राजस्थान की राजनीति में एक नया अध्याय उस समय जुड़ गया जब विधानसभा ने डिस्टर्ब एरिया प्रोटक्शन बिल को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस बिल के पारित होते ही प्रदेश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। जहां भारतीय जनता पार्टी इस कानून को सामाजिक संतुलन और सुरक्षा के लिए जरूरी बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे पूरी तरह से राजनीतिक उद्देश्य से लाया गया विधेयक बताया है।
विधानसभा में बिल पारित होने के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि भविष्य में उनकी सरकार बनती है तो इस कानून को वापस ले लिया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
कांग्रेस ने डिस्टर्ब एरिया प्रोटक्शन बिल को बताया गुजरात मॉडल की कॉपी
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद डोटासरा ने इस बिल का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक केवल एक पर्ची के आधार पर लाया गया है और इसके पीछे सरकार की मंशा साफ दिखाई दे रही है। डोटासरा ने आरोप लगाया कि यह कानून गुजरात मॉडल की तर्ज पर लाया गया है और इसे राजनीतिक हितों को साधने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके अनुसार इस तरह के कानून समाज को बांटने और ध्रुवीकरण करने की कोशिश हैं।
उन्होंने कहा कि यह बिल वास्तव में सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने के बजाय लोगों के बीच अविश्वास का माहौल पैदा कर सकता है। डोटासरा ने कहा कि प्रदेश में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जहां किसी क्षेत्र में हिंदू बहुसंख्या में हों और वे वहां प्रताड़ित हो रहे हों।
सत्ता में आने पर बिल वापस लेने का ऐलान
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि अगर भविष्य में पार्टी सत्ता में आती है तो इस बिल को वापस ले लिया जाएगा। गोविंद डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस समाज को बांटने वाली किसी भी नीति का समर्थन नहीं करती। उन्होंने यह भी कहा कि इस कानून के जरिए सरकार किसी क्षेत्र को अशांत घोषित कर सकती है और फिर उस आधार पर वहां जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े फैसले लिए जा सकते हैं। डोटासरा के अनुसार इससे आम लोगों की संपत्ति और अधिकारों पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए ऐसे कानूनों की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सामाजिक संवाद और विकास के माध्यम से समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
भाजपा ने बिल का किया समर्थन
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने इस बिल का स्वागत किया है और इसे जरूरी कदम बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह कानून उन क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखने और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। भाजपा का यह भी कहना है कि कांग्रेस ने पहले भी कई ऐसे मुद्दों पर समर्थन नहीं दिया है जो सामाजिक सुरक्षा से जुड़े हुए थे। पार्टी नेताओं ने तीन तलाक के मुद्दे का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी कांग्रेस मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में मजबूती से खड़ी नहीं हो पाई थी।
बाबा बालकनाथ ने कांग्रेस पर साधा निशाना
तिजारा से विधायक बाबा बालकनाथ ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस की सोच हमेशा से ही ऐसी रही है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में धीरे-धीरे जनसंख्या का संतुलन बदल जाता है और इससे स्थानीय परिवारों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
बाबा बालकनाथ ने कहा कि कई बार ऐसा होता है कि शुरुआत में किसी क्षेत्र में कुछ ही लोग होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी संख्या बढ़ती जाती है। इसके बाद वहां पहले से रहने वाले परिवारों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में स्थानीय लोगों के खिलाफ षड्यंत्र भी किए जाते हैं और परिवारों की महिलाओं के साथ छेड़छाड़ जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं, जिसके कारण लोग पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं। उनके अनुसार ऐसे हालात से बचने के लिए इस तरह के कानून जरूरी हो जाते हैं।
बिल को लेकर जारी है राजनीतिक बहस
डिस्टर्ब एरिया प्रोटक्शन बिल को लेकर राजस्थान की राजनीति में बहस अभी थमती नजर नहीं आ रही है। जहां भाजपा इसे सामाजिक सुरक्षा और संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक लाभ के लिए लाया गया कदम मान रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और अधिक गर्म हो सकती है। क्योंकि यह विषय केवल कानून तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बन गया है।


