राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का सीकर दौरा एक बार फिर राजस्थान की जल-राजनीति को चर्चा में लेकर आ गया। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने राजस्थान और हरियाणा के बीच हुए यमुना जल समझौते (MOU) की विश्वसनीयता और उपयोगिता पर बड़े सवाल उठाए। डोटासरा ने दावा किया कि वर्तमान समझौता राजस्थान विशेषकर शेखावाटी क्षेत्र के हित में नहीं है और ढाई साल में यहां की जनता को एक बूंद भी पानी नहीं मिलने वाला है।
‘हरियाणा की पूर्ति पहले, राजस्थान को केवल ओवरफ्लो पानी’
डोटासरा ने एमओयू की शर्तों पर सवाल उठाते हुए कहा कि समझौते के अनुसार पहले हरियाणा की जल आवश्यकता पूरी की जाएगी। उसके बाद दिसंबर से मई के बीच यदि बरसाती पानी ओवरफ्लो होकर अतिरिक्त बचेगा, तो वही पानी राजस्थान को दिया जा सकेगा। उनके अनुसार— “यह समझौता राजस्थान को कोई लाभ नहीं देता। शेखावाटी को ढाई साल में एक बूंद पानी नहीं मिलने वाला है। सरकार सिर्फ जनता को भ्रमित करने का काम कर रही है।” डोटासरा का आरोप है कि समझौते को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करके भाजपा सरकार जनता को यह विश्वास दिला रही है कि जल्द ही यमुना का पानी राजस्थान पहुंचेगा, जबकि वास्तविकता बिल्कुल अलग है।
डीपीआर का अभाव और बजट की कमी पर सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने परियोजना की ग्राउंड प्रगति पर गंभीर प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि— “आज तक न तो कोई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हुई है और न ही राजस्थान के लिए एक रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है।” उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि पानी लाने की पिछली योजनाएँ भी वर्षों से लंबित पड़ी हैं। उनका उदाहरण देते हुए कहा गया—
2011 में लक्ष्मणगढ़ के लिए इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत 833 करोड़ की योजना शुरू हुई थी।
लेकिन 15 वर्षों में भी यह योजना पूरी नहीं हो सकी। डोटासरा ने भाजपा पर आरोप लगाया कि केवल घोषणाएँ करना और बड़ी बातें बोलना सरकार की आदत बन चुकी है, लेकिन धरातल पर काम नगण्य है।
केंद्र के बजट में भी राजस्थान को निराशा—डोटासरा
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्रीय बजट पर भी हमला बोला। उनका कहना है कि— “केंद्र सरकार ने राजस्थान के लिए बजट में एक रुपये का भी प्रावधान नहीं किया। जब कोई आर्थिक सहायता ही नहीं है, तो यमुना जल परियोजना को धरातल पर कैसे उतारा जाएगा?” उन्होंने कहा कि अब 11 फरवरी को राज्य का बजट आने वाला है, तभी स्पष्ट होगा कि राजस्थान सरकार वास्तविक स्थिति में इस परियोजना के लिए कितना धन आवंटित करती है।
कोचिंग रेगुलेशन बिल पर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया
जल-राजनीति के साथ-साथ डोटासरा ने कोचिंग नियंत्रण बिल पर भी भाजपा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि—
सरकार ने कोचिंग उद्योग को नियंत्रित करने के लिए बिल पास किया,
लेकिन छह महीने से ज्यादा समय बीतने के बावजूद कोई नियम या कार्य-प्रणाली तैयार नहीं की गई,
बिल आज भी प्रभावहीन है। डोटासरा ने कहा कि सरकार कोचिंग माफियाओं के दबाव में काम कर रही है और भ्रष्टाचार इस क्षेत्र में जारी है। उन्होंने कहा— “मंशा ठीक हो तो छह महीने समय बहुत होता है। लेकिन सरकार की नीयत ही साफ नहीं है, इसलिए बिल का प्रभाव जमीन पर नहीं दिख रहा।”
राजनीतिक पृष्ठभूमि: शेखावाटी की प्यास, जल राजनीति का विस्तार
शेखावाटी क्षेत्र—सीकर, झुंझुनूं और चूरू—वर्षों से पानी की भारी किल्लत झेल रहा है। यमुना जल लाने का सपना क्षेत्रवासियों के लिए नई उम्मीद लेकर आया था, लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार इसे केवल चुनावी वादा बनाए हुए है। डोटासरा का बयान इस संदर्भ में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पानी का मुद्दा शेखावाटी की राजनीति को सीधे प्रभावित करता है। कांग्रेस इसे अगला बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने की तैयारी में दिख रही है।
एमओयू की पारदर्शिता और व्यवहारिकता पर प्रश्न
एमओयू को लेकर मुख्य आरोप यह है कि—
यह राजस्थान के लिए लाभकारी नहीं,
राजस्थान को केवल अतिरिक्त ओवरफ्लो पानी ही मिलेगा,
हरियाणा की प्राथमिकता पहले तय की गई है,
कोई तकनीकी या वित्तीय ब्लूप्रिंट अभी तक मौजूद नहीं है।
कांग्रेस का कहना है कि जब तक डीपीआर, बजट और निर्माण समय-सीमा तय नहीं होती, तब तक समझौते के दावे सिर्फ दिखावे मात्र हैं।
बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव
डोटासरा के इस बयान ने यमुना जल समझौते को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जहां भाजपा सरकार इसे बड़ी उपलब्धि बताती है, वहीं कांग्रेस इसे शेखावाटी के साथ धोखा करार दे रही है। राजस्थान का आगामी बजट और सरकार की इस परियोजना पर वास्तविक प्रगति आने वाले दिनों में तय करेगी कि यह विवाद राजनीतिक बहस तक सीमित रहता है या प्रदेश की जल-नीति पर बड़ा प्रभाव डालता है।


