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राजस्थान में शहरी निकाय कर प्रणाली में सुधार के लिए कमेटियों का गठन

राजस्थान में शहरी निकाय कर प्रणाली में सुधार के लिए कमेटियों का गठन

मनीषा शर्मा।  राजस्थान सरकार राज्य की शहरी निकायों, जैसे नगर निगम, नगर परिषद, और नगर पालिकाओं की कर और शुल्क प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार करने की दिशा में कदम उठा रही है। इस दिशा में एक बड़ा कदम यह है कि राज्य सरकार ने कर और शुल्क प्रणाली को सरलीकृत और अधिक यूजर फ्रेंडली बनाने के लिए विभिन्न कमेटियों का गठन किया है। इन कमेटियों को दूसरे राज्यों के नगरीय निकायों के सिस्टम का अध्ययन करने और उन पर आधारित सुझाव देने के लिए कहा गया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहरी निकायों के राजस्व प्रणाली को सरल बनाना और इसमें अधिक पारदर्शिता लाना है।

शहरी निकायों की कर प्रणाली में वर्तमान समस्याएं

वर्तमान में राजस्थान के शहरी निकायों में नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स), विज्ञापन शुल्क, फायर एनओसी शुल्क, मैरिज गार्डन रजिस्ट्रेशन शुल्क, भवन निर्माण स्वीकृति शुल्क, और मोबाइल टॉवर शुल्क जैसे कर व शुल्क प्रमुख राजस्व स्रोत हैं। हालांकि, इन शुल्कों की गणना और संग्रहण प्रक्रिया में कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं। आवेदक अक्सर यूडी टैक्स और अन्य शुल्कों की गणना करवाने में काफी दिक्कतों का सामना करते हैं। इसके अलावा, फाइल मूवमेंट और अंततः शुल्क का भुगतान भी एक जटिल प्रक्रिया बन जाती है। इन समस्याओं के कारण कई व्यक्ति, कंपनियां या संस्थाएं अपना शुल्क जमा ही नहीं करवा पातीं। यह भी देखा गया है कि जयपुर जैसे शहरों में यूडी टैक्स की वसूली प्राइवेट फर्मों के माध्यम से की जा रही है, जो कई बार गलत गणना और नोटिस जारी करती हैं, जिससे नागरिकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है।

राजस्थान सरकार का सुधारात्मक कदम

राज्य सरकार ने इन समस्याओं को सुलझाने और कर और शुल्क प्रणाली को सुधारने के लिए कमेटियों का गठन किया है। इन कमेटियों का मुख्य कार्य नगरीय निकायों की वर्तमान कर प्रणाली का अध्ययन करना, दूसरे राज्यों के मॉडल को देखना और इसके आधार पर नए नियम और प्रणालियां तैयार करना है। स्वायत्त शासन निदेशालय के निदेशक और विशिष्ट सचिव कुमार पाल गौतम ने चार प्रमुख विषयों पर सुझाव देने के लिए कमेटियों का गठन किया है, जिनमें कर और शुल्क प्रणाली सुधार के लिए बनाई गई एक 5-सदस्यीय कमेटी भी शामिल है। इस कमेटी में वित्तीय सलाहकार महेंद्र मोहन, नगर निगम ग्रेटर के उपायुक्त राजस्व जनार्दन शर्मा, राज्य नोडल अधिकारी (वित्त आयोग) डॉ. कमल दीप शर्मा, सहायक विधि परामर्शी सोमदत्त खंडप्पा, और सलाहकार पारस जैन शामिल हैं।

कर प्रणाली में सुधार की संभावनाएं

राजस्थान के शहरी निकायों में कर प्रणाली को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नागरिकों को कर भुगतान की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। सरकार की यह भी योजना है कि अधिकतम सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफार्म पर लाया जाए ताकि नागरिक घर बैठे अपने शुल्क जमा कर सकें और उन्हें किसी कार्यालय में बार-बार जाने की आवश्यकता न हो।

वर्तमान में कई शहरों में यूडी टैक्स और अन्य शुल्कों की गणना करवाने में बहुत समय और प्रयास लगता है, जिसे कम करने के लिए सरकार एक डिजिटल और समयबद्ध प्रणाली तैयार कर रही है। इसके अलावा, यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नागरिकों को सही गणना और उचित नोटिस दिए जाएं ताकि वे समय पर अपने कर और शुल्क जमा कर सकें।

जयपुर में प्राइवेट फर्म द्वारा यूडी टैक्स वसूली

जयपुर शहर में वर्तमान में नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) की वसूली एक प्राइवेट फर्म, स्पैरो कंपनी के माध्यम से की जा रही है। हालांकि, इस प्रणाली में कई समस्याएं हैं। उदाहरण के लिए, फर्म कई बार गलत गणना के आधार पर नोटिस जारी करती है, जिसके कारण नागरिकों में असंतोष और भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। कई नागरिकों ने शिकायत की है कि उन्हें पुराने कर का नोटिस भेजा गया है, जिसे वे सही नहीं मानते। इसके चलते कई लोग अपना यूडी टैक्स जमा नहीं कर पा रहे हैं। राज्य सरकार ने इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कमेटियों का गठन किया है, जो इन मुद्दों का समाधान तलाशेंगी और एक नई व व्यवस्थित कर प्रणाली तैयार करेंगी।

शुल्क प्रणाली के सरलीकरण पर भी विचार

शुल्क प्रणाली के सरलीकरण के अलावा, सरकार ने ऑनलाइन और ऑफलाइन सेवाओं को अधिकतम सरल और समयबद्ध बनाने पर भी ध्यान केंद्रित किया है। इसके लिए एक 6-सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जो इन सेवाओं के सरलीकरण और समयबद्धता पर सुझाव देगी। इसके अलावा, कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या कम करने और छोटी पेनल्टी वाले मामलों का विश्लेषण करके उन्हें तेजी से निपटाने के उपायों पर भी विचार किया जा रहा है। इसके लिए भी 5-सदस्यीय एक अन्य कमेटी का गठन किया गया है।

कोर्ट मामलों में सुधार

सरकार ने कोर्ट में लंबित प्रकरणों की पेंडेंसी को कम करने और छोटी पेनल्टी वाले कोर्ट के मामलों का विश्लेषण करने के लिए भी एक 5-सदस्यीय कमेटी बनाई है। इस कमेटी का उद्देश्य कोर्ट के मामलों को बढ़ने से रोकने के उपाय सुझाना है। इसके अलावा, वर्तमान में लागू नियम-अधिनियमों में संशोधन करने और उन्हें आमजन के लिए अधिक सरल और यूजर फ्रेंडली बनाने के लिए एक अन्य कमेटी भी बनाई गई है। इस कमेटी का कार्य यह सुनिश्चित करना है कि शहरी निकायों के नियम और अधिनियम जनता के लिए समझने में सरल हों और वे अपनी जिम्मेदारियों को आसानी से निभा सकें।

भविष्य की योजनाएं

राजस्थान सरकार की यह पहल राज्य के शहरी निकायों की कर और शुल्क प्रणाली को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सभी नागरिकों को अपने कर और शुल्क जमा करने में कोई कठिनाई न हो और उन्हें एक सरल और समयबद्ध प्रणाली के माध्यम से यह सेवाएं उपलब्ध हों। इसके अलावा, सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि कोर्ट में लंबित मामलों को तेजी से निपटाने और शहरी निकायों के नियमों को आमजन के लिए अधिक सरल बनाने के उपाय किए जाएं।

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