मनीषा शर्मा। पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के फंड वितरण में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ विवाद अब न्यायालय तक पहुंच गया है। शिव विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने जिला प्रशासन पर फंड वितरण में भेदभाव और पारदर्शिता की कमी के गंभीर आरोप लगाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
जस्टिस बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बाड़मेर जिला प्रशासन को नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि फंड आवंटन की पूरी प्रक्रिया का ब्यौरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
खनिज क्षेत्र के विकास फंड पर सवाल
यह विवाद बाड़मेर जैसे खनिज संसाधनों से भरपूर जिले में विकास कार्यों के लिए बने डीएमएफटी फंड के वितरण से जुड़ा है। इस फंड का उद्देश्य खनन से प्रभावित गांवों और क्षेत्रों के विकास के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा एकत्रित किया गया यह फंड शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़कों और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों में खर्च किया जाना तय है।
विधायक रविंद्र भाटी का आरोप है कि शिव विधानसभा क्षेत्र के हिस्से का फंड अनुचित रूप से घटाया गया और उसे गैर-खनन (नॉन-माइनिंग) इलाकों में ट्रांसफर कर दिया गया। उनका कहना है कि यह स्थानीय जनता के अधिकारों का उल्लंघन है। भाटी ने इसे “जनता के हक की चोरी” बताते हुए कहा, “अगर प्रशासन ने जनता के हिस्से का फंड छीना है, तो न्यायालय में जाना मेरा कर्तव्य था। अब अदालत ही जनता को न्याय दिलाएगी।”
DMFT मीटिंग में 103 करोड़ की स्वीकृति
बाड़मेर जिला प्रशासन ने हाल ही में डीएमएफटी की बैठक में कुल 103 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी थी। इन फंड्स को चार विधानसभा क्षेत्रों के बीच बांटा गया।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 65 करोड़ रुपये बाड़मेर विधानसभा को मिले हैं। वहीं शिव को 18 करोड़, गुड़ामालनी को 15 करोड़ और चौहटन को 5 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
विधायक भाटी का कहना है कि यह आवंटन असमान है और शिव क्षेत्र के खनन योगदान की तुलना में फंड बेहद कम दिया गया। उन्होंने जिला कलेक्टर से इस कटौती का कारण पूछा, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसीलिए उन्होंने न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
भाटी का कहना है कि डीएमएफटी फंड का उपयोग पूर्ण पारदर्शिता के साथ होना चाहिए, ताकि खनन प्रभावित गांवों को सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि शिव क्षेत्र में कई खनिज पट्टे जारी हैं और खनन से होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा यहां के विकास कार्यों पर खर्च होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने फंड वितरण में स्थानीय हितों की अनदेखी की है और कुछ क्षेत्रों को अनुचित रूप से अधिक फंड आवंटित किए हैं। भाटी ने अदालत से इस फंड के सही उपयोग और वितरण की निगरानी की भी मांग की है।
हाईकोर्ट का रुख और आगे की प्रक्रिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में जिला प्रशासन को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि प्रशासन को यह बताना होगा कि डीएमएफटी फंड का वितरण किन मानदंडों के आधार पर किया गया और क्या खनन प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई थी या नहीं।


