शिक्षा, साहस और संकल्प का अद्वितीय संगम हैं डॉ. ज़िया ज़हरा ज़ैदी। प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान जितना गहन है, उतना ही प्रेरक है उनका जीवन संघर्ष। एक ओर जहाँ वे विद्यार्थियों के लिए ज्ञान का स्रोत बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने निजी जीवन में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ते हुए आत्मबल का अनुपम उदाहरण पेश किया है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और प्रोफेशनल करियर
डॉ. ज़ैदी ने श्री वेंकटेश्वरा विश्वविद्यालय से प्रबंधन में पीएच.डी., एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा से इंटरनेशनल बिजनेस और मार्केटिंग में MBA, और बायोटेक्नोलॉजी में बी.टेक की डिग्री हासिल की है। इस बहुआयामी शिक्षा ने उन्हें एक सशक्त और विविध ज्ञान वाली शिक्षिका के रूप में स्थापित किया। फरवरी 2024 से वे GNIOT इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड स्टडीज, ग्रेटर नोएडा में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। इससे पूर्व वे ABES इंजीनियरिंग कॉलेज, गाज़ियाबाद और MGM कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, नोएडा में एक दशक से अधिक समय तक अध्यापन कर चुकी हैं।
कठिनाइयों में हौसले की मिसाल
2023 में जब डॉ. ज़ैदी को कैंसर का पता चला, तब भी उन्होंने अपने शैक्षणिक दायित्वों से मुँह नहीं मोड़ा। बीमारी की कठिन घड़ी में भी वे अपने छात्रों की मार्गदर्शक बनी रहीं। उनके इस हौसले के पीछे उनका परिवार हमेशा एक मजबूत सहारा बना रहा।
जीवन के मूल मंत्र और नेतृत्व दर्शन
डॉ. ज़ैदी का मानना है कि आज के दौर में प्रबंधन में सफलता पाने के लिए सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और लगातार सीखते रहने की जिज्ञासा बेहद जरूरी है। वे कहती हैं, “जहाँ चाह वहाँ राह”—यह उनका जीवन मंत्र है। वे न सिर्फ अपने छात्रों को पढ़ाती हैं, बल्कि उन्हें व्यवहारिक जीवन की सच्चाइयों के लिए भी तैयार करती हैं।
चुनौतियों से सीखने की आदत
वे बताती हैं कि करियर और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं रहा, लेकिन समय का नियोजन, प्राथमिकताएँ तय करना और “ना” कहना सीखकर उन्होंने इस चुनौती को पार किया। साथ ही तकनीकी प्रगति के साथ बने रहने के लिए वे नियमित रूप से ऑनलाइन कोर्स करती हैं, वर्कशॉप में भाग लेती हैं और नवीनतम शोध पढ़ती रहती हैं।
समाज को प्रेरणा देती शिक्षिका
आज डॉ. ज़िया ज़हरा ज़ैदी सिर्फ एक प्रोफेसर नहीं, बल्कि एक रोल मॉडल हैं—उन छात्रों और पेशेवरों के लिए जो जीवन की कठिनाइयों से हार मानने लगते हैं। उनका विश्वास है कि मुस्कान सिर्फ एक भाव नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर सकारात्मकता का माहौल बनाने का जरिया है।
डॉ. ज़ैदी की कहानी बताती है कि सच्चे नेतृत्व की पहचान सिर्फ डिग्रियों से नहीं, बल्कि जीवन के उतार-चढ़ाव में संतुलन बनाए रखने की क्षमता से होती है। वे आज की नारी शक्ति की एक जीवंत मिसाल हैं—जो सिखाती हैं कि जज़्बा हो तो रास्ते अपने आप बनते जाते हैं।