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चंबल रिवर फ्रंट से ‘वंदे गंगा’ अभियान का जिला स्तरीय शुभारंभ

चंबल रिवर फ्रंट से ‘वंदे गंगा’ अभियान का जिला स्तरीय शुभारंभ

शोभना शर्मा। कोटा में गंगा दशहरा और विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर चंबल रिवर फ्रंट से ‘वंदे गंगा’ जल संरक्षण जन अभियान का जिला स्तरीय शुभारंभ हुआ। इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन जिले के प्रभारी मंत्री और सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर मंत्री सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और आम नागरिकों ने भाग लिया।

जल पूजन, आरती और जन भागीदारी का संदेश

कार्यक्रम की शुरुआत चंबल माता की प्रतिमा के समक्ष जल पूजन से हुई। इसके पश्चात प्रभारी मंत्री ने नदी में पुष्प अर्पित किए और आरती कर चुनरी चढ़ाई। यह प्रतीकात्मक गतिविधि जल के प्रति श्रद्धा और संरक्षण के भाव को जनमानस तक पहुंचाने का माध्यम बनी।

इस मौके पर 400 से अधिक महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली, जो रिवर फ्रंट पर जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरणीय चेतना का प्रतीक बनी। महिलाओं की इस सहभागिता ने मातृशक्ति की जागरूकता और प्रेरणादायक भूमिका को सामने लाया।

“जल है तो कल है” की शपथ

अपने संबोधन में मंत्री गौतम कुमार दक ने कहा कि इस अभियान की सफलता जन सहभागिता से ही संभव है। उन्होंने कहा कि “जल है तो कल है” का भाव केवल नारा नहीं, बल्कि जीवन का संकल्प बनना चाहिए। उन्होंने सभी नागरिकों से 20 जून तक जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों—जैसे तालाबों, बावड़ियों, कुओं की सफाई और संरक्षण—में श्रमदान से भाग लेने की अपील की।

मंत्री ने कहा कि जल की एक-एक बूंद महत्वपूर्ण है और हमें अपने परंपरागत जल स्रोतों की महत्ता को समझते हुए उन्हें पुनर्जीवित करना होगा। उन्होंने सबको जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई और आग्रह किया कि इसे व्यवहार में लाया जाए।

“एक पेड़ मां के नाम” और पौधारोपण संकल्प

कार्यक्रम में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की भी शुरुआत की गई। इस अभियान के तहत मातृशक्ति को तुलसी के पौधे भेंट किए गए। मंत्री ने कहा कि हर घर में एक पौधा लगाना और उसकी देखभाल करना हर परिवार की जिम्मेदारी होनी चाहिए। इस प्रतीकात्मक गतिविधि का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देना है।

मंत्री ने ‘हरियालो राजस्थान’ अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले वर्ष प्रदेश में 7 करोड़ पौधे लगाए गए थे और इस वर्ष का लक्ष्य 11 करोड़ पौधों का है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार जताते हुए कहा कि पर्यावरण की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम है जिसमें जनता की भागीदारी अनिवार्य है।

भूजल संकट पर जताई चिंता

कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा ने भी इस अवसर पर संबोधित करते हुए गिरते भूजल स्तर पर चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा कि यदि अब भी जल संरक्षण को लेकर ठोस प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढ़ियां पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसेंगी। उन्होंने ‘वंदे गंगा’ अभियान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया और 20 जून तक पारंपरिक जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई।

ऑनलाइन संकल्प और प्रमाणपत्र

अभियान को डिजिटल स्वरूप भी प्रदान किया गया है। जो भी नागरिक ऑनलाइन माध्यम से जल संरक्षण का संकल्प लेंगे, उन्हें प्रमाणपत्र भी ऑनलाइन ही प्रदान किए जाएंगे। यह पहल खासकर युवाओं को अभियान से जोड़ने और डिजिटल भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए की गई है।

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