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अंता उपचुनाव : वसुंधरा-भजनलाल बैठक में उम्मीदवार चयन पर चर्चा

अंता उपचुनाव : वसुंधरा-भजनलाल बैठक में उम्मीदवार चयन पर चर्चा

शोभना शर्मा ।  राजस्थान की अंता विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने जहां अपने पुराने दिग्गज प्रमोद जैन भाया को उम्मीदवार घोषित कर मैदान में उतार दिया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में टिकट चयन को लेकर गहन मंथन चल रहा है। पार्टी में उम्मीदवार के नाम को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन शुक्रवार (10 अक्टूबर) को जयपुर में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक ने इस राजनीतिक समीकरण को और दिलचस्प बना दिया है।

इस बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ शामिल रहे। यह बैठक वसुंधरा राजे के 13 सिविल लाइन आवास पर हुई, जहां अंता सीट पर संभावित उम्मीदवारों के नामों पर गहन चर्चा हुई।

कंवरलाल मीणा की पत्नी भी रेस में

सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के भीतर फिलहाल छह से अधिक नामों पर चर्चा चल रही है। इनमें कुछ स्थानीय नेता, संगठन से जुड़े चेहरे और वसुंधरा राजे खेमे के समर्थक शामिल हैं। पार्टी में इस बात पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि टिकट चयन ऐसा हो जिससे स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी न बढ़े और गुटबाजी का संदेश भी न जाए।

इसी बीच पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा की पत्नी का नाम भी टिकट की दौड़ में शामिल बताया जा रहा है। कंवरलाल मीणा ने 2023 के विधानसभा चुनाव में अंता सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन सजा के बाद उनकी सदस्यता समाप्त होने से यह सीट खाली हुई थी।

बीजेपी के लिए अंता उपचुनाव बना ‘लिटमस टेस्ट’

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अंता उपचुनाव भाजपा के लिए पॉलिटिकल लिटमस टेस्ट साबित हो सकता है। यह चुनाव केवल एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि यह भी तय करेगा कि संगठन में वसुंधरा राजे की पकड़ कितनी मजबूत है। वसुंधरा राजे इस सीट पर अपने पसंदीदा उम्मीदवार को उतारने की कोशिश में सक्रिय हैं। वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ चाहते हैं कि निर्णय सामूहिक सहमति से लिया जाए, ताकि किसी भी गुट को दरकिनार किए जाने का संदेश न जाए।

स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवार की चुनौती

बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती “स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवार” की है। पिछले चार चुनावों में पार्टी ने बाहरी चेहरों पर भरोसा जताया था, लेकिन इस बार स्थानीय कार्यकर्ताओं ने साफ संदेश दिया है कि टिकट अंता के ही किसी नेता को दिया जाए। इस बार पार्टी नेतृत्व इस दबाव को समझते हुए सावधानी से आगे बढ़ रहा है। संगठन का मानना है कि यदि टिकट किसी बाहरी चेहरे को दिया गया, तो स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती है।

वसुंधरा कैंप बनाम संगठन की रणनीति

वसुंधरा राजे के करीबी सूत्रों का कहना है कि अंता उपचुनाव उनके लिए राजनीतिक पुनर्स्थापन का अवसर है। अगर उनका समर्थित उम्मीदवार मैदान में उतरता है और जीत दर्ज करता है, तो यह उनके प्रभाव की पुनः पुष्टि होगी। दूसरी ओर, संगठन यह चाहता है कि पार्टी की एकजुटता बनी रहे और किसी गुट विशेष का प्रभाव सीमित हो। सीएम भजनलाल शर्मा की प्राथमिकता संगठन की मजबूती और स्थानीय समीकरणों को साधना है। इसलिए बीजेपी अब संतुलन की नीति पर चल रही है, ताकि चुनावी समीकरण बिगड़ने न पाएं।

टिकट पर अंतिम मुहर दिल्ली से लगेगी

सूत्रों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में बीजेपी की कोर कमेटी बैठक होने वाली है। इस बैठक में रायशुमारी के आधार पर तीन नामों का पैनल तैयार कर हाईकमान को भेजा जाएगा। अंता उपचुनाव के लिए पार्टी ने सांसद दामोदर अग्रवाल को प्रभारी नियुक्त किया है। वे स्थानीय समीकरणों का फीडबैक जुटाने में लगे हैं। अंतिम निर्णय दिल्ली हाईकमान द्वारा लिया जाएगा, लेकिन इसमें भजनलाल शर्मा, वसुंधरा राजे और मदन राठौड़ की सहमति को निर्णायक माना जा रहा है।

कांग्रेस ने बढ़त बना ली, त्रिकोणीय मुकाबला तय

इस बीच, कांग्रेस ने पहले ही प्रमोद जैन भाया को मैदान में उतारकर शुरुआती बढ़त बना ली है। प्रमोद जैन भाया इस सीट से पहले भी विधायक रह चुके हैं और उनका क्षेत्र में अच्छा जनाधार है। वहीं, नरेश मीणा के निर्दलीय उतरने से मुकाबला अब त्रिकोणीय हो गया है। अंता उपचुनाव 11 नवंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी।

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