शोभना शर्मा। नए साल की शुरुआत के साथ ही राजस्थान की सियासत में राज्यसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। वर्ष 2026 में राजस्थान से राज्यसभा के तीन सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है, जिसके चलते अप्रैल या मई 2026 में इन तीन सीटों के लिए चुनाव कराए जाना तय माना जा रहा है। जिन सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें भाजपा के रवनीत सिंह बिट्टू और राजेंद्र गहलोत तथा कांग्रेस के नीरज डांगी शामिल हैं। इन तीनों का कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त होगा।
राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष न हों, लेकिन इनका राजनीतिक महत्व हमेशा खास रहता है। राजस्थान विधानसभा में मौजूदा दलगत स्थिति को देखते हुए यह लगभग तय है कि इन तीन सीटों में से दो पर भाजपा और एक पर कांग्रेस का प्रत्याशी निर्वाचित होगा। विधानसभा में भाजपा के स्पष्ट बहुमत के चलते समीकरण पूरी तरह उसके पक्ष में हैं, जबकि कांग्रेस एक सीट बचाने की स्थिति में है।
जून से पहले होंगे चुनाव
राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव कराना संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे में जून 2026 से पहले यानी अप्रैल या मई में राजस्थान में राज्यसभा चुनाव कराए जाएंगे। निर्वाचन आयोग आमतौर पर समय रहते चुनाव की अधिसूचना जारी करता है, ताकि उच्च सदन में सदस्यों की संख्या में कोई कमी न रहे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव भले ही औपचारिकता जैसे दिखें, लेकिन इनके जरिए पार्टियां अपने संगठनात्मक संतुलन, केंद्रीय नेतृत्व के फैसलों और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश करती हैं।
भाजपा बिट्टू को कर सकती है रिपीट
भाजपा के जिन दो राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें रवनीत सिंह बिट्टू और राजेंद्र गहलोत शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इनमें से रवनीत सिंह बिट्टू को एक बार फिर राज्यसभा भेजे जाने की प्रबल संभावना है। बिट्टू वर्तमान में केंद्र सरकार में रेल राज्यमंत्री के पद पर कार्यरत हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मंत्री पद पर बने रहने के लिए उनका संसद सदस्य होना अनिवार्य है।
ऐसे में भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व बिट्टू को दोबारा राज्यसभा भेजकर उन्हें मंत्रिमंडल में बनाए रखना चाहेगा। अगस्त 2024 में वे राज्यसभा सदस्य बने थे, जब कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा देने पर यह सीट खाली हुई थी। बिट्टू का मौजूदा कार्यकाल भी 21 जून 2026 को समाप्त हो रहा है।
दूसरी सीट को लेकर भाजपा नए चेहरे पर दांव लगा सकती है। पार्टी के पास संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर कई ऐसे नेता हैं, जिन्हें राज्यसभा भेजकर राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका दी जा सकती है। यह भी माना जा रहा है कि भाजपा इस मौके का उपयोग क्षेत्रीय संतुलन या सामाजिक समीकरण साधने के लिए कर सकती है।
कांग्रेस की एक सीट सुरक्षित
कांग्रेस की ओर से नीरज डांगी का कार्यकाल जून 2026 में पूरा हो रहा है। विधानसभा में कांग्रेस की संख्या बल को देखते हुए पार्टी एक ही सीट जीतने की स्थिति में है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व को तय करना होगा कि नीरज डांगी को दोबारा मौका दिया जाए या किसी नए चेहरे को आगे बढ़ाया जाए।
कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर मंथन शुरू होने की संभावना है, क्योंकि राज्यसभा टिकट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न गुटों के बीच संतुलन का विषय रहता है। हालांकि संख्या बल को देखते हुए कांग्रेस के लिए सीट बचाना प्राथमिक लक्ष्य होगा।
राजस्थान में राज्यसभा का मौजूदा गणित
वर्तमान में राजस्थान से राज्यसभा के कुल दस सदस्य हैं। इनमें से पांच भाजपा और पांच कांग्रेस से आते हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्यों में नीरज डांगी, रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक, प्रमोद कुमार और सोनिया गांधी शामिल हैं। वहीं भाजपा की ओर से राजेंद्र गहलोत, रवनीत सिंह बिट्टू, घनश्याम तिवाड़ी, चुन्नीलाल गरासिया और मदन राठौड़ राज्यसभा में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
जून 2020 में हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा के राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस के नीरज डांगी निर्वाचित हुए थे। उस चुनाव में कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल भी राज्यसभा पहुंचे थे, लेकिन बाद में वे लोकसभा के लिए निर्वाचित हो गए। लोकसभा जाने के बाद उन्होंने राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अगस्त 2024 में रवनीत सिंह बिट्टू को राज्यसभा सदस्य चुना गया था।
विधानसभा संख्या बल से तय परिणाम
राजस्थान विधानसभा में वर्तमान में भाजपा की स्पष्ट बहुमत वाली सरकार है। इसी संख्या बल के आधार पर राज्यसभा चुनाव में भी भाजपा को दो सीटें मिलना तय माना जा रहा है। कांग्रेस एक सीट जीतने की स्थिति में रहेगी। किसी तरह के क्रॉस वोटिंग या अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव भले ही शांतिपूर्ण और निर्विरोध जैसे हों, लेकिन टिकट चयन के दौरान पार्टियों के भीतर गहन मंथन होता है। यह चुनाव आगामी लोकसभा और विधानसभा रणनीतियों का भी संकेत देते हैं।
केंद्रीय राजनीति से जुड़ा है फैसला
रवनीत सिंह बिट्टू जैसे नेताओं को दोबारा राज्यसभा भेजने का फैसला केवल राजस्थान की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध केंद्र की राजनीति और मंत्रिमंडल से भी जुड़ा है। वहीं नए चेहरे को राज्यसभा भेजना भाजपा के लिए संगठनात्मक विस्तार और संतुलन का अवसर हो सकता है।


