मनीषा शर्मा। राजस्थान सरकार ने नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (NSFA) के तहत सूचीबद्ध अपात्र परिवारों को 31 दिसंबर तक स्वयं अपना नाम हटाने की अंतिम तिथि दी है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई अपात्र व्यक्ति या परिवार इस निर्धारित तिथि तक अपना नाम खाद्य सुरक्षा पोर्टल से नहीं हटाता है, तो नए साल से उनसे नियमानुसार वसूली की जाएगी। यह कदम खाद्य सुरक्षा लाभों को वास्तविक पात्र और जरूरतमंद लोगों तक पहुँचाने के उद्देश्य से उठाया गया है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने बताया कि 1 नवंबर 2024 को शुरू हुए “गिव-अप अभियान” के तहत अब तक लगभग 48 लाख लोगों ने स्वेच्छा से अपना नाम खाद्य सुरक्षा सूची से हटाया है। यह अभियान राज्य स्तर पर चलाया जा रहा है, ताकि खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ केवल उन परिवारों को मिले जो वास्तव में इसके हकदार हैं।
48 लाख लोगों ने स्वेच्छा से किया नाम हटाने का निर्णय
मंत्री गोदारा ने बताया कि गिव-अप अभियान के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने पहल करते हुए खाद्य सुरक्षा सूची से अपने नाम हटाने का कार्य स्वयं किया। जिन लोगों ने नाम हटाया है, उनकी जगह पात्र लोगों को सूची में शामिल किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस पहल से कई ऐसे गरीब परिवारों को पहली बार खाद्य सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा, जिन्हें अब तक इसका लाभ नहीं मिला था। उन्होंने बताया कि 31 दिसंबर को अभियान की समयसीमा समाप्त हो जाएगी। इसके बाद यदि कोई अपात्र व्यक्ति अपना नाम हटाएगा, तो उससे राज्य सरकार खाद्य सुरक्षा कानून के तहत लाभ की वसूली करेगी। यह नियम पहले से ही तय है, जिसका सख्ती से पालन कराया जाएगा।
70 लाख 25 हजार नए नाम जोड़े गए
मंत्री गोदारा ने बताया कि सरकार के कार्यकाल में खाद्य सुरक्षा पोर्टल पर अब तक 70 लाख 25 हजार नए पात्र लोगों को NSFA सूची में जोड़ा गया है। उनका कहना है कि यह सूची लगातार अपडेट हो रही है, ताकि लाभ वास्तविक पात्रता के आधार पर वितरित हो सके। सरकार का मानना है कि पिछले समय में कई ऐसे परिवार भी इस सूची में बने रहे जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद योजना का लाभ उठा रहे थे। सरकार का लक्ष्य है कि पात्र वंचित, आर्थिक कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों को ही खाद्य सुरक्षा का लाभ मिले।
कौन-कौन हैं NSFA के लिए अपात्र?
राज्य सरकार ने उन परिवारों की स्पष्ट श्रेणियां निर्धारित की हैं जिन्हें NSFA लाभों के लिए अयोग्य माना गया है। इनमें शामिल हैं:
सरकारी, अर्द्धसरकारी, स्वायत्तशासी संस्थान में कार्यरत कर्मचारी
यदि परिवार का कोई भी सदस्य नियमित सरकारी नौकरी में है या एक लाख रुपये से अधिक वार्षिक पेंशन लेता है, तो वह अपात्र माना जाएगा।आयकरदाता परिवार
जिस परिवार का कोई भी सदस्य आयकर भुगतान करता है, वह खाद्य सुरक्षा लाभ का हकदार नहीं होगा।चौपहिया वाहन वाला परिवार
जिन परिवारों के पास चौपहिया वाहन (ट्रैक्टर और एक वाणिज्यिक वाहन को छोड़कर) है, उन्हें भी NSFA के लिए अपात्र माना गया है।उच्च बिजली खपत वाले परिवार
जिन परिवारों का सालभर का कुल बिजली बिल 50 हजार रुपये या उससे अधिक आता है, ऐसे परिवार भी लाभ नहीं ले सकेंगे।इन श्रेणियों को इसलिए तय किया गया है ताकि केवल जरूरतमंद और गरीब परिवार ही इस सरकारी सुविधा का लाभ प्राप्त करें।
वसूली का प्रावधान क्यों लागू किया जाएगा?
राज्य सरकार का मानना है कि बहुत लंबे समय से बड़ी संख्या में ऐसे परिवार खाद्य सुरक्षा लाभ ले रहे थे जो वास्तविक पात्रता मानकों में फिट नहीं बैठते। ऐसे लोगों द्वारा लिए जा रहे लाभ से गरीब परिवारों को वंचित होना पड़ता था। इसीलिए अब सरकार ने स्व-घोषणा के माध्यम से नाम हटाने का अभियान चलाया है और अंतिम तिथि के बाद सख्त कदम उठाने की तैयारी भी कर ली है। जो लोग अपात्र होकर भी लाभ उठा रहे हैं, उनसे नए साल से सरकार नियमों के अनुसार खर्च की वसूली शुरू करेगी।
सरकार की अपील
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे 31 दिसंबर से पहले अपनी पात्रता अवश्य जांच लें और यदि वे अपात्र हैं तो पोर्टल पर जाकर नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी करें। विभाग का कहना है कि स्वेच्छा से नाम हटाने पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाएगी।


