मनीषा शर्मा। राजस्थान की नौकरशाही में हाल ही में एक बड़ा फैसला हुआ है। केंद्र सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की 2022 चयन सूची से राजस्थान कैडर के लिए चार नए अधिकारियों की नियुक्ति की है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की ओर से 8 अगस्त को जारी अधिसूचना के अनुसार इन अधिकारियों को अन्य सेवाओं से चयनित कर प्रोबेशन अवधि पर IAS में शामिल किया गया है। जिन चार नामों की घोषणा की गई है, उनमें डॉ. नीतीश शर्मा, अमिता शर्मा, नरेंद्र कुमार मंघानी और नरेश कुमार गोयल शामिल हैं।
यह नियुक्तियां इसलिए चर्चा का विषय बन गई हैं क्योंकि सभी चयनित अधिकारी सामान्य वर्ग (General Category) से आते हैं। ऐसे में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस पूरी चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डोटासरा का भाजपा पर सीधा हमला
डोटासरा ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अति पिछड़ा वर्ग (MBC) और अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारियों को चयन में कोई स्थान न मिलना, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की जातिवादी मानसिकता को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल एक वर्ग विशेष के पक्ष में दिखाई देता है और राज्य की वास्तविक सामाजिक संरचना का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजस्थान जैसे विविधतापूर्ण राज्य में, जहां आबादी का बड़ा हिस्सा SC, ST, OBC, MBC और अल्पसंख्यक समुदायों से आता है, वहां IAS जैसी शीर्ष सेवा में सभी वर्गों को समान अवसर मिलना चाहिए।
सोशल मीडिया पर डोटासरा का बयान
गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर भी इस विषय पर कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने लिखा कि भाजपा सरकार की जवाबदेही पूरे समाज के प्रति नहीं रह गई है, बल्कि यह केवल एक विशेष वर्ग तक सीमित हो चुकी है।
उन्होंने यह भी कहा कि यही कारण है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार जातिगत जनगणना (Caste Census) की मांग कर रहे हैं। डोटासरा के अनुसार, जातिगत जनगणना से ही यह स्पष्ट होगा कि किस वर्ग की आबादी कितनी है और उसी अनुपात में उन्हें प्रशासनिक व राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
राजनीतिक गरमाहट और जातिगत समीकरण
यह मामला महज चार अधिकारियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की राजनीति में जातिगत संतुलन और प्रतिनिधित्व को लेकर उठते बड़े सवालों से जुड़ गया है। राजस्थान हमेशा से ही जातिगत समीकरणों के आधार पर राजनीतिक निर्णयों और प्रशासनिक नियुक्तियों के लिए चर्चित रहा है। ऐसे में एक भी अधिकारी का SC, ST, OBC या अल्पसंख्यक वर्ग से चयनित न होना, निश्चित ही आने वाले समय में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
डोटासरा ने भाजपा पर यह आरोप लगाकर यह संकेत दे दिया है कि कांग्रेस आने वाले विधानसभा चुनावों और राजनीतिक अभियानों में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगी। कांग्रेस इस तर्क को जनता के बीच ले जाने की कोशिश करेगी कि भाजपा सरकार सामाजिक न्याय और समान अवसर के सिद्धांत पर खरा नहीं उतर रही है।
शक्ति और प्रतिनिधित्व का सवाल
IAS जैसी प्रतिष्ठित सेवा न केवल प्रशासनिक ढांचे की रीढ़ होती है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग के लिए शक्ति और प्रतिनिधित्व का प्रतीक भी है। अगर चयन प्रक्रिया में केवल एक ही वर्ग को प्राथमिकता मिलती है, तो यह न केवल संवैधानिक मूल्यों पर सवाल खड़ा करता है बल्कि सामाजिक न्याय की भावना को भी आहत करता है।


