मनीषा शर्मा। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने चार्टर्ड अकाउंटेंटस से आह्वान किया कि वे केवल भारत की आर्थिक व्यवस्था को संचालित करने वाले पेशेवर न रहकर, विश्वास, नैतिकता, अवसर और प्रौद्योगिकी के मजबूत स्तंभ बनें। वे जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “Fiducia 2025” को संबोधित कर रहे थे, जिसका विषय नैतिकता, अवसर, प्रौद्योगिकी और स्थिरता पर केंद्रित था। कार्यक्रम का शुभारंभ उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
देवनानी ने कहा कि तेजी से उभरती भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में यह सम्मेलन बेहद प्रासंगिक है। आज का भारत अवसरों से भरा हुआ है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच मजबूती से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने डिजिटल इंडिया, जीएसटी, मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और स्टार्टअप इंडिया जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सबकी मूल भावना विश्वास और सुशासन पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक नीतियों, निवेश और कॉर्पोरेट गवर्नेंस में संतुलन स्थापित करने में चार्टर्ड अकाउंटेंटस की भूमिका निर्णायक होती है। इसलिए उन्हें एक सजग प्रहरी की तरह देशहित में अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए। ग्रीन बॉन्ड्स, सस्टेनेबल फाइनेंस और ईएसजी रिपोर्टिंग के माध्यम से वे भारत के 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उनके अनुसार, यह पेशा केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।
देवनानी ने कहा कि उपनिषद हमें सिखाते हैं कि ज्ञान तभी पूर्ण होता है जब उसमें विवेक हो। यदि तकनीक विवेक से अलग हो जाए तो सुविधा के बजाय संकट बन जाती है। इसलिए निर्णय लेते समय मानवीय संवेदना, नैतिकता और अनुभव को प्राथमिकता देनी चाहिए। कोई भी मशीन सही-गलत के नैतिक अंतर को तय नहीं कर सकती — यह जिम्मेदारी मनुष्य की है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत की असली ताकत एमएसएमई, स्टार्ट-अप्स और छोटे उद्यमियों में निहित है। विशेष रूप से राजस्थान में कारीगरी और उद्यमशीलता का अद्भुत मेल देखने को मिलता है। यहां के छोटे उद्योग केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान भी हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंटस इन उद्यमों को सही दिशा, वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक दृष्टि देकर उनके विकास में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने पूंजी बाजार, ऑडिट, टैक्सेशन और फाइनेंशियल रिपोर्टिंग में हो रहे बदलावों को अभूतपूर्व बताया। उन्होंने कहा कि इन सबके केंद्र में एक ही सवाल है — क्या हम विश्वास को बनाए रख पा रहे हैं? बिना विश्वास के न समाज टिक सकता है, न संस्था और न ही अर्थव्यवस्था। उन्होंने गीता का उद्धरण देते हुए कहा कि कर्तव्य से विमुख होना सबसे बड़ा पतन है। इसलिए चार्टर्ड अकाउंटेंटस का मूल मंत्र होना चाहिए — कर्तव्य, विवेक और उत्तरदायित्व।
देवनानी ने कहा कि उनकी एक रिपोर्ट किसी कंपनी का भविष्य तय कर सकती है, निवेशकों के विश्वास को मजबूत बना सकती है और सरकारों की नीतियों की दिशा तय कर सकती है। उन्होंने नए आयकर कानून का सही विश्लेषण करने और ऑडिट की गुणवत्ता बनाए रखने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल पेशेवर चर्चा का मंच नहीं, बल्कि भारत की जीवंत आर्थिक चेतना का मंथन भी है। आवश्यक है कि चार्टर्ड अकाउंटेंटस अपने पेशे को केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित न रखें, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी ऐसा रास्ता बनाएं जिससे एक विकसित, मूल्यनिष्ठ और विश्वसनीय भारत निर्मित हो सके। यही फिडयूशिया की आत्मा और भारतीय संस्कृति का संदेश है।
कार्यक्रम में आईसीएआई के अध्यक्ष सीए चरणजोत सिंह नंदा सहित कई पदाधिकारियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर उल्लेखनीय कार्य करने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंटस को सम्मानित किया गया और भविष्य के लिए नए संकल्प व्यक्त किए गए।


