latest-newsराजसमंदराजस्थान

राजसमंद में शिक्षा चिंतन शिविर: राजस्थान में शिक्षा सुधार की नई राह

राजसमंद में शिक्षा चिंतन शिविर: राजस्थान में शिक्षा सुधार की नई राह

शोभना शर्मा। राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, समावेशी और रोजगारोन्मुखी बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने राजसमंद में दो दिवसीय राज्य स्तरीय शिक्षा चिंतन शिविर का आयोजन किया। शनिवार को संपन्न हुए इस शिविर को शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने राजस्थान की शिक्षा प्रणाली में सुधार और नए अध्याय की शुरुआत करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया। इस शिविर में राज्यभर के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने भाग लिया।

शिविर के दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर स्वयं प्रत्येक सत्र में उपस्थित रहे और सभी सुझावों को गंभीरता से सुना। उनका कहना था कि यह चिंतन शिविर केवल औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि यहाँ से निकले निष्कर्ष आने वाले वर्षों में राजस्थान को शिक्षा के क्षेत्र में देश में अग्रणी स्थान दिलाने में मदद करेंगे।

शिक्षा चिंतन शिविर : शिक्षा में मूल्यों और संस्कारों पर जोर

शिविर का प्रमुख उद्देश्य ऐसी शिक्षा प्रणाली तैयार करना था जिसमें संस्कार, नैतिक मूल्य, सामाजिक सद्भावना और जीवन मूल्यों का समावेश हो। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि शिक्षा का मकसद केवल परीक्षा पास कर लेना या नौकरी पाना नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षा से छात्रों के जीवन में सार्थकता, जिम्मेदारी और सामाजिक समरसता भी विकसित होनी चाहिए। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा, जीवन मूल्यों और संस्कारों को शामिल करने पर विचार-विमर्श हुआ।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और समग्र विकास

शिविर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि इस नीति के जरिए विद्यार्थियों को समग्र विकास का अवसर मिल सकता है। इसके अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा के विस्तार और डिजिटल शिक्षा के समन्वय की रणनीतियाँ भी पेश की गईं। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि बच्चों की मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाई जानी चाहिए। तनाव प्रबंधन, विद्यार्थियों की दिनचर्या और सकारात्मक वातावरण बनाने जैसे विषयों को शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने पर जोर दिया गया।

नामांकन और ड्रॉपआउट दर पर ध्यान

शिविर में विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट दर को कम करने के उपायों पर विशेष ध्यान दिया गया। यह माना गया कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए। साथ ही बालिका शिक्षा और समावेशी शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस नीतियाँ बनाने की बात कही गई। विद्यालयों में सुरक्षित भवन, स्वच्छ और हरित परिसर, पोक्सो मामलों पर जागरूकता और छात्रों के लिए सकारात्मक माहौल तैयार करने जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी शिक्षा

चिंतन शिविर में विशेषज्ञों ने माना कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाना। इसके लिए कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की रणनीतियाँ प्रस्तुत की गईं। शिक्षा मंत्री ने भी कहा कि अब शिक्षा का लक्ष्य केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को ऐसा ज्ञान और कौशल मिलना चाहिए जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।

संस्थागत सुधार और पारदर्शिता

शिक्षा विभाग ने शिविर के दौरान संस्थागत सुधारों पर भी विशेष ध्यान दिया। स्टेट ओपन स्कूल, राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (RSCERT), पाठ्यपुस्तक मण्डल और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) जैसे संस्थानों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए खरीद प्रक्रिया, वित्तीय प्रबंधन और लेखा आक्षेपों के समयबद्ध समाधान जैसे मुद्दों पर गहन मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि इन क्षेत्रों में सुधार से विभाग की कार्यप्रणाली और अधिक कुशल हो सकेगी।

नेताओं और जनप्रतिनिधियों के विचार

राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ ने शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि हर बच्चे में कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है। ऐसे में शिक्षकों और अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की काबिलियत को पहचानें और उचित मार्गदर्शन दें ताकि वे अपनी रुचि के क्षेत्र में सफल करियर बना सकें। वहीं विधायक सुरेंद्र सिंह राठौड़ ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना भी आवश्यक है।

शिक्षा मंत्री का समापन संदेश

शिविर के समापन सत्र में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने सभी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह चिंतन शिविर मूल्य आधारित शिक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यहाँ से मिले सुझाव राजस्थान की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देंगे और आने वाले वर्षों में यह राज्य देशभर में शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस शिविर को भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीकी शिक्षा के समन्वय का अनुपम उदाहरण बताया और विश्वास जताया कि इससे शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading