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DRDO गेस्ट हाउस मैनेजर पाकिस्तान के लिए जासूसी के शक में गिरफ्तार

DRDO गेस्ट हाउस मैनेजर पाकिस्तान के लिए जासूसी के शक में गिरफ्तार

मनीषा शर्मा। राजस्थान के जैसलमेर स्थित DRDO गेस्ट हाउस में तैनात मैनेजर महेंद्र प्रसाद को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के संदेह में गिरफ्तार किया गया है। अब उसे जयपुर लाकर CIC (सेंट्रल इंटेरोगेशन कमेटी) द्वारा गहन पूछताछ की जा रही है। महेंद्र पर आरोप है कि उसने बीते पांच वर्षों से पाकिस्तानी खुफिया एजेंट के संपर्क में रहकर सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारियाँ लीक कीं।

गिरफ्तारी के बाद जयपुर भेजा गया आरोपी

महेंद्र प्रसाद को सुरक्षा एजेंसियों ने 4 अगस्त की रात जैसलमेर से गिरफ्तार किया था। शुरुआती पूछताछ में वह कुछ खास जानकारी नहीं दे सका, जिससे असंतुष्ट होकर एजेंसियां उसे जयपुर लेकर रवाना हुईं। यहाँ अब फोरेंसिक जांच के साथ दोनों मोबाइल फोनों की गहन पड़ताल की जा रही है। पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे ने बताया कि आरोपी से CIC स्तर पर संयुक्त पूछताछ होगी, जिसमें राज्य व केंद्रीय खुफिया एजेंसियां भी शामिल होंगी।

पांच साल से पाक एजेंट के संपर्क में था महेंद्र

सुरक्षा एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार महेंद्र वर्ष 2020 से एक पाकिस्तानी एजेंट के संपर्क में था। इस एजेंट ने खुद को फर्जी DRDO अधिकारी बताकर महेंद्र का विश्वास जीता। उसे कॉल भारतीय मोबाइल नंबर से किए गए और ट्रू कॉलर पर भी प्रोफाइल “DRDO Official” के नाम से सेव थी, जिससे महेंद्र धोखा खा गया।

DRDO अधिकारियों को हुआ शक, ऐसे हुआ पर्दाफाश

हाल ही में जब महेंद्र ने गेस्ट हाउस में ठहरने वाले मेहमानों की सूची विशेष रूप से मंगवाई, तो DRDO स्टाफ को शक हुआ। उन्होंने इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी, जिसके बाद गहन जांच में महेंद्र की गतिविधियाँ संदिग्ध पाई गईं। इसी आधार पर एजेंसियों ने उसे गिरफ्तार किया।

सेना से जुड़ी जानकारी भेजने के आरोप

महेंद्र पर यह भी आरोप है कि उसने DRDO और सेना की कई संवेदनशील जानकारियाँ पाक एजेंट को साझा कीं। इनमें फायरिंग रेंज से जुड़ी गतिविधियाँ, सैन्य वाहनों की आवाजाही और ठहरने वाले अधिकारियों की जानकारी शामिल हो सकती है। पुलिस सूत्रों के अनुसार जब महेंद्र से पूछताछ हुई तो उसने कबूल किया कि वह पाक एजेंट से एक बार संपर्क में आया था।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी हुआ था संपर्क

सूत्रों का कहना है कि महेंद्र से “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान भी पाकिस्तानी एजेंट ने संपर्क किया था। वह स्वयं को DRDO का वरिष्ठ अधिकारी बताता था और महेंद्र से समय-समय पर गोपनीय सूचनाएं जुटाता था। अब जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि महेंद्र ने कितनी बार और कौन-कौन सी जानकारियाँ साझा कीं।

फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए मोबाइल फोन

महेंद्र के पास से बरामद दोनों मोबाइल फोन अब फोरेंसिक प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। इनकी कॉल डिटेल्स, चैट हिस्ट्री, सोशल मीडिया एक्सेस और अन्य डेटा को खंगाला जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि उसके मोबाइल में ऐसे डेटा या ऐप हो सकते हैं जिनसे गोपनीय सूचनाएं साझा की गई हों।

CIC द्वारा होगी संयुक्त पूछताछ

महेंद्र से अब जयपुर स्थित CIC (सेंट्रल इंटेरोगेशन कमेटी) द्वारा संयुक्त पूछताछ की जा रही है। इसमें IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो), मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI), RAW, NIA जैसी एजेंसियों के अधिकारी भी शामिल हैं। इस प्रक्रिया के जरिए यह जानने की कोशिश की जा रही है कि महेंद्र किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था या नहीं।

गेस्ट हाउस जैसे संवेदनशील स्थान पर कैसे हुई नियुक्ति?

अब एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी संवेदनशील जगह – DRDO गेस्ट हाउस – में महेंद्र जैसे व्यक्ति की नियुक्ति कैसे हुई, जो बाद में जासूसी के आरोप में फंसा? इस पर भी आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। एजेंसियां उसकी भर्ती प्रक्रिया, रेफरेंस और कार्यप्रणाली की समीक्षा कर रही हैं।

आगे की कार्रवाई

जैसलमेर में दो दिन की पूछताछ में महेंद्र से कुछ खास जानकारी नहीं मिल सकी। इसलिए अब जयपुर में उसे लंबी पूछताछ के दायरे में रखा जाएगा। यदि फोरेंसिक जांच और तकनीकी विश्लेषण से आरोपों की पुष्टि होती है, तो आधिकारिक राजद्रोह और जासूसी अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई संभव है।

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