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RTI कानून के 20 साल पूरे, डोटासरा ने केंद्र पर लगाया ‘सूचना अधिकार’ कमजोर करने का आरोप

RTI कानून के 20 साल पूरे, डोटासरा ने केंद्र पर लगाया ‘सूचना अधिकार’ कमजोर करने का आरोप

शोभना शर्मा। जयपुर में शनिवार को कांग्रेस कार्यालय में सूचना का अधिकार (RTI) कानून के लागू होने के 20 वर्ष पूरे होने पर एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र सरकार पर आरटीआई कानून को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया। डोटासरा ने कहा कि 12 नवंबर 2005 को जब यूपीए सरकार सत्ता में थी, तब देश को सूचना का अधिकार कानून मिला था। इस कानून ने भारत के हर नागरिक को सरकारी कामकाज, निर्णय और फंड से जुड़ी सूचनाएं प्राप्त करने का संवैधानिक अधिकार दिया।

डोटासरा बोले — “केंद्र सरकार ने RTI की आत्मा को कमजोर किया”

गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि पिछले कुछ वर्षों में केंद्र की बीजेपी सरकार ने आरटीआई कानून की आत्मा को कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा — “जब यूपीए सरकार ने यह कानून बनाया था, तब इसका मकसद पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना था। लेकिन आज हालात ये हैं कि आरटीआई कार्यकर्ता डर के माहौल में जी रहे हैं और कई मामलों में उन्हें जवाब तक नहीं मिलता।” डोटासरा ने दावा किया कि वर्तमान केंद्र सरकार सूचना देने की प्रक्रिया को जटिल बना रही है और इससे आम जनता का अधिकार सीमित हो रहा है।

“यूपीए सरकार ने आम आदमी को अधिकार दिए” — डोटासरा

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आगे कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में सिर्फ आरटीआई ही नहीं, बल्कि कई ऐसे जनहितकारी कानून बने जिन्होंने भारत के लोकतंत्र को मजबूत किया। उन्होंने कहा — “मनरेगा, शिक्षा का अधिकार, भूमि अधिग्रहण कानून और खाद्य सुरक्षा गारंटी अधिनियम — ये चारों कानून गरीब और आम आदमी की जिंदगी में बदलाव लाए।” डोटासरा ने कहा कि इन कानूनों ने देश के हर नागरिक को रोज़गार, शिक्षा, भोजन और जमीन के अधिकार की गारंटी दी, जबकि आज इन योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है।

टीकाराम जूली का तंज — “सतीश पूनिया के मंच पर चल रहा था सांप-सीढ़ी का खेल”

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी एक अलग मुद्दे पर टिप्पणी की। उन्होंने भाजपा नेता सतीश पूनिया के पुस्तक विमोचन कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि वे वहां विपक्ष के नेता के तौर पर आमंत्रित थे, लेकिन कार्यक्रम में “अजीब माहौल” देखने को मिला। जूली ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा — “वहां तो मंच पर अलग ही खेल चल रहा था — कौन किसे निगल जाएगा, ये देखने लायक था। आधे मंच का मुझे समर्थन मिल गया, बाकी आधा सांप-सीढ़ी में उलझा था।” जूली के इस बयान ने उपस्थित पत्रकारों में हलचल पैदा कर दी, क्योंकि उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा के अंदरूनी मतभेदों की ओर इशारा किया।

अमित शाह के दौरे पर डोटासरा का तंज — “दिवाली से पहले पर्ची बदल जाएगी”

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के राजस्थान दौरे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा — “हम तो पहले ही कह रहे थे कि दिवाली से पहले बीजेपी में पर्ची बदल जाएगी। अमित शाह जी के दौरे के बाद संगठन और सरकार, दोनों में बड़ा बदलाव संभव है।” डोटासरा ने दावा किया कि भाजपा के भीतर इस समय नेतृत्व संकट और गुटबाजी चरम पर है। उन्होंने कहा कि “जहां कांग्रेस जनता के बीच जाकर मुद्दों की बात कर रही है, वहीं भाजपा सत्ता और पद की लड़ाई में उलझी हुई है।”

RTI की अहमियत और कांग्रेस का संदेश

आरटीआई कानून की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर कांग्रेस नेताओं ने इस कानून की ऐतिहासिक भूमिका पर भी प्रकाश डाला। डोटासरा ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून भारत में लोकतंत्र की पारदर्शिता का आधार है। उन्होंने कहा — “अगर सरकारें जवाबदेह हैं, तो इसका श्रेय आरटीआई कानून को जाता है। यूपीए सरकार ने यह कानून बनाकर जनता को सशक्त किया था, और आज कांग्रेस फिर से उसी भावना को दोहराना चाहती है।” टीकाराम जूली ने कहा कि आरटीआई ने देश में जनता को सरकार के बराबर बैठने का साहस दिया, लेकिन केंद्र सरकार इसे खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है।

कांग्रेस का संगठनात्मक संदेश भी छिपा था प्रेस कॉन्फ्रेंस में

कांग्रेस कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान डोटासरा और जूली की मौजूदगी ने यह संकेत भी दिया कि राजस्थान कांग्रेस अब संगठन को मजबूत करने और जनहित मुद्दों पर केंद्रित राजनीति करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी आने वाले महीनों में आरटीआई और जनहित कानूनों के पक्ष में राज्यभर में जनसंवाद कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य जनता को यह बताना है कि यूपीए सरकार के दौरान बने कानूनों ने कैसे आम लोगों का जीवन बदला।

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