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ED की बड़ी कार्रवाई: एपेक्सा ग्रुप की 15.97 करोड़ की संपत्ति अटैच

ED की बड़ी कार्रवाई: एपेक्सा ग्रुप की 15.97 करोड़ की संपत्ति अटैच

प्रवर्तन निदेशालय (ED) जयपुर ने राजस्थान में निवेशकों से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के मामले में एपेक्सा ग्रुप के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत 15.97 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। यह कार्रवाई उन आरोपों के आधार पर की गई है, जिनमें एपेक्सा ग्रुप पर करीब 195 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी कर अवैध रूप से धन अर्जित करने का आरोप है।

38 संपत्तियां ईडी के शिकंजे में

ईडी की ओर से की गई इस कार्रवाई में राजस्थान के तीन जिलों में स्थित एपेक्सा ग्रुप से जुड़ी कुल 38 संपत्तियों को अटैच किया गया है। इनमें 37 अचल संपत्तियां और एक चल संपत्ति शामिल है। अचल संपत्तियां मुख्य रूप से कृषि और आवासीय भूमि के रूप में हैं, जो बूंदी, बारां और कोटा जिलों में स्थित हैं।

इन संपत्तियों का संबंध मुरली मनोहर नामदेव, दुर्गा शंकर मेरोठा, अनिल कुमार, गिरिराज नायक, श्रीमती शोभा रानी और अन्य आरोपियों से बताया गया है। इसके अलावा, अटैच की गई चल संपत्ति में एपेक्सा ग्रुप का एक बैंक अकाउंट भी शामिल है, जिसमें करीब 1.50 करोड़ रुपये जमा हैं।

राजस्थान पुलिस की FIR के आधार पर शुरू हुई जांच

ईडी ने यह जांच राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज की गई विभिन्न FIR के आधार पर शुरू की थी। इन एफआईआर में मुरली मनोहर नामदेव और अन्य सहयोगियों के खिलाफ निवेशकों से धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए गए थे।

ईडी की जांच में सामने आया कि एपेक्सा ग्रुप ने 194.76 करोड़ रुपये की भारी रकम बड़ी संख्या में निवेशकों से जुटाई थी। यह राशि विभिन्न निवेश योजनाओं के नाम पर इकट्ठा की गई, जिनमें असामान्य रूप से ऊंचे रिटर्न का लालच दिया गया था।

उच्च रिटर्न के नाम पर रची गई धोखाधड़ी की योजना

ईडी के अनुसार, मुरली मनोहर नामदेव ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जानबूझकर गलत इरादे से एपेक्सा ग्रुप के बैनर तले धोखाधड़ी वाली योजनाएं तैयार कीं। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल भोले-भाले और वित्तीय जानकारी से अनजान लोगों को आकर्षित करना था।

निवेशकों को कम समय में अधिक मुनाफा देने का वादा किया गया, लेकिन इन रिटर्न को समर्थन देने के लिए कोई ठोस व्यावसायिक मॉडल, वैध वित्तीय स्रोत या व्यावहारिक तंत्र मौजूद नहीं था। जांच में यह भी सामने आया कि इतनी कम अवधि में इतना अधिक लाभ कमाना व्यवहारिक रूप से संभव ही नहीं था।

2012 से 2020 तक चलता रहा फंड सर्कुलेशन

ईडी की जांच में यह भी पता चला कि साल 2012 से 2020 के बीच आरोपियों ने निवेशकों को मामूली रिटर्न देकर योजनाओं में बनाए रखा। नए निवेशकों से जुटाए गए फंड का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने में किया गया।

इस तरह फंड के सर्कुलेशन के जरिए लाभदायक कारोबार का भ्रम पैदा किया गया और निवेशकों को दोबारा पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया गया। यह पूरी प्रक्रिया एक सुनियोजित तरीके से की गई, ताकि धोखाधड़ी लंबे समय तक छिपी रहे।

कोरोना काल में खुली पोल

COVID-19 महामारी के दौरान जब बड़ी संख्या में निवेशकों ने अपने निवेश और रिटर्न की वापसी की मांग की, तब एपेक्सा ग्रुप की असल स्थिति सामने आई। ग्रुप निवेशकों की मांगों को पूरा करने में पूरी तरह असमर्थ रहा।

यहीं से निवेशकों को यह अहसास हुआ कि वे एक सुनियोजित धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं। ईडी की जांच में भी यह सामने आया कि एपेक्सा ग्रुप की योजनाएं शुरू से ही विफल थीं और इन्हें जानबूझकर धोखाधड़ी के इरादे से चलाया जा रहा था।

फंड का इस्तेमाल प्रॉपर्टी और निजी फायदे के लिए

ईडी के अनुसार, निवेशकों से इकट्ठा किए गए फंड का इस्तेमाल उन्हें वास्तविक रिटर्न देने के बजाय अचल संपत्तियां खरीदने और नए बिजनेस वेंचर शुरू करने में किया गया। इन निवेशों का मकसद ग्रुप के कारोबार को मजबूत करना नहीं, बल्कि आरोपियों और उनके सहयोगियों की निजी वित्तीय महत्वाकांक्षाओं को पूरा करना था।

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि निवेशकों के हितों की सुरक्षा या उनके पैसे की वापसी को लेकर कोई गंभीर योजना नहीं बनाई गई थी।

आगे भी जारी रहेगी जांच

प्रवर्तन निदेशालय ने साफ किया है कि एपेक्सा ग्रुप मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच अभी जारी है। अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों की पहचान की जा रही है और आने वाले समय में और भी संपत्तियों पर कार्रवाई की जा सकती है।

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