राजस्थान विधानसभा में पंचायती राज (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि आखिर पंचायती राज कानून में दो बच्चों से संबंधित प्रावधान को हटाने की जरूरत क्यों महसूस की गई। डोटासरा ने कहा कि इस कानून को हटाने के पीछे सरकार का कोई स्पष्ट विजन दिखाई नहीं देता और यह निर्णय केवल कुछ जनप्रतिनिधियों के दबाव में लिया गया प्रतीत होता है।
डोटासरा ने अपने भाषण में कहा कि वर्ष 1990 में दो बच्चों से अधिक संतान वाले व्यक्तियों को पंचायती राज चुनाव लड़ने से रोकने वाला प्रावधान जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से लागू किया गया था। उस समय यह कानून भाजपा की ही सरकार द्वारा लागू किया गया था। ऐसे में अब भाजपा सरकार ही इसे समाप्त करने की दिशा में कदम क्यों उठा रही है, यह सवाल उठना स्वाभाविक है।
जनसंख्या नियंत्रण पर सरकार की नीति पर सवाल
डोटासरा ने विधानसभा में कहा कि देश में जनसंख्या नियंत्रण अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार यह मानती है कि देश में जनसंख्या नियंत्रण पूरी तरह से हो चुका है या केंद्र सरकार ने अपनी नीति बदल दी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से ऐसी कोई नई नीति सामने नहीं आई है जिससे यह संकेत मिले कि जनसंख्या नियंत्रण अब प्राथमिकता नहीं रहा।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी जनसंख्या नियंत्रण को लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं है। ऐसे में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में दो बच्चों की शर्त को हटाना सरकार की नीति और सोच पर सवाल खड़े करता है। डोटासरा ने कहा कि यदि सरकार इस प्रावधान को समाप्त करना चाहती है तो उसे विधानसभा और प्रदेश की जनता के सामने स्पष्ट कारण बताने चाहिए।
बिना विजन के फैसले लेने का आरोप
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार बिना किसी दीर्घकालिक योजना या स्पष्ट नीति के कानूनों में बदलाव कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार केवल कुछ राजनीतिक दबावों के कारण इस प्रकार के संशोधन ला रही है। डोटासरा ने कहा कि राज्य में डबल इंजन सरकार होने का दावा किया जाता है, लेकिन वास्तविकता यह है कि एक इंजन विदेशों में व्यस्त है और राज्य सरकार यहां बिना ठोस नीति के फैसले ले रही है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या विदेश यात्राओं के दौरान कोई नया कानून बनाकर लाया गया है या फिर केवल राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे फैसले किए जा रहे हैं। डोटासरा ने कहा कि सरकार की यह पहल वोट बैंक की राजनीति और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश है, जिसका कांग्रेस पार्टी विरोध करती है।
पंचायती राज मंत्री पर भी साधा निशाना
डोटासरा ने अपने संबोधन के दौरान पंचायती राज मंत्री पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मंत्री अक्सर अपने फैसलों को लेकर यू-टर्न लेने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि सिविल लाइंस से विधानसभा तक पहुंचने में उन्हें एक घंटा लग जाता है, ऐसे में सरकार को इस कानून के पीछे अपनी मंशा स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस सरकार ने कभी दो बच्चों का कानून लागू किया था, वही अब उसे समाप्त करने जा रही है। यह बदलाव बिना ठोस तर्क और नीति के किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
पंचायत चुनाव टालने का आरोप
विधानसभा में बोलते हुए डोटासरा ने राज्य सरकार पर पंचायत चुनाव टालने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की बात करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि अभी तक पंचायत चुनाव ही नहीं कराए गए हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर पंचायत चुनाव कब कराए जाएंगे और इसके लिए स्पष्ट समयसीमा क्यों नहीं बताई जा रही है।
परिसीमन प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
डोटासरा ने पंचायती राज संस्थाओं के परिसीमन की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन के दौरान बेईमानी और धांधली की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी क्षेत्र के साथ अन्याय न हो।
अपने संबोधन के अंत में डोटासरा ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगते हुए कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद हैं। ऐसे में सरकार को जल्द से जल्द चुनाव की घोषणा करनी चाहिए और जनता के सामने अपनी नीति और निर्णयों का स्पष्ट कारण भी रखना चाहिए।


