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RPSC : राजस्थान शिक्षक भर्ती में फर्जी डिग्री घोटाला, आरोपी गिरफ्तार

RPSC : राजस्थान शिक्षक भर्ती में फर्जी डिग्री घोटाला, आरोपी  गिरफ्तार

राजस्थान में शिक्षा विभाग की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। हाल ही में सामने आए एक मामले ने न केवल भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया पर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। यह मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित प्राध्यापक (स्कूल शिक्षा) कृषि विज्ञान प्रतियोगी परीक्षा 2022 से जुड़ा हुआ है, जिसमें एक अभ्यर्थी द्वारा फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने का खुलासा हुआ है।

इस पूरे प्रकरण की जांच राज्य की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) द्वारा की जा रही है, जिसने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (SOG) विशाल बंसल के अनुसार, इस मामले की जांच पहले से ही जारी थी और शुरुआती जांच में ही यह संकेत मिल गए थे कि कुछ अभ्यर्थियों ने शैक्षणिक योग्यता के नाम पर फर्जीवाड़ा किया है। जांच के दौरान यह सामने आया कि संबंधित अभ्यर्थियों ने ओपीजेएस विश्वविद्यालय, चूरू के कुछ पदाधिकारियों के साथ मिलीभगत कर बैक डेट में नकली डिग्रियां और मार्कशीट तैयार करवाईं और उन्हें नियुक्ति के समय वैध दस्तावेजों के रूप में प्रस्तुत किया।

इसी कड़ी में SOG ने 29 अप्रैल 2026 को अशोक कुमार यादव नामक आरोपी को गिरफ्तार किया। 33 वर्षीय आरोपी जयपुर के कालाडेरा क्षेत्र के बाई का बास का निवासी है और वर्तमान में सीकर जिले के श्रीमाधोपुर क्षेत्र स्थित एक सरकारी स्कूल में कृषि विज्ञान विषय के व्याख्याता के पद पर कार्यरत था। उसकी नियुक्ति भी इसी भर्ती परीक्षा के माध्यम से हुई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी के पास भर्ती के समय आवश्यक शैक्षणिक योग्यता मौजूद नहीं थी, लेकिन उसने आवेदन पत्र में गलत जानकारी दर्ज की और बाद में फर्जी डिग्रियों के माध्यम से अपनी पात्रता साबित करने का प्रयास किया।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने बीएड (2020–22) और एमएससी एग्रीकल्चर (एग्रोनॉमी, 2018–20) की फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां बैक डेट में तैयार करवाई थीं। इन दस्तावेजों के आधार पर ही उसे शिक्षा विभाग में व्याख्याता के पद पर नियुक्ति मिल गई। यह खुलासा इस बात को दर्शाता है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई या फिर किसी स्तर पर मिलीभगत की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। इस दौरान SOG उससे पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, जिसमें विश्वविद्यालय के अधिकारी, दलाल और अन्य अभ्यर्थी भी शामिल हो सकते हैं।

SOG अब इस पूरे रैकेट की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कितने अभ्यर्थियों ने इसी तरह फर्जी डिग्रियों के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की है। साथ ही ओपीजेएस विश्वविद्यालय के उन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जिन पर बैक डेट में डिग्रियां जारी करने का आरोप है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला राज्य के शिक्षा तंत्र के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

इस घटना के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं की गई, तो योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा और सरकारी संस्थानों की साख पर भी असर पड़ेगा। साथ ही यह भी जरूरी हो गया है कि भर्ती प्रक्रियाओं में दस्तावेज सत्यापन की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

सरकार और संबंधित एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना है। SOG ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यदि जांच में बड़े स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है, तो यह मामला राज्य की अन्य भर्तियों की भी जांच का कारण बन सकता है।

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