जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम सामने आया है, जिसने चिकित्सा जगत में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। किडनी कांड का खुलासा करने वाले वरिष्ठ न्यूरोसर्जन और पूर्व अस्पताल अधीक्षक डॉ. अचल शर्मा ने अपने निर्धारित रिटायरमेंट से तीन वर्ष पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली है। सरकार द्वारा उनके VRS आवेदन को मंजूरी मिलने के साथ ही यह मामला न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि मेडिकल समुदाय में भी गूंजने लगा है।
डॉ. अचल शर्मा की पहचान जयपुर ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान में एक प्रतिष्ठित न्यूरोसर्जन के रूप में रही है। उन्होंने SMS हॉस्पिटल में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं और न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रमुख के रूप में भी कार्य किया। इसके अलावा वे अस्पताल अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर भी रह चुके हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई जटिल न्यूरोसर्जरी मामलों को सफलतापूर्वक संभाला और चिकित्सा क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
हालांकि, उनकी पहचान केवल एक कुशल डॉक्टर तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश कर अपनी ईमानदारी और साहस का भी परिचय दिया। अधीक्षक रहते हुए उन्होंने सरकार और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को किडनी कांड की शिकायत की थी। इस शिकायत के बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई और धीरे-धीरे यह मामला सार्वजनिक हुआ। इस खुलासे ने राज्य के चिकित्सा तंत्र में कई सवाल खड़े कर दिए थे और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई थी।
किडनी कांड सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव भी देखने को मिले। इसी दौरान सरकार ने डॉ. अचल शर्मा को अधीक्षक पद से हटा दिया था, जिससे यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया। हालांकि, इसके बावजूद वे अपने विभाग में वरिष्ठ चिकित्सक के रूप में सेवाएं देते रहे।
डॉ. शर्मा ने कुछ महीनों पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था। उस समय से ही उनके आवेदन पर निर्णय का इंतजार किया जा रहा था। अब सरकार द्वारा इस आवेदन को मंजूरी दिए जाने के बाद उनके सेवा काल का समापन अपेक्षा से पहले हो गया है। गौरतलब है कि वे वर्ष 2029 में नियमित रूप से सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन उन्होंने उससे तीन वर्ष पहले ही सेवा छोड़ने का निर्णय लिया।
उनके इस फैसले के पीछे के कारणों को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, आधिकारिक रूप से इस बारे में कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि प्रशासनिक दबाव, कार्य परिस्थितियां या व्यक्तिगत कारण इस निर्णय के पीछे हो सकते हैं। चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इतने अनुभवी डॉक्टर का अचानक VRS लेना स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक बड़ा नुकसान हो सकता है।
डॉ. अचल शर्मा के VRS के बाद SMS मेडिकल कॉलेज में वरिष्ठ न्यूरोसर्जन की कमी महसूस की जाएगी। यह स्थिति प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण बन सकती है, क्योंकि इस स्तर के विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता पहले से ही सीमित है। ऐसे में मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी होंगी।
सूत्रों के अनुसार, इस खाली पद को भरने के लिए प्रशासन डॉ. मनीष अग्रवाल को वापस SMS मेडिकल कॉलेज में लाने की सिफारिश कर सकता है। डॉ. अग्रवाल को पिछले वर्ष एक रिश्वत कांड के चलते निलंबित किया गया था और उनका मुख्यालय जोधपुर निर्धारित किया गया था। यदि उन्हें दोबारा जयपुर लाया जाता है, तो यह निर्णय भी चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि इससे जुड़े कई प्रशासनिक और नैतिक पहलू सामने आएंगे।
इस बीच यह भी उल्लेखनीय है कि SMS हॉस्पिटल में VRS लेने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई वरिष्ठ डॉक्टर स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके हैं, जबकि कुछ अन्य डॉक्टरों के आवेदन अभी लंबित हैं। इनमें नेफ्रोलॉजी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. विनय मल्होत्रा और पूर्व अधीक्षक डॉ. सुशील भाटी जैसे नाम शामिल हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि अस्पताल के भीतर कुछ ऐसी परिस्थितियां हैं, जो वरिष्ठ चिकित्सकों को समय से पहले सेवा छोड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
डॉ. अचल शर्मा के जाने से न केवल एक अनुभवी चिकित्सक की कमी महसूस होगी, बल्कि एक ऐसे अधिकारी का भी अभाव होगा, जिसने सिस्टम के भीतर रहते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का साहस दिखाया। उनका यह कदम भविष्य में स्वास्थ्य प्रशासन और नीति-निर्माताओं के लिए भी कई सवाल छोड़ जाता है।


