latest-newsउदयपुरराजनीतिराजस्थान

दिशा बैठक विवाद: उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत और सांसद राजकुमार रोत आमने-सामने

दिशा बैठक विवाद: उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत और सांसद राजकुमार रोत आमने-सामने

शोभना शर्मा।  उदयपुर जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की हालिया बैठक के दौरान हुए विवाद ने अब खुला राजनीतिक रूप ले लिया है। इस बैठक को लेकर उदयपुर से भाजपा सांसद डॉ. मन्नालाल रावत और बांसवाड़ा-डूंगरपुर से सांसद राजकुमार रोत आमने-सामने आ गए हैं। दोनों सांसदों ने एक-दूसरे पर गंभीर और संवेदनशील आरोप लगाए हैं, जिससे यह मामला सिर्फ प्रशासनिक बैठक तक सीमित न रहकर सियासी संघर्ष में बदल गया है।

सांसद मन्नालाल रावत ने लगाए गंभीर आरोप

उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने इस पूरे प्रकरण को लेकर एक विस्तृत लिखित बयान जारी किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिशा बैठक के दौरान बीएपी सांसद राजकुमार रोत और आसपुर विधायक उमेश डामोर ने उनके खिलाफ अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल किया। रावत के अनुसार, बैठक के दौरान उनके साथ हाथापाई करने की कोशिश की गई और उन्हें जान से मारने तक की धमकी दी गई। डॉ. रावत ने कहा कि दिशा जैसी गंभीर और विकास केंद्रित समिति की बैठक में इस तरह का व्यवहार न केवल संसदीय मर्यादा के खिलाफ है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आघात करता है। उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।

अलगाववाद और विकास को लेकर आरोप

अपने बयान में सांसद मन्नालाल रावत ने और भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सांसद राजकुमार रोत डूंगरपुर क्षेत्र को अलगाववाद का टापू बनाने की सोच रखते हैं और उन्हें आदिवासी अंचल के समग्र विकास से कोई सरोकार नहीं है। रावत ने आरोप लगाया कि रोत शिक्षा और जनकल्याण योजनाओं का विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि राजकुमार रोत स्कूलों में मिड-डे मील योजना को बंद कराने का षड्यंत्र कर रहे हैं, जो गरीब और आदिवासी बच्चों के हितों के खिलाफ है। रावत के अनुसार, इस तरह के कदम सीधे तौर पर बच्चों की शिक्षा और पोषण पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अपमान का मुद्दा

डॉ. मन्नालाल रावत ने राजकुमार रोत पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अपमान का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रोत ने बैठक के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भ्रष्ट बताते हुए यह टिप्पणी की कि वे राशन सामग्री गुजरात ले जाकर बेच देती हैं। रावत के मुताबिक, यह बयान न केवल निराधार है, बल्कि प्रदेशभर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समाज की नींव मजबूत करने का काम करती हैं और उनके खिलाफ इस तरह की टिप्पणी पूरी तरह निंदनीय है।

दिशा बैठक के उद्देश्य पर उठाए सवाल

उदयपुर सांसद ने स्पष्ट किया कि दिशा समिति की बैठक केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 101 बिंदुओं पर आधारित होती है। इसका मुख्य उद्देश्य केंद्र प्रायोजित योजनाओं और विकास कार्यों की समीक्षा करना होता है। रावत का आरोप है कि बैठक के दौरान सांसद राजकुमार रोत विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक छींटाकशी करते रहे। डॉ. रावत ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा गांवों की समस्याओं के समाधान के लिए लगाए जा रहे जनकल्याणकारी शिविरों से आम जनता को राहत मिल रही है। इसके बावजूद सांसद रोत इन शिविरों में टेंट और भोजन के खर्च जैसे मुद्दों को उठा रहे थे, जबकि यह विषय बैठक के एजेंडे में शामिल ही नहीं था।

राजकुमार रोत का पलटवार

वहीं, बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत ने डॉ. मन्नालाल रावत के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अपने बयान में रोत ने कहा कि उदयपुर सांसद पहले से योजना बनाकर बैठक में आए थे और उनका मकसद जानबूझकर विवाद खड़ा करना था। राजकुमार रोत ने कहा कि उन्होंने बैठक में विकास कार्यों की गुणवत्ता, वन विभाग के पट्टों की स्थिति और आम जनता की समस्याओं से जुड़े मुद्दे उठाए थे। उनके अनुसार, आदिवासी क्षेत्रों में लोग वर्षों से पट्टों के लिए भटक रहे हैं, लेकिन इन गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय उन्हें बोलने से रोका गया।

भाषा और व्यवहार को लेकर आरोप

सांसद रोत ने आरोप लगाया कि पिछली एक दिशा बैठक को लेकर सांसद रावत ने ‘कबाड़ा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था, जिसका उन्होंने विरोध किया था। रोत का कहना है कि वे पूरी बैठक में मर्यादित भाषा का प्रयोग कर रहे थे, लेकिन उन्हें लगातार उकसाने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. रावत बैठक में लड़ाई और बखेड़ा करने के इरादे से आए थे और विकास से जुड़े मुद्दों को दबाने का प्रयास किया गया।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading