के कल्याण से जुड़े मुद्दों की निगरानी और समाधान सुनिश्चित करना है।
गृह तथा स्थानीय निकायों एवं पंचायतीराज संस्थाओं संबंधी समिति की अध्यक्षता डॉ. जसवंत सिंह यादव को सौंपी गई है। यह समिति राज्य में स्थानीय प्रशासन और पंचायत व्यवस्था के कामकाज की समीक्षा करेगी, जो ग्रामीण और शहरी विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वहीं पुस्तकालय एवं सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति के सभापति Harisinh Rawat बनाए गए हैं, जो सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों की प्रगति पर नजर रखेंगे।
याचिका एवं सदाचार समिति का नेतृत्व कैलाश चन्द वर्मा करेंगे, जबकि विशेषाधिकार एवं अधीनस्थ विधान संबंधी समिति के सभापति जितेन्द्र कुमार गोठवाल होंगे। ये समितियां विधायकों के अधिकारों की रक्षा और विधायी प्रक्रियाओं की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
अल्पसंख्यकों के कल्याण एवं पर्यावरण संबंधी समिति की जिम्मेदारी केसाराम चौधरी को दी गई है। यह समिति राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों के हितों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर काम करेगी। वहीं सामान्य प्रयोजन समिति में भी अध्यक्ष देवनानी पदेन सभापति रहेंगे, जिसमें मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कई प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है।
इस व्यापक गठन के माध्यम से विधानसभा ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि शासन के विभिन्न पहलुओं पर संतुलित और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। विभिन्न समितियों में सत्ता और विपक्ष दोनों के नेताओं को शामिल कर लोकतांत्रिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश भी की गई है।
अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने इस अवसर पर विश्वास व्यक्त किया कि सभी समितियां अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए शासन के कार्यों की प्रभावी समीक्षा करेंगी और जनहित, पारदर्शिता तथा जवाबदेही को और अधिक सुदृढ़ बनाएंगी। उन्होंने कहा कि समितियों के माध्यम से जनता की समस्याओं और सुझावों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा और उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
राजस्थान विधानसभा की इन समितियों का गठन आने वाले समय में राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा को प्रभावित करेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये समितियां किस प्रकार अपने दायित्वों का निर्वहन करती हैं और राज्य के विकास तथा जनहित के मुद्दों को किस तरह आगे बढ़ाती हैं।


